An original Varta about ShreeNathji Prabhu – ‘Toad ka ghana’ (forest)

टोड के घने-श्रीनाथजी वार्ता
An original varta about ShreeNathji Prabhu – Toad ka ghana (forest)

संवत १५५२ श्रावण सुद तेरस बुधवार के दिन श्रीनाथजी टोड के घने पधारे थे:

कुंभनदासजी श्रीनाथजी की सेवा में नित्य कीर्तन करके श्रीनाथजी को रिझाते थे।श्रीनाथजी उनको अपना सानुभव जताते थे। वे साथ साथ खेलते रहते थे और बाते भी किया करते थे.
वार्ता :
थोड़े ही दिनोंमें एक यवन(Mughal kings)का उपद्रव इस विस्तारमें शुरू हुआ। वह सभी गांवोंको लूटमार करके पश्चिमसे आया। उसका पड़ाव श्री गिरिराजजीसे लगभग सात किलोमीटर दूर पड़ा था।
सदु पांडे, माणिकचंद पांडे, रामदासजी और कुंभनदासजी चारों ने विचार किया की यह यवन बहुत दुष्ट है और भगवद धर्म का द्वेषी है। अब हमें क्या करना चाहिये ?
यह चारों वैष्णव श्रीनाथजीके अंतरंग थे।
उनके साथ श्रीनाथजी बाते किया करते थे। उन्होंने मंदिरमें जाकर श्रीनाथजी को पूछा कि महाराज अब हम क्या करें ? धर्म का द्वेषी यवन लूटता चला आ रहा है। अब आप जो आज्ञा करें हम वैसा करेंगें।

श्रीनाथजीने आज्ञा करी कि हमें टोंड के घने में पधारने की इच्छा है वहां हमें ले चलो। तब उन्होंने पूछा कि महाराज इस समय कौन सी सवारी पर चले? तब श्रीनाथजी ने आज्ञा करी, “सदु पांडे के घर जो पाडा है उसे ले आओ। मैं उसके ऊपर चढ़कर चलुंगा”।
सदु पाण्डे उस पाड़ा को लेकर आये. श्रीनाथजी उस पाड़ा पर चढ़कर पधारें। श्रीनाथजी को एक तरफ से रामदासजी थांभ कर चल रहे थे और दूसरी तरफ सदु पांडे थांभ कर चल रहे थे.
कुंभनदास और माणिकचंद वे दोऊ आगे चलकर मार्ग बताते रहते थे।

टोंड के घने में एक चौतरा है और छोटा सा तालाब भी है। एक वर्तुलाकार चौक के पास आके रामदासजी और कुंभनदासजी ने श्रीनाथजी को पूछा, “आप कहाँ बिराजेंगे”?
तब श्रीनाथजीने आज्ञा करी कि हम चौतरे पर बिराजेंगे। श्रीनाथजी को पाड़े पर बिठाते समय जो गादी बिछायी थी उसी गादी को इस चौतरे पर बिछा दी गई और श्रीनाथजी को उस पर पधराये.

चतुरा नागा नाम के एक विरक्त भगवद भक्त थे वे टोड के घने में तपस्या किया करता थे। वे गिरिराजजी पर कभी अपना पैर तक नहीं रखते थे।
मानों उस चतुरा नागा को ही दर्शन देनेके लिए ही श्रीनाथजी पाडा पर चढ़कर टोंड की इस झाड़ी में पधारें,
चतुरा नागा ने श्रीनाथजी के दर्शन करके बड़ा उत्सव मनाया। बन मे से किंकोडा चुटकर इसकी सब्जी और आटे का हलवा (सीरा) बनाकर श्रीनाथजी को भोग समर्पित किया।

दूसरी वार्ता:
इसके बारे में दूसरा उल्लेख यह भी है कि श्रीनाथजी ने रामदासजीको आज्ञा करी कि तुम भोग धरकर दूर खड़े रहो।
तब श्री रामदासजी और कुंभनदासजी सोचने लगे कि किसी व्रज भक्त तके मनोरथ पूर्ण करने हेतु यह लीला हो रही है।
रामदासजी ने थोड़ी सामग्री का भोग लगाया तब श्रीनाथजी ने कहा कि सभी सामग्री धर दो।
श्री रामदासजी दो सेर आटा का सीरा बनाकर लाये थे उन्होंने भोग धर दिया।
रामदासजी ने जताया कि अब हम इधर ठहरेंगें तो क्या करेंगें ? तो श्रीनाथजी ने कहा कि तुमको यहाँ रहना नहीं है।
कुम्भनदास, सदु पांडे, माणिक पांडे और रामदासजी ये चारों जन झाड़ी की ओट के पास बैठे।
तब निकुंजके भीतर श्री स्वामिनीजीने अपने हाथोंसे मनोरथ की सामग्री बनाकर श्रीनाथजी के पास पधारे और भोग धरे।
श्रीनाथजी ने अपने मुख से कुंभनदासको आज्ञा करी,“कुंभनदास इस समय ऐसा कोई कीर्तन गा तो मेरा मन प्रसन्न होने पावे। मै सामग्री आरोंगु और तु कीर्तन गा”।
श्री कुम्भनदासने अपने मनमें सोचा कि प्रभुको कोई हास्य प्रसंग सुननेकी इच्छा है ऐसा लगता है।
कुंभनदास आदि चारों वैष्णव भूखे भी थे और कांटें भी बहुत लगे थे इस लिये कुंभनदासने यह पद गाया :
राग : सारंग
“भावत है तोहि टॉडको घनो ।
कांटा लगे गोखरू टूटे फाट्यो है सब तन्यो ।।१।।
सिंह कहां लोकड़ा को डर यह कहा बानक बन्यो ।
‘कुम्भनदास’ तुम गोवर्धनधर वह कौन रांड ढेडनीको जन्यो ।।२।।

यह पद सुनकर श्रीनाथजी एवं श्री स्वामिनीजी अति प्रसन्न हुए। सभी वैष्णव भी प्रसन्न हुए।

बादमें मालाके समय कुंभनदासजीने यह पद गाया :
बोलत श्याम मनोहर बैठे…
राग : मालकौंश
बोलत श्याम मनोहर बैठे, कमलखंड और कदम्बकी छैयां
कुसुमनि द्रुम अलि पीक गूंजत, कोकिला कल गावत तहियाँ ।। 1 ।।

सूनत दूतिका के बचन माधुरी, भयो हुलास तन मन महियाँ ।
कुंभनदास ब्रज जुवति मिलन चलि, रसिक कुंवर गिरिधर पहियाँ ।। 2 ।।

यह पद सुनकर श्रीनाथजी स्वयं अति प्रसन्न हुए। बादमें श्री स्वामिनीजी ने श्रीनाथजी को पूछा, “आप यहाँ किस प्रकार से पधारें”? श्रीनाथजी ने कहा, “हम सदु पांडेके घर जो पाड़ा था उस पर चढ़कर हम पधारे हैं”।
श्रीनाथजी के इस वचन सुनकर स्वामिनीजीने उस पाड़ा की ओर दृष्टि करके कृपा करके बोलीं, “कि यह तो हमारे बाग़ की मालन है। वह हमारी अवज्ञा से पाड़ा बनी है पर आज आपकी सेवा करके उसके अपराध की निवृत्ति हो गई”।

इसी तरह नाना प्रकारे केली करके टोड के घने से श्री स्वामिनी जी बरसाना पधारें।
बादमें श्रीनाथजी ने सभी को जो झाड़ी की ओट के पास बैठे थे उनको बुलाया और सदु पांडे को आज्ञा करी कि अब जा कर देखो कि उपद्रव कम हुआ ?
सदु पांडे टोड के घनेसे बाहर आये इतने मे ही समाचार आये कि यवन की फ़ौज तो वापिस चली गई है। यह समाचार सदु पांडे ने श्रीनाथजी को सुनाया और बिनती की कि यवन की फ़ौज तो भाग गई है तब श्रीनाथजी ने कहा कि अब हमें गिरिराज पर मंदिरमें पधरायें।

इसी प्रकारे आज्ञा होते ही श्रीनाथजी को पाड़े पर बैठा के श्री गिरिराज पर्वत पर मंदिर में पधराये।
यह पाड़ा गिरिराज पर्वत से उतर कर देह छोड़कर पुन: लीलाको प्राप्त हुआ।
सभी ब्रजवासी मंदिरमें श्रीनाथजीके दर्शन करके बहुत प्रसन्न हुए और बोले की धन्य है देवदमन ! जिनके प्रतापसे यह उपद्रव मिट गया।

इस तरह संवत १५५२ श्रावण सुदी तेरस को बुधवार के दिन चतुरा नागाका मनोरथ सिद्ध करके पुन: श्रीनाथजी गिरिराजजी पर पधारें।

यह पाड़ा अनंत लीला में कौन था:
यह पाड़ा दैवी जीव था। लीला में वो श्री वृषभानजी के बगीचा की मालन थी। लीला में उसका नाम वृंदा है।
नित्य फूलोंकी माला बनाकर श्री वृषभानजी के घर लाती थी।
एक दिन श्री स्वामिनीजी बगीचा में पधारें तब वृंदा के पास एक बेटी थी उसको वे खिलाती रही थी। उसने न तो उठकर स्वामिनी जी को दंडवत किये कि न तो कोई समाधान किया।
फिर भी स्वामिनीजी ने उसको कुछ नहीं कहा। उसके बाद श्री स्वामिनीजी ने आज्ञा की के तुम श्री नंदरायजी के घर जाकर श्री ठाकोरजीको संकेत करके हमारे यहां पधारने के लिए कहो; तो वृंदा ने कहा की अभी मुझे मालाजी सिद्ध करके श्री वृषभानजी को भेजनी है तो मैं नहीं जाऊँगी.
ऐसा सुनकर श्री स्वामिनीजीने कहा, “मैं जब आई तब उठकर सन्मान भी न किया और एक काम करने को कहा वो भी नहीं किया। इस प्रकार तुम यह बगीचा के लायक नहीं हो। तू यहाँ से भुतल पर पड़ और पाडा बन जा”।

इसी प्रकार का श्राप उसको दिया तब वह मालन श्री स्वामिनीजी के चरणारविन्दमें जा कर गिर पडी और बहुत स्तुति करने लगी और कहा कि आप मेरे पर कृपा करों जिससे मैं यहां फिर आ सकुं।
तब स्वामिनीजी ने कृपा करके कहा की जब तेरे पर चढ़कर श्री ठाकुरजी बन में पधारेंगें तभी तेरा अंगीकार होगा।
इसी प्रकार वह मालन सदु पांडे के घर में पाड़ा हुई और जब श्रीनाथजी उस पर बेठ कर वन में पधारे तब वो पुन: लीलाको प्राप्त हुई.

जय श्रीनाथजी ठाकुरजी 🙏
जय श्री राधे कृष्ण 🙏

Points for this varta taken from this site:

https://www.facebook.com/mohanjigokul/

यह टोंड के घनेमें श्रीनाथजी की बैठक है जहाँ सुंदर मंदिर व बैठकजी बनाई गई है।

 

 

 

 

Jai ShreeNathji

Jai Shree RadhaKrishn

#ShreeNathjiBahkti #Govardhan

 

 

 

 

 

 

Save Vrindavan

SAVE VRINDAVAN FROM THE GREED OF HUMANS:

Special strong laws is need of the hour. Already this sacred city has reached the point of no return. Few years more down the line and we will have a concrete jungle and heaps of waste littering all the divine vans. Yamunaji has already shrunk to the point of not being there.

#CMYogiAditynath #vrindavan

#CMYogiAditynath Stop trying to see #Vrindavan riding on your special #helicopters 🚁 and getting special darshans

#नरेंद्रमोदी #वृंदावन #मथुरा #Pmoindia

आज ७ जुलाई २०१९, वृंदावन में सूचना मिली की #CMYogiAditynath वृंदावन में पधार रहे हैं।

मीटिंग है और बाँके बिहारी जी के दर्शन के लिए जाएँगे।

सम्पूर्ण city को बंद कर दिया! रिक्शॉ तक को अंदर घूमने की अनुमति नहीं है। कई घंटों तक सब रोड बंद रहेंगे।

#CMYogiAditynath अगर आप VIP roads से आएँगे जाएँगे, शहर आपके लिए ख़ाली कर दिया जाएगा, आपको कैसे अन्दाज़ होगा की समस्या क्या हैं?

सुधार कैसे करेंगे?

फ़ालतू के projects पर budget ख़र्च करके आप समझते हैं आपकी duty पूरी हो गई?

शहर और तीर्थ की जो असल समस्या है, वहीं की वहीं रह जाती हैं।

क्या आपने कभी सोचा है की आप आपके VIP troup के साथ निकल जाते हैं, किंतु आप अभी नहीं जान पाते हैं, सत्य क्या है?

आज किन हालात में है यह पवित्र भूमि, जो श्री राधा कृष्ण का निवास है, जहाँ हर क़दम पर कोई लीला भूमि है?

वृंदावन आज इतने बुरे आक्रमण से जूझ रहा है, आप को कैसे पता चलेगा, आप कभी समझ ही नहीं सकते!

आक्रमण लालच में अंधे इंसान का है, जो इस पवित्र भूमि को लूटने पर तुले हैं।

#CMYogi

Please come down to the level of the common bhakt and try to see what is ailing my #Vrindavan.

Stop trying to see Vrindavan riding on your special #helicopters 🚁

Walk on the streets to know how you can truly help this dying #teerth

श्रीनाथजी #ठाकुरजी प्रभु आपको सद् बुद्धि देने की कृपा करें 🙏

Website in ShreeNathji, Shree RadhaKrishn seva

Website in ShreeNathji, Shree RadhaKrishn seva

SHREENATHJI..ONLY SHREENATHJI

श्रीनाथजी ठाकुरजी की वेब्सायट :
SHREENATHJI THAKURJEE website in His seva

http://www.shreenathjibhakti.org

The website made only in ShreeNathji seva initially in 2008, is now updated and available to all bhakts.

श्री ठाकुरजी श्रीनाथजी की सेवा में बनी यह website २००८ में बनी, अब अप्डेट होकर भक्तों के लिए उपलब्ध है।

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This website is extraordinary, the content available here will not be found anywhere else, few topics:
यह वेब्सायट अपूर्व है, यहाँ आप जो जानकारी पाएँगे और कहीं नहीं मिलेगी; कुछ प्रसंग:

ShreeNathji swarup is the combined merged swarup of Shree RadhaKrishn
श्रीनाथजी स्वरूप में श्री राधा कृष्ण समाए हुए हैं

Is ShreeNathji awake in our world and continues His divine Play with bhakts?
Leela as described in the ancient granths 84 Vaishnavs and 252 Vaishnavs ke varta; are they a part of few bhakts LIVE INTERACTIONS with Shree Thakurjee today?
क्या श्रीनाथजी एक बार फिर हमारे बीच खेल कर रहे हैं?
क्या ८४ वैष्णव, २५२ वैष्णव वार्ता जैसी कृपा आज एक बार फिर ठाकुरजी अपने भक्तों पर बरसा रहे हैं?

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Is ShreeNathji Thakurjee soon returning to Vraj? Where is it written that ShreeNathji will be back at Girirajji?
ठाकुरजी क्या नाथद्वारा हवेली से गिरिराज गोवर्धन वापिस पधार रहे हैं?
कहाँ लिखा है की श्रीनाथजी वापस व्रज लौटेंगे?

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How did ShreeNathji bless us with His Sakshatkar darshans through His Mukharwind at Shri Govardhan; Read in ShreeNathji’s own words why did He granted darshans?
श्रीनाथजी के साक्षात्कार उनके मुखारविंद से कैसे हुए? क्यों हुए, उन्हीं के मधुर अन्दाज़ में समझें।

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Giriraj Govardhan complete history with ShreeNathji Pragaty varta in english and hindi
गिरिराज गोवर्धन पृथ्वी पर कैसे विराजमान हुए?

What is the bhao of 8 Sama darshans at Nathdwara. What is the plan of ShreeNathji Haveli?
नाथद्वारा में आठ समा के दर्शन के भाव क्या हैं? नाथद्वारा हवेली का नक़्शा कैसा है?

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ShreeNathji Gaushala details at Nathdwara with several photos and videos
श्रीनाथजी गौशला का विवरण, फ़ोटो और विडीओ के साथ

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What was the route of ShreeNathji yatra to Nathdwara from Girirajji?

श्रीनाथजी की यात्रा व्रज से नाथद्वारा कहाँ, कहाँ से गुज़री?

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Why did Thakurjee have to leave Shri Govardhan and stay at Nathdwara for hundreds of years?
क्यों प्रभु को गिरिराज्जि छोड़ कर नाथद्वारा इतने वर्ष रहना पड़ा?

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What is the correct form of bhakti?
सही भक्ति कैसे करनी चाहिए?
How did Shree Hari manifest Golok?
श्री हरी ने गोलोक का प्रगट्य कैसे करा?

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Shri Govardhan – Punchri end, South side

Many such questions are answered here; with an extensive extraordinary photo gallery, on this website
ऐसे बहुत से सवाल, जवाब; आश्चर्य चकित करने वाली फ़ोटो गैलरी, इस वेब्सायट पर

ShreeNathji Haveli at Nathdwara

Dhanyawad
Warm regards and shubh aashish, S Prem,
ShreeNathji ke seva mein
Abha Shahra Shyama
Jai Shreeji!
Shreeji Ki Jai Ho!

 

Vrinda Devi at Vrinda Kund, Gupt Kund at Vraj Mandal

Vrinda Devi, Vrinda Kund and Gupt at Vraj Mandal

Vrinda Devi is an expansion of ShreeRadha; and is Tulsi Devi in Golok. Purnamasi is Vrinda Devi’s guru. Shree Vrinda Devi stays at Vrinda Kund and from here she arranges all meetings of Shree RadhaKrishn.

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Vrinda Kund at Vraj Mandal

Next to Vrinda Kund is the Gupt Kund,  where Shree Radha secretly meets Shree Krishn.

नंदगांव से पश्चिम दिशा में ठीक ऐक मील दूरी पर श्री वृन्दा जी बिराजती हैं । श्री वृन्दा कुंड अति पावन और अति सुरम्य स्थल है ।यहां दो कुंड है। श्री गुप्त कुंड और श्री वृन्दा कुंड । श्री गुप्त कुंड योगपीठ स्थली है। योग (मिलन) पीठ (स्थान) यानि राधा कृष्ण मिलन स्थान ।

Gupt Kund at Vrinda Kund

Gupt Kund at Vrinda Kund-Shree RadhaKrishn Yog Peeth

वृज में श्रीराधा कृष्ण की अष्ट कालीन लीलाऐं आज भी होती हैं । कहा जाता है इन अष्ट कालीन लीलाओं का समय निधाॅरित है।सर्व प्रथम गुप्त कुंड पर प्रातः कालीन लीला अप्रत्यक्ष रूप से यहां होती है।इसी कारण इस योग पीठ स्थली का नाम गुप्त कुंड है। अति शुद्ध और दिव्य भक्तों को लीला समझ आती हैं ।

Shree Vrinda Devi darshans at Vrinda Kund

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Shree Vrinda Devi
Vrinda Devi mandir at Vrinda\Gupt Kund 
Few glimpses of our visit and satsang here.Thakurjee ShreeNathji is Present with us today and has enjoyed the serenity and silence of this place. Its a very special day and blessings and kripa are there for all those present today

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Beautiful Vrinda Kund at Vrinda Devi mandir

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Vrinda Kund at Vrinda Devi mandir,Vraj Mandal

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Vrinda Devi mandir-The koyal who waits to steal the prasad from the mandir as soon as it is offered

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Vrinda Kund at Vrinda Devi mandir,Vraj Mandal

There is an ancient Shree RadhaKrishn murti here, carved out of stone, that is said to have been established by Raja Vajranabh, the great grandson of Shree Krishn. This murti has been desecrated by the Muslims, so worship is no longer done to this murti. Every Monday the local villagers come and pour milk over this murti of Shree RadhaKrishn are kept in a small kuti for darshans, adjacent to the mandir under a chokar tree

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The disfigured ancient murtis at Vrinda Kund

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Vrinda Devi mandir-The small Kuti under the Chokar tree where the ancient murtis are kept

The disfigured deities murti under the chokar tree had been worshiped as Shree Vrinda Devi for a very long time before Baba Madhava’s arrival. According to the villagers, some thieves had come fifty years before, stolen the sculpture and stored it near Charan Pahari, along with some other stolen sculptures. But when they brought a small truck to carry them away one night, even six or seven of them together could not lift the sculpture of Vrinda Devi. So they left it there. In the morning one villager saw the murti lying by the side of the hill and carried it back to Vrinda Kund(Story as told to us by the family who owns the place)

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The fog was very deep as we entered Vrinda Kund

The family who owns this divine Vrinda Kund and Vrinda Devi mandir, are very hospitable and cook excellent sattwik meals if told in advance. The father has seven sons and all the family is involved in seva of the Vrinda Devi mandir and Kund. We had breakfast and lunch at the mandir freshly cooked and served outdoors._DSC4080-2

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Vrinda kund-Divine anubhuties @ Vrinda Kund

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@ Vrinda Kund has been in the memory of all the participants lucky enough to be there that day

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Prasad at Vrinda Kund

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A Tulsi kyara at Vrinda Kund

Madhav Baba managed to get a Government grant to help him excavate the two sacred kunds; Vrinda Kund and Gupt Kund. Madhav Baba built a small temple and installed a Deity of Vrinda-devi on Jahnava Mata’s Appearance Day in the early 1980s

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Madhav Baba

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Vrinda Kund-Amid the dense fog is a surreal experience

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Vrinda Kund-Presence of ShreeNathji Thakurjee is very strong with us-Satsang in the misty weather

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Divine Vrinda Devi mandir at Vrinda Kund

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Paradise in the mist @ Vrinda Devi mandir

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Vrinda\Gupt Kund-A Koel which is native to all of Vraj. I see it every time I am here

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Vrinda Kund-Owl like birds has a full family living on the ancient Chokar tree

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View of Nandgaon mandir from Vrinda Kund

Darshans at Nandgaon mandir

 
Two video explaining details of the mahima of Shri Vrinda Devi, as told by the mahant of the mandir
Glimpses of darshans on various days. Photos sent to me by the mahant who does seva regularly

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Jai ShreeNathji Thakurjee

Jai Shree RadhaKrishn

Importance of the Sadguru in bhakti

“When the divine Appears, His blessings reach my core.  Gratitude and Ecstasy pour as tears and words from the heart and soul”..

“.. It’s only through satsang, awareness, faith, shraddha, surrender and purity of heart, that the seed of bliss might be planted in the innermost core and God’s form may become firmly established in the heart and soul.

Planting of this seed is only possible by the Sadguru, The divine Guru; as he is one who is already in the Sat-Chit-Anand state, and living life from the dot, which is the Truth..”

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Whatever type of needs we have,

That type of guidance or guru appears in our life.

The vibrations that we send out in Tamas, Rajas, or Sattvik is what brings us back the results.

The right guru is able to find you, and you are able to surrender at his feet with total devotion.

“Giving one’s key in the hands of the right guru and through him to God,  is the only right way to move forward in Bhakti and reach to the summit”.

The moment fear or ego comes in the picture; much is taken away; basically when our lack of trust or understanding prevents us from surrendering to God, we lose ourselves in the confusions of various rituals and dogmas.

                           Trust is the most important and being egoless helps.

 With the limited senses a normal human has no insight to even recognize an enlightened person unless he wishes to expose himself. How can we ever go looking for a Guru?

As the universal laws go, all we as average humans can do is pray to God for guidance and blessings; when our thirst , our yearning is right the universe will have to pick up our request.

This request is broadcasted as our Soul requirement and the right vibration picks us up.

From there on what we require is total faith and surrender, so that the soul can be touched and awakened and moved on in the right direction.

Jai Ho!

Jai ShreeNathji

ShreeNathji “Live Varta” at His Paat utsav

 ShreeNathji “Live Varta” at Paat utsav:

ShreeNathji Paat Utsav at Vrindavan, Vraj Mandal “Shreeji Nij Niwas”, Vrindavan 

16th February, 2016; Magh Sud Naum, SV 2072

.. As Shreeji told me later,

“मैं तेरे माथे पर आकर बैठ गया था, सुधीर ने छूट दी थी, की श्रीजी जो दर्शन देने हैं आपको, आज सभी को दे दो. मैं पूरे रूम में भाग रहा था, एक बार तेरी फ़्रेंड से टकरा भी गया था, उसको बोला जाग, जाग.

स्वस्तिक को सुधीर ने मेरे कपड़े से ढाक कर रखा था, जब कपड़ा उठाता था, तो मैं तेरे माथे पर से स्वस्तिक में कूद जाता था. और फुलों के बीच भागता था, किसी किसी का मेरा दर्शन एक छोटी लौ के रूप में हुआ होगा. फिर वापस तेरे माथे पर आकर आराम करता था. इसलिए मैं तुझे नहीं दिखता था, मैं तो तेरे ही माथे पर बैठा था, तुझे कैसे दिखूँगा हा हा हा”..

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“Shreeji Nij Niwas”, THE most sacred place.

Jai Shree Krishn to all readers. This seems like a long post, but do spend some time reading it, as it is a unique writing on the personal experiences of bhakts about ShreeNathji divine play with them. ShreeNathji does His leela similar to the 84 Vaishnavas, 252 Vaishnav ki varta, even today in our world. Thoughts as comments are very welcome.

Do share and spread the darshans. Thank you.

This post is in continuation from the post of 19 February 2016.

These are the personal experiences of people, written and expressed in their own words. 

As you read ahead, you will notice few things;

What they experienced when listening to the music with eyes shut ,

What each one saw in the Swastik darshans,

The different darshans each one had on my forehead.

This room transformed to the most sacred place where ShreeNathji was fully Present and made us all a part of His divine Play. All the while Gurushree was in full control of the happenings.

Gurushree, Abha, Ritesh; A selfie after we had completed our pujans

Gurushree, Abha, Ritesh; A selfie after we had completed our pujans

As Shreeji told me later, 

“मैं तेरे माथे पर आकर बैठ गया था, सुधीर ने छूट दी थी, की श्रीजी जो दर्शन देने हैं आपको, आज सभी को दे दो. मैं पूरे रूम में भाग रहा था, एक बार तेरी फ़्रेंड से टकरा भी गया था, उसको बोला जाग, जाग.

स्वस्तिक को सुधीर ने मेरे कपड़े से ढाक कर रखा था, जब कपड़ा उठाता था, तो मैं तेरे माथे पर से स्वस्तिक में कूद जाता था. और फुलों के बीच भागता था, किसी किसी का मेरा दर्शन एक छोटी लौ के रूप में हुआ होगा. फिर वापस तेरे माथे पर आकर आराम करता था. इसलिए मैं तुझे नहीं दिखता था, मैं तो तेरे ही माथे पर बैठा था, तुझे कैसे दिखूँगा हा हा हा”.

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“Shreeji Paat”; Shri Yamunaji in the background, The flower Swastik darshans are also visible, Pujan complete.

So here are the experiences all had, written in their own words:

My own experience: 

In the fifteen minutes as per Gurushree’s instructions, when each one was viewing my forehead, I had this incredible experience.

As the sacred formations started on my forehead, I felt my spine come alive. Extraordinary energy flow happened from the base to my forehead.

I felt shivers along the entire spine.

Uncontrollable tears flowed on my face for the entire time period.

Incredible feeling of humility entered me, as I felt myself become one with Shree Thakurjee.

I felt enveloped in a fantastic feeling of devotion and bhao.

Suganchandji Kochar:

१६.०२.२०१६ को श्रीजी के निज निवास में नियम पूर्वक सजावट में प्रवेश करते ही मन प्रसन्न हुवा. दीवाल पे विविध लीला के दर्शन हुए.

स्वयं श्रीनाथजी स्वस्तिक के फूल में बाल स्वरूप प्रगट होकर दर्शन पाकर हम धन्य हो गए.

स्वस्तिक के दर्शन में फूल हिल रहे है ऐसा महसूस हुवा.

ऐसी श्रीनाथजी की कृपा हमेशा बनी रहे.

तथा आभा जी के मुख पर स्वयं श्री कृष्ण भगवान के बाल स्वरूप में दर्शन की अनुभूति हुई.

हम अपने आज की अनुभूति से धन्य हुए.

Millie Kirpalani:

I was so excited to visit Shreeji Nij Nivas and experience HIS energies. I remember waiting outside in the corridor for my turn – my heart was beating so fast my body was trembling I could not contain my excitement and nervousness at the same time. Could not believe I was one of the few chosen ones to witness this and to be actually present in HIS rest house .Thank you Shreeji for the permission and invitation .

As I sat inside and admired the amazing Leelas painted on the walls I felt so peaceful like I was a part of it like I have been there.

When Guruji asked us to close our eyes and wait for our turn to come 1 by 1 to look at what was under the white cloth in HIS shrine I felt so heavy and lot of pressure on my bindi then I called to Shreeji and asked HIM to please visit me be with me play with me.

After my 30 second Darshans of the flower arrangement of Swastik in yellow flowers and rest in orange red which was under the white cloth I saw within my bindi a Swastik and Shree signs merging it was quite an amazing vision ..

Then I got into a play of hide n seek with Shreeji I was calling out to him and was visualising him playing amongst us and hiding behind all those sitting there.

Once Guruji started the music of birds chirping my bindi area started to tingle and I don’t know whether it was my imagination or a voice frm down the hotel but I clearly heard a childlike voice saying Tum Kaha Ho !! I started to tear up and searched for that voice again while the music was going on but that was it for that split second –

then Guruji asked us to open our eyes and look at Abha. I was still in the thought of that voice I could not see initially on Abhas forehead ..

Thought I saw Lord Krishna with a flowing garment but then I clearly saw the face of Shreeji on top of her bindi ….what a miracle…. When Guruji asked us to come close and have a look I could not see infact I saw an Om but when I went back to my sitting place I saw the face clearly again !

The entire experience of being there witnessing the image of Shreejis face on Abhas forehead and having my own personal play with Shreeji was out of this world/ body – I didn’t want to leave wanted to continue my games with Shreeji.

As I came back to my room my eyes and head were so heavy I just wanted to sleep.

Thru the day felt so happy and energetic.My kids commented on how fresh I looked and we’re smiling as I was still chanting Radhey Radhey Shyam Radhey at 11.30 pm .I also felt a lot of heat in my hands till night all at home commented on that .

So grateful to my Shreeji Guruji and Abha mini Guru for this amazing spiritual enlivening visit to Vrindavan – what feels like home.

Shreeji Ki Jai Ho

Manju Jhanjaria:

Jai Shree Krishn, abha let me thank you  that I am a part of your  spiritual journey, which  from the depth I enjoy every moment.

It was so beautiful that I was there even though it was a short visit, but as Gurushreeji said the Shreeji ke Icha ke bina kuch bhi nahi ho sakta; so I was there for a day.

The morning at theShreeji neej niwas was such a lovey experience the energy was so much that we could feel it by our thoughts. It was full of positive energy which we could see and feel it.

As I closed my eyes I could only see bal Gopal and His Mukut which was very prominent.

And I saw the same on your forehead.

On the flower swastika as soon as I saw, I saw ladoo Gopal with a Mukut which was so obvious and when I came and sat with eyes closed I could just see ladoo Gopal.

Even on your forehead I could clearly see the Mukut and tilak and Gopala. It was very clear. I couldn’t believe it how can it happen but again Shreeji can do anything.

And when my eyes were closed and as I was engrossed I felt that someone woke me up wth just a soft push. And I got up and then couldn’t concentrate as then mind was conscious.

But I believe that because of your true sacrifice and devotion this is happening.

Abha, it is all because of ur strength.

But really the strength I gained in one day I just cannot believe for myself. I am blessed to have you in my life.

My path of life will never be wrong or do anything wrong to anyone as Shreeji, Gurushreeji, and you will always be there to guide.

Radhe radhe. Jai Shree Krishn Abha .

Arunaji Kochar:

श्रीजी के निज निवास में प्रवेश करते ही एक अजीब सी प्रस्सन्नता, शांति, पवित्रता महसूस हुई.

जब गुरूजी ने वस्त्र हटाया तो स्वस्तिक के दर्शन हुवे.

बाद मे जंगल में बालगोपाल के साथ बैठे है ऐसा प्रतीत हुआ. पंच्छीयोकि मधुर आवाज, पानी का झरना बह रहा है, मानो वहाँ ४ घंटे भी बैठने मिलता तो भी समय का पता नहीं चलता. ऐसी अलोकिक शांति थी.

और आभा जी के माथे पर लालन के दर्शन हुए.

साक्षात् श्रीजी वहाँ थे और हमें दर्शन दिए ये अनुभूति वहाँ हुई.

ये अवसर बार बार आये, आप सभी की उपस्थित्ति में हम धन्य हो गए.

श्रीजी की जय हो

Ritu Kochar:

इस बार का अनुभव बहुत अद्भुत था।  रूम में जाकर मन बहुत शांत था,वहा आँखे बंद करके ,धुन सुनते हुए ऐसा लग रहा था की किसी वन में बैठी हूँ,पक्षियों की मधुर आवाज़,पेरो के नीचे एकदम ठंडा लग रहा था ऐसा महसूस हो रहा था जैसे नदी किनारे हूँ।

आभाजी के मस्तक पर बालस्वरुप मुकुटधारी श्रीजी का मुख (जैसा गोवर्धनपर दर्शन हुए थे) और उसके ऊपर स्वास्तिक के दर्शन हुए।

बहोत अलोकिक, अद्भुत और सुन्दर दर्शन थे ।आज भी वह दर्शन आँखों के सामने है।

श्रीजी,गुरुश्री और आभाजी आपको नतमस्तक प्रणाम ।।दर्शन स्वरुपआपका आशिर्वाद प्राप्त हुआ।।।

Sarvesh Shahra:

When we entered Shreeji nij niwas, the place felt serene and sacred. I had not entered the room in some years and felt very blessed and privileged to be invited by Shreeji again to His Niwas sthaan..

The energy levels and the divine presence were alive in the room on that day.

The Darshan was a very nice experience and although it was for a very short time, it was divine.

I saw some light form running on the flower swastik. Later mummy explained it was Shreeji Urja running in this Form.

I saw the Shree श्री darshan on mummy’s forehead, which I have seen many times earlier also.

Post the Darshan, I left the room and was advised by Sudhir Bhai to return to my room and spend time alone and in peace.

Once I reached the room, I sat down on the sofa and felt absolute peace and calm. I went into a meditative state for almost 30 minutes; it felt like a deep sleep. I was in total peace. It was almost like I had travelled to another world.
Sheela Mepani:

Hi Abha

As we set down in Shreeji’s room I felt I was at home, there was kind of warmth. On the flower swastika I saw some movement; at that point I thought I saw Bal Krishna moving.

But could be my imagination.

When we set with eyes closed I felt some movement on my head. My head got tilted upward and I started shaking. As I became aware It stopped.

On your forehead I could see some figure which I felt it was the BalGopal I saw earlier. I started crying. I could not control my tears. This was when there was no light.

You know I do not like to talk after any experience. So I went and sat in my room. Felt relaxed and sleepy. As I write now I have goosebumps.

Tushar Kochar:

सुबह जब श्रीजी के निज निवास में दर्शन के लिए बैठे हुए थे, तब अलोकिक शांति का अनुभव हुआ.

जब गुरुजी ने दर्शन के लिए बुलाया तब फूलो में सजे हुवे स्वस्तिक के दर्शन हुए.

जब गुरुजी ने म्यूज़िक शुरू करा, तो पंच्छीयोकि मधुर आवाज आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे जंगल में शांत बैठे हुए है और मधुर आवाज़ आ रही है, ऐसी अनुभूति हुई.

जब गुरुजी ने आभाजी के मस्तिक पर देखने के लिए संकेत करा, तब मस्तिष्क के बायें तरफ़ पर आकृति नजर आई परंतु दुरी के वजह से आकृति पहचान नहीं पाए.

पाट उत्सव के अद्भुत दर्शन हुए.

Aradhna Sharma:

दण्डवत प्रणाम  गुरुश्री व आभा जी

श्री जी की अपार कृपा से हम दोनो को   दो दिन का व्रज वास मिला जोआनन्द की अनुभूति हम साथ लेकर  जा रही हूँ उसका शायद वर्णन तो सूर्यको दीपक दिखाने जैसी बात होगी

बहुत बहुत आनंद व दिव्य ऊर्जाओं का मिलन एक बहुत आलोकिक घटना थी. मैं उस आनंद से बाहर नहीं आना चाहती हूँ

Thank you Shree ji n Gurushree  gurumaa abha ji ritesh bhaiya ji for all the experiences

I am feeling lucky n blessed to be there with you all.

कोटि कोटि दण्डवत प्रणाम महागुरुश्री मेरे श्री जी

गुरुश्री   व गुरु माँ आप के श्री चरणो में दण्डवत प्रणाम

सादर स्प्रेम प्रणाम आभा जी

आप  सभी को मेरा बारम्बार नमन

श्री जी के चरणो में पटोत्सव की बहुत बहुत बधाई ।मेरे अनंत जन्मो के शुभकर्मों का फल उन पलों का साक्षी बनना ।मैं उन पलों में से बाहर नहीं आना चाहती। उन  पलों को मैं बार बार याद करते हुए अभी  वहीं पे ही हूँ ।दिव्यआत्माओं का अपने प्रभु से मिलन एक अद्भुत व आलोकिक अनुभूति । मुझे मेरे जीवन  में जिस पूर्णता की  तलाश थी उस रास्ते की तरफ़ मेरा पहला क़दम यही है

कहाँ से शुरू करूँ

मैं इन पलों का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी  व श्री जी से प्रार्थना कर रहीथी की मेरी आप से मिलने की सब विघन वाधायाएं दूर करे व मैं जल्दी हीआप के दर्शन कर पाऊँ ।श्री जी ने वैसा ही किया ।जब आप सब से मिली तो मुझे ये लगा की मैं अपने ही परिवार में आ गयी हूँ हर सदस्य ने इतनीआत्मीयता से हमारा स्वागत किया जिस के लिए मेरे पास शब्द कम है ।आपसे व गुरु श्री से मिलने को जो मेरे मन में जो चल रहा था की पहली बार आपसे मिलना है आप को कैसा लगेगा पता नहि मैं इस क़ाबिल भी हूँ कि आपदिव्य आत्माओं के सन्मुख जा भी सकती हूँ आप से मिलने की ख़ुशी व अंदरसे डर्र भी लग रहा था की आप क्या बोलेंगे

फिर वो पल आया जिस का मुझे इन्तेज़ार था आप से व गुरुश्री से मिलना मेरे मन में वो हलचल थी जो एक विधायर्थी की परीक्षा से पहले होती है मेरे साथमेरे पति मनोज जी मुझे बार बार समझा रहे थे। फिर आप गुरु माँ व गुरुश्रीसे बात कर वो डर जाने कब ग़ायब हो गया.

अगले दिन सुबह की पूजा में शामिल होना एक बहुत दिव्य अनुभूति है आप ने जब हम सब को तिलक किया व हमें ठाकुर जीआज्ञा तक इन्तेज़ार करने को बोला तब हम सब निज महल के द्वार खुलने की प्रर्तिक्षा में बैठे थे वो पल मेरे लिए बहुत लम्बे व अब अगर सोचूँ तो बहुत सुखद थे मैं ठाकुर जी को मन में प्रार्थना कर रही थी की जल्दी दर्शन दो प्रभु

मैं हरेक तरह से शुध रूप में अपने प्रभु से मिलना चाहती थी मेरे मन ये भावआया ओर मैं बहुत छोटी  बच्चीं के रूप में उन कीं बाल सखी के रूप में उनके निज महल में गयी

जिस पूर्णता का मुझे अनुभव हुआ  मैं निशब्द हो गयी हूँ

कोटि कोटि वंदन प्रणाम ।मैं क़िन शब्दों में आप सब का शुक्रिया करूँ बहुतबहुत धन्यवाद

सभी से मिलकर बहुत अच्छा लगा रितेश भैया जी ऋतु जी मिली जी आप की भाभी जी व  वो सब जो वहाँ मोजूद थ

आभा जी आप से एक बिनती है कि आप मुझे बताए कि आप गुरुश्री  से मेरा पहली बार मिलना हुआ कि मैंने अपना दिल खोल के आप दोनो से बातें की आप को कैसा लगा

जय श्री कृष्ण आभा जी

आभा जी ये मेरी ठाकुर जी से हमेशा प्रार्थना होती थी कि जो आप का दिव्य वृंदावन है मुझे उस  में प्रवेश दीजिये। निज महल में प्रवेश exactly वो हीथा I Every picture became alive in that room as he was present in that room. When guruji asked me to come n have darshan it was wonderful n amazing exprience of total satisfaction. N guru ji ne mere bhav ko samajh liya n he said ki aap ko poornta ka ehsaas ho raha hai  .Then i noded my head with a big yes .As I was not able to speak . I was feeling purity n divinty all time.

When guru ji told ki abha ji mein darshan karo, I saw Glittering golden n silver light coming out of your forehead and Shree ji swaroop was on that.

Aap ko mera barm baar pranaam. As guru ji was telling all this i felt Shree ji was present in him  When ever i rewind my memory,  it was Shree ji  who was giving instructions in gurujis swaroop. koti koti pranaam to gurushree.

My bhav as i have written was purest of pure. I became very small girl.

ये मेरी वो स्थिति थी कि  जब एक पवित्र व पाक आत्मा पहलीबार होश संभाल रही थी। मुझे ये लगा की  मेरा दिव्य वृंदावन में प्रवेश था।

And when Gurushree told ki we have to leave this room, i was feeling की वक़्त रुक जाये ठाकुर जी मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे यहीं से वापिस ले चलो अपने निज धाम। मुझे उस दुनिया में वापिस नहीं जाना।

It was my total samrpan at that point. Mujhe nahi pta ye sab jo mere sath hua ye  aap ko kaisa lage ga but it is what i felt  मेरा मन तो वहीं रह गया है।   मैं वास्तविक में सदा वहीं रहना चाहती हूँ उनके साथ उनकेश्री चरणोमें

मुझ से कोई ग़लती हुई हो तो छोटी बच्ची समझ कर माफ़ कीजिए

ठाकुर जी के श्री चरणो में बार बार माफ़ी माँगती हूँ  अगर जाने अनजाने में मुझ से कुछ भूल हुई है उसे क्षमा कार मुझे अपने चरणो में लगाए रखे
Manoj Sharma:

Jai shree krishn abha ji.

We are there in nij mahal.

I felt very positive energies there.

My mind was totally calm and no thoughts were coming in the mind .

When guru ji told we will feel Shreejis presence, I saw a web in front of me and it was full of bright peacock colour.

Secondly i got darshan of gau mata on Abha jis forehead  when she was sitting in the centre .

Shreeji in his lalan swaroop was also present there.

My total exprience was presence of positive energies

We always talk about our this wonderful  tour which is very close to our heart .

Abha ji i have no words to explain how blessed  n lucky I am feeling .

Thanks a lot abha ji

Nisha Khandelwal:

On 16th February 2016 at Shreeji Nij Niwas, I felt calmness and peace.

When Sudhir bhai instructed I saw the Sathiya made of flowers.I had darshans of three colour lights – Yellow, orange, Blue; which was moving very fast over the Sathiya in the form of a flame.

(Later Abhaji explained that it was Shreeji who gave us darshans in this Form)

On Abhaji’s forehead on the left side, I saw clear picture of ShreeNathji Mangla Darshan with silver outline of His Dhoti. I got goose bumps.

When I met Abhaji after an hour these marks, Darshans were not there.

Vrindavan yatra was a very different experience, amazing anubhuties!

Pragnaji Shah:

” श्रीजी निजनिवास ”

महासुद -९ ( १६-२-२०१६)
एक अलौकिक अनुभूति का अनुभव।
प्रथम आँखे बंध करनेके बाद … पीछे की दीवार पर स्वस्तिक चिन्ह है
उस जगह से ” गोकुल चाँद – गोकुल चाँद ” शब्दों की मधुर गूंज
कर्ण पटल पर सुनाई देने लगी.
बाद मे धीरे धीरे आँखों के सामने एक प्रज्वलित गोल घूमता हुआ महसूस किया।
मस्तिस्क और पूरे शरीर मे  कुछ प्रवाह  का स्पर्श महशुश किया.
आँखे खोलने के बाद एक अद्भुत शांति और आनंद प्राप्त हुआ।
” साक्षात + शांति + आनंद = अलौकिकता ”
श्री जी के जय हो …..
प्रज्ञा शाह का जय श्री कृष्ण

(These are all their personal writings and experiences. I have only corrected few grammatical errors).

Jai Shreeji, Jai Gurushree;

It has been an alokik anubhuti for all, and I express gratitude from all of us for the kripa and sacred divya darshans.

जो श्रम ठाकुरजी को हुआ उसके लिए क्षमा चाहते हैं,

प्रणाम,

आपकी आभा शाहरा श्यामा

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A group photo of all the people whose experience I have described above.

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“JAI HO”

 

 

 

 

Kadamb flowers

Sacred, Divine Kadamb:

Kadamb tree and blooms are considered sacred as it is very closely associated with Divine Shree RadhaKrishn and ShreeNathji.

This is the tree under which the Divine couple spent time in Their various leelas. Vraj Mandal has numerous Kadamb trees.

It finds mention in all Hindu scriptures.

When they bloom, the environment around smells sweetly fragrant; the fragrance is unlike any other flower.
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Every year I wait for these blooms and try to go walk around them taking in as much fragrance as is possible.

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This unique fragrance is unlike any other flower and is very sweet. Because of this the Kadamb flowers are always surrounded by honey bees.

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My dream is, someday I might just be able to tent below these trees and enjoy them totally for day and night.

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I personally love this fragrance; in fact the fragrance stays for few days even after the flowers have dried. Whenever possible I take a branch of the blooms and keep in my room, taking in their unearthly fragrance even after they have dried.

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An ancient Kadamb at Kaliyadeh, a leela sthali of Shree Krishn.

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Kadamb tree and blooms are considered sacred as it is very closely associated with Divine Shree RadhaKrishn and ShreeNathji.

This is the tree under which the Divine couple spent time in Their various leelas. Vraj Mandal has numerous Kadamb trees.

It finds mention in all Hindu scriptures.

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Kadamb Tree at CheerGhat at Vrindavan. It is a original Leela bhumi

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This is a Kadamb tree from Nathdwara. As you can here see people worship the tree too.

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A Kadamb tree at Nathdwara. As can be seen in the photo, it has been worshipped by bhakts over a long period of time

These blooms are to be found in Mumbai. I have not seen them at Vraj Mandal

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Kadamb tree’s botanical name is Anthocephalus cadamba. It is a large tree with a broad crown and straight cylindrical bole. It is quick growing, large; has large spreading and grows rapidly in first 6-8 year and produces golden ball of flowers. The tree may reach a height of 45 m with trunk diameters of 100-(160) cm. The tree sometimes has small buttresses and a broad crown. The bark is grey, smooth in young trees, rough and longitudinally fissured in old trees).

Out of millions of shrubs and plants, it is claimed that the 27 Stars (constellations) constituting 12 Houses (Rasis) and 9 Planets are specifically represented precisely by 27 trees only—one for each star—since the character of the stars, the trees and the individual go together. The Kadamba tree is said to represent Shatabhisha (Western star name -γ Aquarii) star. The characteristics of this star are ascribed to the tree as also to the individual born in that star

Shree Radha Raman at Vrindavan

Shree Radha Raman at Vrindavan, Vraj Mandal:
Radha Ramanji mandir was established by Shri Gopal Bhatta Goswami.
(The darshan photos are from an old collection of June 2009)
This beautiful Deity  Self-manifested It Self from a Shaligram Shila and has a mystic smile on His face.
Shree Radha Ramanji.

Shree Radha Ramanji

Except for Vrindadevi, Shree Radha-Ramanaji is the only  original Deity of Vrindavan who never left to go to Jaipur.

This is a Jhanki of Phool Bangla of that day

This is a Jhanki of Phool Bangla of that day

Shree Radha Raman’s Appearance Place is in the Radha-Raman Temple. The deity was installed on the full moon day in the month of Vaishaka (April-May) in the year 1542.

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This Granth describes the details of this sacred mandir; shown to us by the sewaks here.

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The main entrance to this ancient mandir

The main entrance to this ancient mandir

The Idol is a Self manifested deity out of the Shaligram Shila. It is over 500 years old. Radha Raman is a heritage temple where standards of worship are highest in Vrindavan.

Mandir before the darshans opened

Mandir before the darshans opened

Shree Radha Raman Temple was established by Shri Gopal Bhatt Goswami. He is one of the six Goswamis of Vrindavan who followed the principles of Shri Chaitanya Mahaprabhu.

Jai Ho!

 

 

A note to all Hindu families, