Do not create picnic spots at Vrindavan

श्री राधा कृष्ण श्रीनाथजी की पवित्र लीला भूमि, व्रज मंडल को टुरिस्ट स्पॉट बना कर और नष्ट मत करीए 🙏

#CMOyogi आपसे निवेदन है सभी व्रज प्रेमियों का, पहले संरक्षण (preservation) और मरम्मत (restoration) के लिए funds दीजिए। नए विकास (development) की यहाँ जगह और ज़रूरत इस समय नहीं है 🙏

– first step towards responsibility for Vraj Mandal is preservation and restoration of what is left.

(Several things are already beyond repair).

If nothing is done even today for preservation, Vraj will be in a crisis situation.

The point of no return😢

CM YOGI COMING TO VRINDAVAN TO INAUGURATE THE BIGGEST PARK IN INDIA😥 Our plea to this government who is spending multi crores to hide the sad state of Vraj.. ख़ुश होने की बात है? नहीं!!

The crores and crores they sign on papers need to be used for preservation first. If preserved there will be no need to create anything new. Vraj Mandal cannot be marked as a tourist spot.

It’s excellent that the present government is giving any thought to re development of Vraj.

Sadly this re development will not work till preservation and restoration is given priority.

One just has to take a walk on Vrindavan Parikrama marg to see the degradation of this pavitra Dham.

– We first need to vacate the encroachment on the marg and make a walkway at Shri Yamunaji. From where bhakts can access the pavitr leela sthals of Shree RadhaKrishn.

– Removing the monkey menace is the second step in taking care of our pavitr Dham. All peacocks are being driven away by this menace and bhakts walk in fear.

– Pigs have entered every sacred sthal, including at Shri Govardhan. Which need to be removed ASAP. Five years ago none were there.

Someone is trying to destroy the pavitrata of Hindu teerths.

– Entire Chatikara pavements have already been taken over by the illegal hawkers.

– The Nagar Palika and Police force should become accountable.

The people in power never see the REAL VRAJ PROBLEMS. As every thing is cleared and cleaned at the areas where they visit.

In olden days the Raja and Maharajas walked around their cities in disguise to SEE THE REAL STATE OF THEIR LAND.

Wonder what Vraj Mandal we are leaving for our children and grandchildren.

They will only be able to see the original reality in some photos or videos which bhakts may have uploaded.

And Girirajji Govardhan is in the worst of state today.

All just TAKE..TAKE..TAKE.

May the present government see the truth of their actions.

The crores and crores they sign on papers need to be used for preservation and restoration first. If preserved there will be no need to create anything new.

The old and ancient pavitrata if returned to Vraj Mandal will be enough for the higher divine shaktis.


दिव्य शक्तियों को साफ़, सुथरा पवित्र वातावरण चाहिए.

नहीं तो वह दिन दूर नहीं, की वे सब भूतल में गहरी उतर जाएँगी और हम हाथ मलते रह जाएँगे, अपने दुर्भाग्य पर। हमारे बच्चों को दर्शन का लाभ नहीं मिल पाएगा, और हम सब इसके ज़िम्मेदार होंगे।

जय श्रीनाथजी, जय श्री राधा कृष्ण

कृपा करें, सदबुद्धि दें,

आभा शाहरा श्यामा

#vrajmandal #cmyogi # savevraj #savegovardhan #saveyamuna #utterpradeshgoverment #adityanathyogi #primeministeroffice #savevrindavan #pmoindia #cmoyogi

Vraj Mandal belong to Shree RadhaKrishn-ShreeNathji, and we are doing our best to destroy Their divine land

Nine Gopi Elephant at Kunjera Village, Vraj Mandal

Kunjera village is the place where the nine gopis took the form of an Elephant for Shree Krishn

In this post you will be able to hear the katha behind Gopis taking an elephant form for Shree Krishn.

