The Holy Cow-Vedic Gaumata

Wholesome cow milk converted to slow acting poison..?

गाय के दूध को ज़हर बना दिया..!

हमारे देवताओं ने, पूर्खों ने गाय को माता का दर्जा दिया, उसे पूजा; और जिसका दूध अम्रत समझ कर आरोगा,
कलियुग के प्रभाव ने उसी माता को आम पशु बना दिया। उस जीवन दायी गौ माता को ज़हरीले रासायन देकर उसके अम्रत समान दूध की मिलावट कर ज़हर बना दिया और हमें कहा की दूध मनुष्य का भोजन नहीं है!
कुछ इंसान का लालच कारण हुआ, की जीवन देने वाले दूध को धीमा ज़हर बना कर उसके उच्च दर्जे से नीचे गिरा दिया। 😥
क्या हमारे हज़ारों साल पहले के ऋषि मुनि बेवक़ूफ़ थे? या फिर सभी देवता जन ना समझ?

That cow, who our God’s worshipped and our ancestors gave the prefix of a mother, whose milk was thought to be an Amrit like food which we all drank and stayed healthy and fit with;
Negativity of kalyug brought this gau mata down to the category of a common animal,
The so called ‘Intelligent people’ mixed it with various poisons by feeding chemicals to mother cow thus converting the amrit like milk to slow acting poison and telling us all that milk is bad for humans!
Greed of the few highly placed humans spoilt the Indian breed of cows and then nutritionists and doctors world over, began the chant of ‘Milk is not for humans’.
Where is the logic in this statement?

Were all the Indian rishi muni, Ayurvedic practitioners 5000-6000 years ago fools??

ShreeNathji and Shree Krishn are called ‘Gopal’, meaning the keeper of cows!

Photo(Shree Krishn doing pujan of Gau mata).

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Giriraj Govardhan-Tongue at Radha\Shyam Kund

ShreeNathji, Shree Giriraj Govardhan

जीवहा मंदिर, राधा कुंड पर: Jihva (Shri Giriraj tongue) mandir at Radha Kund

राधा कुंड के इस मंदिर को गिरिराज जी की जीवहा (जीब, tongue)मानते हैं।

यह शिला जो आप देख रहे हैं, गिरिराज जी की पवित्र शिला है।

इसके पीछे एक वार्ता है:

‘श्री रघुनाथ दास स्वामी को एक कुआँ खोदना था, तो उन्होंने काम चालू करवाया। मज़दूर जब खुदाई कर रहे थे, उनका औज़ार एक शिला पर लगा जिस के कारण उस शिला से ख़ून बहने लगा।

खुदाई तुरंत बंद कर दी गई।

उसी रात स्वप्न में श्री कृष्ण ने श्री रघुनाथ स्वामी को बताया, “मैं गोवर्धन से अलग नहीं हूँ, यह शिला गिरिराज की जीभ है, उसे निकाल कर मंदिर में बिठाओ और पूजन शुरू करो।

राधा कुंड के जल से सेवा करो”।

यह वही प्राचीन मंदिर है; गिरिराज जी की हर शिला पवित्र और दिव्य है।

गिरिराज महाराज की जय हो!

श्रीनाथजी ठाकुरजी की जय

श्री राधा कृष्ण की जय

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ShreeNathji-Return to Vraj

                                                                                           “Jai ho ShreeNathji”
When You return to Vraj very soon, this is what Girirajji will feel like.

Your Dhajaji will fly on Shri Govardhan, though unseen to the world. Visible only to Your chosen bhakts.


Your Presence will again bring to life the dormant urjas and vibrations of several hundred years ago.

 ।। श्री गोवर्धननाथ स्योद्धववार्ता ।।
अर्थात्
।। श्रीनाथजी की प्राकट्य वार्ता ।।

यह ३ वाक़या जो इस पोस्ट में लिखे हैं, श्रीनाथजी की प्राचीन पुस्तक से लिए हैं.

तीन जगह उल्ल्लेख है की श्रीनाथजी व्रज जल्द ही पधारने वाले हैं. 
हो सकता है की श्रीजी ने इसके लिए पूर्ण तय्यारी भी कर ली होगी, अपने किसी भक्त और सेवक के साथ.

जय हो श्रीजी, जय श्री गोवर्धननाथजी
आपकी

आभा शाहरा श्यामॉ

कुछ भूल हुई तो क्षमा करिए
श्रीनाथजी के बहुत से नटखट दिव्य खेल और लीला 
”आज के वक़्त में”, 
इस लिंक पर पढ़ सकते हैं:

http://www.shreenathjibhakti.org

 

We all wait to welcome YOU SHREEJI, back to YOUR ORIGINAL DHAM AND YOUR REAL HOME:
“SHRI GIRIRAJ GOVARDHAN”.
YOU TOO MUST HAVE MISSED BEING HERE WITH YOUR BELOVED CHOSEN BHAKTS AND SHAKTIS.

ShreeNathji kripa 🙏

This life is a journey of many past lifetimes.

The soul which is blinded in maya can become pure with kripa of ShreeNathji.

When purity levels become high and deep, the jeevatma is able to recognise its reality.

Kripa and blessings enter when one keeps faith high, no matter what!

Jai ho!

Jai Shree RadhaKrishn  Jai ShreeNathji Prabhu

🙏

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ShreeNathji as a Jyotish Acharya-“Live Varta”

ShreeNathji Thakurjee:Live interaction varta in today’s time period

(This post is in hindi)
१०.११.२०१७; वृंदावन धाम

‘श्रीनाथजी की एक खेल वार्ता ज्योतिष शास्त्र पर, श्री गुसाँईजी के साथ’
आज के स्वप्न में:

श्रीनाथजी का दिव्य विवरण उनके ही मधुर शब्द, मैंने कोशिश करी है पूर्णता से वही रखने की।
Narration by ShreeNathji Himself:

श्रीजी कहते हैं, “चलो आभा शाहरा श्यामॉ आज कुछ अच्छा बताता हूँ तुझे, सुनेगी क्या?”

आभा, “ ज़रूर श्रीजी, हमें तो हमेशा उत्सुकता रहती है, कुछ नया सुनने की। बताने की कृपा करें“🙏

श्रीजी, “सुन तो; एक दिन गुसाँईजी के साथ कुछ खेल करने का मन हुआ। मैं उसके पास गया और अपना पैर दिखा कर बोला; ‘ गुसाँई जी ये देखो मेरे पैर में चोट आइ है, ज़रा पंचांग देख कर बताओ ऐसा कौन सा समय था की मुझे आज चोट लगी’
मेरी चोट तो बहुत ही छोटी सी थी, लेकिन मैंने दिखाने के वक़्त उसे इतना बड़ा कर के दिखाया, हा हा।
(गुसाँई जी से मस्ती करनी थी। वो ज्योतिष shashtr के बहुत बड़े जानकार थे और ज्ञानी भी);
‘हाँ तो बताओ कौन सा ख़राब महूरत था जब मुझे लगी?’

गुसाँई जी ने चोट देखी और गर्दन हिला कर कहा, “ हाँ बाबा चोट तो लगी है, किंतु महूरत देखने के लिए ज़रा मुझे बताइए किस ‘समय’ चोट लगी थी. उस ‘समय’ के अनुसार मैं पंचांग देखता हूँ”।

अब मैं तो चुप; मुझे तो याद भी नहीं था और कोई ऐसी चोट भी नहीं थी, क्या करूँ? सोचता था।
तो मैं ने गुसाँईजी से कहा, ‘मैं ज़रा सोचता हूँ, थोड़ा वक़्त दो’;
और भागा ‘मेरा पंचांग’ देखने के लिए। क्योंकि अगर मैं कोई भी समय बता देता और वह ‘चल लाभ अम्रत’ का महूरत होता तो मैं पकड़ा जाता। इसलिए मैं देखने भागा की कौन से ‘समय’ में ‘काल, राहु काल,’ था उस दिन।
और मेरी प्रतिकृति उनके सामने बिठा दी, जिस से उनको लगे मैं सामने बैठा सोच रहा हूँ।

पंचांग जल्दी जल्दी देख कर वापस आया, ‘ हाँ मुझे याद आ गया, … इस समय लगी थी, अब जल्दी से देखो और बताओ’।
गुसाँई जी देखते हैं और कहते हैं, ‘हाँ बाबा यह तो राहु काल का समय था; किंतु इस समय अगर लगी है तो यह जल्दी ठीक होने वाली नहीं है, ये तो अब और फूल कर इतना बड़ा हो जाएगा’।
मैं तो फँस गया, अब क्या करूँ? मैंसोचता हूँ की शायद से गुसाँई जी ने मुझे पकड़ लिया है।
इतने में वो बोलता है, ‘श्रीजी ऐसा करो, एक बार फिर से सोचो सही समय क्या था, हो सकता है ग़लत याद आया हो’।
मैं ख़ुश हो गया, ‘हाँ हाँ ज़रूर हो सकता है मेरे याद करने में कुछ ग़लत हो गया हो, में फिर से याद करता हूँ’।
मुझे मेरी बात ठीक करने की जगह मिल गयी, मैं फिर भागा और पंचांग देखा की ‘चल,लाभ,अम्रत’ कब का है।

और आ कर वो समय बता दिया। ‘गुसाँई जी याद आ गया, … ये समय था, शायद पहली बार ग़लत बता दिया था’।
उसने पंचांग देखकर बताया, ‘चलो श्रीजी बच गए, ‘चल’ में लगी थी चोट तो चलता है कोई चिंता की बात नहीं है, क्योंकि चल के बाद लाभ है और लाभ के बाद अम्रत और शुभ है, तो सुबह तक बिलकुल ठीक हो जाएगी, आप खेलिए’।
तो फिर मेरी चोट को मैं ने जल्दी से छोटा कर दिया और ग़ायब हो गयी।

गुसाँई जी मेरी मस्ती खेल पकड़ लेते थे किंतु हमेशा मुझे रास्ते भी बता देते थे।

मुझे भी आता है पंचांग देखना, हाँ … नक्षत्र, होरा, महूरत सब देखना आता है मुझे, भले ही पाठशाला में पढ़ने नहीं गया.. हा हा हा।

और गुसाँई जी के पुत्र गोकुल नाथ ने तो ज्योतिष शास्त्र आधारित ‘ वाचनामृत कोठा’ की रचना की थी।

गुसाँईजी मेरे बहुत ही प्रिय थे; हम लोग ऐसे ही खेलते थे।
सब को ख़ुशी बाँटनी चाहिए, इस लिए सब को सुनाना।

जय हो प्रभु 🙏
आपकी लीला और खेल बहुत आनंद प्रदान करते हैं

श्रीनाथजी की जय हो!
हमेशा आपकी भक्ति में

#ShreeNathji #ShriGusainji #Vrindavandham
#ShreenathjiVarta #ShriGovardhannathji

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Be aware if you are taking Gelatin capsules

Vegetarians please be aware before you pop that capsule:

Vegetarian people please read this post and be aware:

अगर आप शाकाहारी हैं तो इस पोस्ट को कृपा करके पढ़िए 🙏

बहुत सारे डॉक्टर आपको बेवक़ूफ़ बनाते हैं; माँसाहारी (non – vegetarian) दवाई दे रहे हैं जानकारी नहीं देते हैं।

Gelatine Capsules come as hard gel or soft gel, origin is always Beef or pork.

जेलेटिन (Gelatin) से बहुत सारे कैपसूल (capsule) बनते हैं। जेलेटिन सिर्फ़ और सिर्फ़ गाय और सूवर की हड्डी और चमड़ी से बनते हैं। इसमें hardgel और soft gel के कैपसूल आते हैं।

Allopathy हो या आयुर्वेद, उस कैपसूल में भले ही अंदर बहुत अच्छे शाकाहारी (vegetarian) पाउडर से भरे हों, ये पूर्ण तरह से माँसाहारी ( non-vegetarian) होते हैं।

मुझे भी एक आयुर्वेदिक डॉक्टर ने पाँच दवाई दी,जिन पर gelatine origin लिखा है। मुझे जानकारी थी की जेलेटिन गाय या सूवर की हड्डी से ही बनता है। किंतु doctor से ये बात सीधे पूछने पर भी उसने कहा की कहीं माँसाहारी नहीं लिखा है, आपको दवाई समझ कर खा लेना चाहिए।

तो फिर मैंने इन चार Ayurvedic कम्पनी से सीधी पूछताछ से confirm करा की उनके capsule गाय और सूवर से ही बने हैं।

मैंने अपना फ़र्ज़ समझ कर ये पोस्ट लिखी है, शायद किसी और के काम आ जाए – आप share भी करें।

Proof के तौर पर मेरे पास उन कम्पनी के mail भी हैं।

आप वैष्णव शाकाहारी हैं तो किसी भी दवाई लेने से पहले ज़रूर जाँच कर ले, उस पर अगर gelatine लिखा है तो वह माँसाहारी ही है। जो vegetarian capsule हैं उन पर लिखा होता है

If it is a vegetarian capsule it is always mentioned in the pack.

कम्पनी से:

Our two-piece hard-shell gelatin capsules (powder filled) are typically made of a combination of beef (bovine) and pork (porcine) gelatins. By contrast, our softgel (liquid filled) gelatin capsules are typically derived solely from beef gelatin, not pork.

(All come from Bovine sources)

अपने शुद्धि का ध्यान रखें 🙏

Indr Sarovar-Udaipur

Sacred Lotus Pond – Kamal Kunj at sacred Indr Sarovar, #Eklingi, Udaipur; Near Nathdwara.

Lotus from here are used for ShreeNathji Shringar at Nathdwara mandir. #ShreeNathji Thakureje normally wears Kamal on His waist, the number depending o the type of Shringar on that particular day.

An album of 34 photos from this day; at sacred Indr Sarovar, month of June.

#Indrsarovar #ShreeNathji #Nathdwara #Eklingjimandir

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ShreeNathji wearing four Lotus

 

Do not create picnic spots at Vrindavan

श्री राधा कृष्ण श्रीनाथजी की पवित्र लीला भूमि, व्रज मंडल को टुरिस्ट स्पॉट बना कर और नष्ट मत करीए 🙏

#CMOyogi आपसे निवेदन है सभी व्रज प्रेमियों का, पहले संरक्षण (preservation) और मरम्मत (restoration) के लिए funds दीजिए। नए विकास (development) की यहाँ जगह और ज़रूरत इस समय नहीं है 🙏

– first step towards responsibility for Vraj Mandal is preservation and restoration of what is left.

(Several things are already beyond repair).

If nothing is done even today for preservation, Vraj will be in a crisis situation.

The point of no return😢

CM YOGI COMING TO VRINDAVAN TO INAUGURATE THE BIGGEST PARK IN INDIA😥 Our plea to this government who is spending multi crores to hide the sad state of Vraj.. ख़ुश होने की बात है? नहीं!!

The crores and crores they sign on papers need to be used for preservation first. If preserved there will be no need to create anything new. Vraj Mandal cannot be marked as a tourist spot.

It’s excellent that the present government is giving any thought to re development of Vraj.

Sadly this re development will not work till preservation and restoration is given priority.

One just has to take a walk on Vrindavan Parikrama marg to see the degradation of this pavitra Dham.

– We first need to vacate the encroachment on the marg and make a walkway at Shri Yamunaji. From where bhakts can access the pavitr leela sthals of Shree RadhaKrishn.

– Removing the monkey menace is the second step in taking care of our pavitr Dham. All peacocks are being driven away by this menace and bhakts walk in fear.

– Pigs have entered every sacred sthal, including at Shri Govardhan. Which need to be removed ASAP. Five years ago none were there.

Someone is trying to destroy the pavitrata of Hindu teerths.

– Entire Chatikara pavements have already been taken over by the illegal hawkers.

– The Nagar Palika and Police force should become accountable.

The people in power never see the REAL VRAJ PROBLEMS. As every thing is cleared and cleaned at the areas where they visit.

In olden days the Raja and Maharajas walked around their cities in disguise to SEE THE REAL STATE OF THEIR LAND.

Wonder what Vraj Mandal we are leaving for our children and grandchildren.

They will only be able to see the original reality in some photos or videos which bhakts may have uploaded.

And Girirajji Govardhan is in the worst of state today.

All just TAKE..TAKE..TAKE.

May the present government see the truth of their actions.

The crores and crores they sign on papers need to be used for preservation and restoration first. If preserved there will be no need to create anything new.

The old and ancient pavitrata if returned to Vraj Mandal will be enough for the higher divine shaktis.

OR ELSE THESE SHAKTIS WILL NO LONGER BE AROUND.

दिव्य शक्तियों को साफ़, सुथरा पवित्र वातावरण चाहिए.

नहीं तो वह दिन दूर नहीं, की वे सब भूतल में गहरी उतर जाएँगी और हम हाथ मलते रह जाएँगे, अपने दुर्भाग्य पर। हमारे बच्चों को दर्शन का लाभ नहीं मिल पाएगा, और हम सब इसके ज़िम्मेदार होंगे।

जय श्रीनाथजी, जय श्री राधा कृष्ण

कृपा करें, सदबुद्धि दें,

आभा शाहरा श्यामा

#vrajmandal #cmyogi # savevraj #savegovardhan #saveyamuna #utterpradeshgoverment #adityanathyogi #primeministeroffice #savevrindavan #pmoindia #cmoyogi

Vraj Mandal belong to Shree RadhaKrishn-ShreeNathji, and we are doing our best to destroy Their divine land

Nine Gopi Elephant at Kunjera Village, Vraj Mandal

Kunjera village is the place where the nine gopis took the form of an Elephant for Shree Krishn

In this post you will be able to hear the katha behind Gopis taking an elephant form for Shree Krishn.

When Shree Krishn was leaving Vrindavan, the Gopis requested Him not to leave. Shree Krishn joked that if they could show Him an elephant, he would not leave. Not being able to find an elephant, nine gopis came together and formed an elephant, which is called the Nav-nari kunjara.

The meaning of this divine leela in the words of the pujari:

A small mandir has been erected here

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The earlier mandir was looted and the original murti depicting this divine leela was stolen. Just a couple of years ago this mandir was established by a bhakt, and a painting is being worshipped at present.

Abha Shahra

The Nine Gopi Elephant

Kunjera village mandir

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The pujaris who narrated the varta

Abha Shahra

Giriraj Shila are worshipped here too

Kunjera village is located few kms from Shri Govardhan on the Northern side, towards Radha\Shyam Kund.

The village is not very clean and residents are quite poor.

Abha Shahra

The Seven Elephant mandir at Kunjera village