When Shree Krishn was leaving Vrindavan, the Gopis requested Him not to leave. Shree Krishn joked that if they could show Him an elephant, he would not leave. Not being able to find an elephant, nine gopis came together and formed an elephant, which is called the Nav-nari kunjara.

The meaning of this divine leela in the words of the pujari:

A small mandir has been erected here


The earlier mandir was looted and the original murti depicting this divine leela was stolen. Just a couple of years ago this mandir was established by a bhakt, and a painting is being worshipped at present.

Abha Shahra

The Nine Gopi Elephant

Kunjera village mandir


The pujaris who narrated the varta

Abha Shahra

Giriraj Shila are worshipped here too

Kunjera village is located few kms from Shri Govardhan on the Northern side, towards Radha\Shyam Kund.

The village is not very clean and residents are quite poor.

Abha Shahra

The Seven Elephant mandir at Kunjera village

Stop using leather if you are a Vaishnav

For all Vaishnavs, “Do you do seva of Shree Thakurjee  and  Gaumata”

Then stop using leather

सभी वैष्णव के लिए; “श्री ठाकुरजी और गौमता की सेवा और पूजन करते हैं?”

चमड़ा इस्तेमाल करना बंद कीजिए

The Indian Vedic Cow, known as gaumata is the original Cow about which is spoken in all our scriptures.

Hinduism has no place for cruelty to animals and eating of corpses. Humanity does not propagate farming of animals for human consumption.

Our environment needs to be purified; as well as our human body, to enable any rise in consciousness within ourself or on Earth vibration level.


सभी वैष्णव के लिए; “गौमता की सेवा और पूजन करते हैं?”

श्रीनाथजी हवेली नाथद्वारा के बाहर लिखा रहता है;

चमड़ा पहन कर भीतर नहीं जायें

कभी सोचा है क्यों?Abha Shahra

ShreeNathji Haveli at Nathdwara

ShreeNathji Haveli main entrance at Nathdwara – where it is written; to remove leather belts before entering the premises

चमड़ा किसी मरे हुए जानवर की खाल है। ठाकुरजी के शुद्धि नियम अनुसार इससे अशुद्धि होती है।

हमारा शरीर जब मरे हुए जानवर की खाल पहनता है या उपयोग में लेता है, तो अशुद्धि में होता है।

दूसरी सच्चाई यह है की अधिकतम चमड़ा गौमाता से बनाया हुआ होता है।

हम अगर वैष्णव हिंदू हैं तो ज़रूर गाय की सेवा और पूजा करते हैं।

फिर हम उसी मरी हुई गाय की वस्तु का इस्तेमाल करते हैं।

गौ की सेवा, श्रीनाथजी की सेवा, श्री राधा कृष्ण की सेवा, पूजा करते हैं, और दूसरी तरफ़, उन्ही की गौमता (या अन्य जानवर) को मारकर बनाई हुई वस्तु का इस्तेमाल भी करते हैं?

यह सच्चाई हमारे धर्म और भक्ति से जुडी है.

दूसरी सच्चाई, अगर इंसानियत के अनुसार देखें; की किस तरह से गौमता (या कोई भी जानवर) को तड़पाकर यह चमड़ा निकालते हैं, तो आपकी आत्मा भी काँप जाएगी.

जितनी कोमल गाय का बछड़ा, उतनी क़ीमती उसकी खाल होती है.Abha Shahra

Young calves are used to make the most expensive leather products

Young calves are used for making the most expensive leather products

आप चाहें तोयूटूब (U Tube)’ पर गाय से उसकी खाल निकलना और उससे वस्तु कैसे बनती है; उसका प्रॉसेस देख सकते हैं।

(लिंक देने की ज़रूरत नहीं समझती हूँ, क्योंकि बहुत आसानी से आप ढूँढ सकते हैं)

१४ साल पहले जब सत्य मैंने समझा, तभी से चमड़े की बनी वस्तुएं का इस्तेमाल बंद कर दिया है. इसके पहले मुझे भी बहुत शौक था चमड़े के डिज़ाइनर बैग और जूते चप्पल पहनने का.

आज बाजार में अच्छी क्वालिटी चमड़ा रहित चप्पल, जूते, पर्स, वॉलेट, बेल्ट, सोफ़ा, कुर्सी आदि मिलने लगे हैं.

चमड़े का इस्तेमाल बंद करके हम चाहें तो अपने जीवन में शुद्धि बढ़ा सकते हैं.

जब शारीरिक शुद्धि बढ़ेगी तो भाव शुद्धि में भी बढौती होगी.

भाव शुद्धि जितनी बढ़ेगी, हम उतना ज्यादा ठाकुरजी के करीब अपने आपको पाएंगे.untitled-11-2

हम इतने अंधकार में कैसे जी सकते हैं?

जय हो प्रभु किहमें सदबुद्धि मिले

ठाकुरजी, श्रीनाथजी बाबा की जय हो!

(अगर आप इस बात से सहमत हैं, तो कृपया पोस्ट को शेयर करिये.

मेरा अनुभव है की ज्यादातर लोग बहुत बार बिना सोचे समझे कुछ करते रहते हैं; जैसे की चमड़े का इस्तेमाल करना.

बहुत से लोग इस्तेमाल कर रहे है क्योंकि सच्चाई को कभी ध्यान नहीं दिया.

इन वैष्णव की आँख खुलने के बाद शायद चमड़ा इस्तेमाल बंद कर दें. उनकी मदद करिये).

धन्यवाद आप सभी को, जय श्रीकृष्ण!

(किसी ने कामेंट्स में पूछा की मैंने सिर्फ़ गौमता क्यों लिखा, सभी जानवर की खाल से वस्तु बनती है, उसका जवाब मेरी समझ में:

इस पोस्ट में दो बातें हैं.

पहली, की जो माँसाहारी हैं, उनका भोजन ही जानवर से बनता है, इसलिए वे ऊपर से शरीर पर कुछ भी पहने, एक ही बात है.

तो अगर मैं उनसे कहूँ की आप चमड़ा नहीं पहनिए, तो ना इंसाफ़ी होगी, क्योंकि जो भोजन वे करते है, उसे पहनने में कुछ ग़लत नहीं है.

सभी जानवर की खाल से चमड़ा बनता है, क्रूरता से, लेकिन माँसाहारी भोजन भी इतनी ही क्रूरता से बनता है;

तो जब तक आप शाकाहारी नहीं होते, कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, की आप क्या पहनते हैं; और मैंने यह पोस्ट माँसाहारी इंसान को शाकाहारी बनानेके लिए नहीं लिखी.

दूसरी बात, जो भक्ति मार्ग से जुड़े हैं, वे वैष्णव कहलाते हैं, ठाकुरजी की सेवा करते हैं, और भक्ति में सात्त्विक भोजन ज़रूरी होता है. तो इन भक्तों को माँसाहारी नहीं होना चाहिए.

और अगर आप माँसाहारी नहीं हैं तो फिर चमड़ा मत पहनिए; इस पोस्ट का मेसिज यह है.

ठाकुरजी श्रीनाथजी, श्री राधा कृष्ण की सेवा और पूजन में गौ ज़रूरी है.


इसलिए उन भक्तों की आँख खोलने के लिए लिखा है,

अगर आप शाकाहारी हैं, भक्ति में हैं, तो चमड़ा शरीर पर धारण मत कीजिए.

बाक़ी सभी जानवर को क्रूरता से बचाना ज़रूरी है, वह कोई और पोस्ट में लिखूँगी)

धन्यवाद. 🙏

#gaumata #abhashahra #stopleatheruse #crueltytoanimals #shreenathjihaveli #deadanimals #peta #cowleather #hinduism #eatingcorpse #vediccow

Website in ShreeNathji, Shree RadhaKrishn seva

Website in ShreeNathji, Shree RadhaKrishn seva


श्रीनाथजी ठाकुरजी की वेब्सायट :

The website made only in ShreeNathji seva initially in 2008, is now updated and available to all bhakts.

श्री ठाकुरजी श्रीनाथजी की सेवा में बनी यह website २००८ में बनी, अब अप्डेट होकर भक्तों के लिए उपलब्ध है।

Screen Shot 2018-07-09 at 1.12.04 PM 

This website is extraordinary, the content available here will not be found anywhere else, few topics:
यह वेब्सायट अपूर्व है, यहाँ आप जो जानकारी पाएँगे और कहीं नहीं मिलेगी; कुछ प्रसंग:

ShreeNathji swarup is the combined merged swarup of Shree RadhaKrishn
श्रीनाथजी स्वरूप में श्री राधा कृष्ण समाए हुए हैं

Is ShreeNathji awake in our world and continues His divine Play with bhakts?
Leela as described in the ancient granths 84 Vaishnavs and 252 Vaishnavs ke varta; are they a part of few bhakts LIVE INTERACTIONS with Shree Thakurjee today?
क्या श्रीनाथजी एक बार फिर हमारे बीच खेल कर रहे हैं?
क्या ८४ वैष्णव, २५२ वैष्णव वार्ता जैसी कृपा आज एक बार फिर ठाकुरजी अपने भक्तों पर बरसा रहे हैं?


Is ShreeNathji Thakurjee soon returning to Vraj? Where is it written that ShreeNathji will be back at Girirajji?
ठाकुरजी क्या नाथद्वारा हवेली से गिरिराज गोवर्धन वापिस पधार रहे हैं?
कहाँ लिखा है की श्रीनाथजी वापस व्रज लौटेंगे?


How did ShreeNathji bless us with His Sakshatkar darshans through His Mukharwind at Shri Govardhan; Read in ShreeNathji’s own words why did He granted darshans?
श्रीनाथजी के साक्षात्कार उनके मुखारविंद से कैसे हुए? क्यों हुए, उन्हीं के मधुर अन्दाज़ में समझें।


Giriraj Govardhan complete history with ShreeNathji Pragaty varta in english and hindi
गिरिराज गोवर्धन पृथ्वी पर कैसे विराजमान हुए?

What is the bhao of 8 Sama darshans at Nathdwara. What is the plan of ShreeNathji Haveli?
नाथद्वारा में आठ समा के दर्शन के भाव क्या हैं? नाथद्वारा हवेली का नक़्शा कैसा है?


ShreeNathji Gaushala details at Nathdwara with several photos and videos
श्रीनाथजी गौशला का विवरण, फ़ोटो और विडीओ के साथ


What was the route of ShreeNathji yatra to Nathdwara from Girirajji?

श्रीनाथजी की यात्रा व्रज से नाथद्वारा कहाँ, कहाँ से गुज़री?


Why did Thakurjee have to leave Shri Govardhan and stay at Nathdwara for hundreds of years?
क्यों प्रभु को गिरिराज्जि छोड़ कर नाथद्वारा इतने वर्ष रहना पड़ा?


What is the correct form of bhakti?
सही भक्ति कैसे करनी चाहिए?
How did Shree Hari manifest Golok?
श्री हरी ने गोलोक का प्रगट्य कैसे करा?


Shri Govardhan – Punchri end, South side

Many such questions are answered here; with an extensive extraordinary photo gallery, on this website
ऐसे बहुत से सवाल, जवाब; आश्चर्य चकित करने वाली फ़ोटो गैलरी, इस वेब्सायट पर

ShreeNathji Haveli at Nathdwara

Warm regards and shubh aashish, S Prem,
ShreeNathji ke seva mein
Abha Shahra Shyama
Jai Shreeji!
Shreeji Ki Jai Ho!


Shri Gusainji Baithakji at Chandra Sarovar

Shri Gusainji Baithakji at Chandra Sarovar is called the Viprayog baithakji. It is the 6th Baithakji.

For six months Shri Gusainji has to stay here away from ShreeNathji.

ShreeNathji Mandir in Shri Govardhan is also visible from here.

You can hear details of this ShreeNathji varta from the present mukhiyaji in this video below.

ShreeNathji Mandir on Shri Govardhan is visible from here

View of ShreeNathji Mandir on Shri Govardhan from this Baithakji

Shri Gusainji Viprayog Baithakji at Chandra Sarovar

ShreeNathji was very attached to Shri Gusainji

Jai ShreeNathji Prabhu 🙏

“ShreeNathji Sakshatkar darshans on Girirajji”

“ShreeNathji Sakshatkar darshans on Girirajji”: Prabhu ShreeNathji and Gurushree’s kripa

श्री ठाकुरजी के साक्षात दर्शन, उनके मुखारविंद, जतीपुरा में; आज से ठीक १३ साल पहले; ऐसी कृपा की कोई और मिसाल नहीं है।

दर्शन भी दिए और फ़ोटो भी लेने दिया; २०१४ में हमें आज्ञा भी दी सभी वैष्णव के साथ शेर करने की: क्या ऐसा कभी पहले हुआ है?

This divine leela happened 13 years ago on the auspicious day of 9th June 2005, at ShreeNathji Mukharwind, Giriraj Govardhan, Jatipura, with kripa of Gurushree Sudhir bhai; and only because of his close sakha bhav with prabhu ShreeNathji.

We all wonder what Shree Prabhu looks like!

The only True photo of ShreeNathji, Shree GovardhanNathji, Shree Thakurjee, Shree Dev Daman: In His Child Swarup.

Please take a moment and see for yourself in the photo above, just below the point where I am applying tilak; complete Face of Shree Thakurjee is visible as this (white) Ujjaval Urja (energy). This divine face Appeared for the duration of my pujan and Gurushree clicked the photos. The mukut, mor pankh, tilak, earrings, long black hair, both palms holding His own face and watching me do pujan, is ShreeNathji giving darshans of His Lalan swarup.

(Just for the record: it is not photoshopped, nor tampered in any way.

Details can be read on our website:

Given to us and ordered to share with His bhakts all over the world.

Thank you Prabhu for this kripa on all Your bhakts.

ShreeNathji Sakshatkar photo

ShreeNathji Sakshatkar from His Mukharvind

Jai ShreeNathji

Kusum Sarovar,Shri Govardhan


Kusum Sarovar, a beautiful sandstone monument, is a 25-minute walk from Radha Kund. Kusum means “flower,” and here the gopis would pick flowers for Shree Krishn.



The ghats at this kund and the buildings above the kund were built by Jawahir Singh, the king of Bharatpur around 1764, in honor of his father Raja Surajmul.

Surajmul attacked the Mughal King of Delhi and was killed in the battle.

His son Jawahir Singh then attacked Delhi and killed the Mughal king.


On the upper level are three tombs.

The main tomb of Raja Surajmul  has beautiful paintings on its ceiling depicting the pastimes of Shri Krishn and the lotus feet of Shri Krishn engraved on the floor.


There are also some paintings of Raja Surajmal in his court.

The other tombs are those of his two queens, Kishori and Hansiya.

There are beautiful paintings on the ceiling of these two tombs.



There is also a Giriraj Temple here.

ShreeNathji Bhajan video from Mukharwind


This is a recording of a bhajan, arti from Shri Govardhan, Jatipura Mukharwind.

Hope you enjoy listening to it; the bhao and bhakti of ShreeNathji, Shree RadhaKrishn bhakts is immense at this sthal.

गिरिराज गोवर्धन, श्रीनाथजी मुखारविंद :
“यमुना जल मा केसर घोले..”
श्रीनाथजी का आशीर्वाद, जतीपुरा से अपने भक्तों के लिए; ८.५० मिनट का आनंद.
सुनिए और दर्शन कीजिये,
श्री ठाकुरजी को तैयार करते हुए भजन, आरती सहित; जतीपुरा मुखारविंद.
मेरे श्रीनाथजी ठाकुरजी की जय !
(The sewaks here have stopped people from recording at the Mukharwind since the past few months. This video is from an earlier period when recording was permitted.
So please help to spread the Arti darshans to all Vaishnavs)

Details of ShreeNathji Mukharvind at Jatipura, Shri Govardhan

Shreeji lives in Vraj at Mathura on Giriraj Govardhan. His Mukharvind mandir is at the base Girirajji, the place of His Pragatya.

This Govardhan Shila is also known as the Shringar Sthali – The Mukharvind of Giriraj Govardhan; according to the Vallabh Sampraday. Annakut Pujan is held here every year. Hundreds of bhakts visit daily and worship with milk and flowers etc. Many begin their parikrama of Giriraj Govardhan from this point.

This Sthal is very very Alive with the Divine vibrations and energy.

Shreeji does Shayan here for six months every year. (Vasant Panchmi to Dassehra).

After the Sandhya Aarti at His Nathdwara Mandir, He comes at the Mukharvind Mandir on Shri Govardhan to give Shayan Darshans. During this period, His Presence is very Live and can be felt by the receptive bhakts; so once the Shringar is complete no photography is allowed. Before this photographs can be taken.

The Mukharvind of Shreeji is decorated and worshipped every evening. It is believed to be Alive with His presence.

Jatipura was originally known as Yatipura. Shri Vallabh Achary lived on this side of Girirajji as he found it easier to climb up for Shreeji’ seva. In that time period it wa like a jungle, only the Anyor side was inhabited with few villages. Another name for a sadhu or sant is ‘Yati’, and anyone looking for Shri Vallabh was directed here, and people soon began calling it the place where the ‘Yati’ resides; hence the name Jatipura. In Vraj bhasha ‘Y’ is pronounced as ‘J’.

The 14th Baithakji is located in front of the Mukharvind. It was from here that Shri Vallabh narrated the Bhagwadji to Girirajji.

Sthapan of Shreeji Mukharvind is just 100-150 year ago (as per the sevaks).

Jai Shreeji!


ShreeNathji mandir on Girirajji just above His Mukharwind

The Divine only wants love..


🎼 “मन तडपत हरी दर्शन को आज” “Man tadpat Hari Darshan Ko Aaj”..

भजन हिंदी फ़िल्म का है; सुनिए समझिए; (This post is about a Hindi bhajan, listen to it and try to understand two facts)

दो बातें समझनी हैं;

१ – गुरु के बिना प्रभु तक पहुँचना बहुत ही कठिन है,

(Without the Sadguru, it is very difficult to reach and merge with God)

२ – प्रभु को पाने के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ भाव शुद्धि चाहिए..और गुरु की कृपा ..

(To merge with the divine shakti, the only requirement is purity of bhao..and the Sadgurus kripa. 

Humanity is important for closeness with the divine. Caste does not matter in bhakti)

श्री कृष्ण और श्रीनाथजी के बहुत मुसलमान भक्त थे जिनको ठाकुरजी के साक्षात्कार भी हुए.

ईश्वर नहीं देखते की हिन्दू है या मुसलमान; जो भाव से पुकारता है उसके हो जाते हैं.

(Shree RadhaKrishn, ShreeNathji had several Muslim bhakts; many of them had Their sakshatkar too; God did not see if the bhakt was a Hindu or a Muslim, He only and only, felt the purity of the soul calling out to Him in devotion)

Below is a beautiful Hindi devotional bhajan. It is shown how the entire team was Muslim, yet there was immense devotion present in all the group who made this bhajan.

It is an audio clip describing a beautiful bhajan…..Naushad Ali speaks about the making of this  devotional song 🎼where the entire team was Muslim singing a Hindu bhajan in complete devotion.”

Lyrics : Muhammad Shakil

Music : Naushad Ali

Singer : Muhammad Rafi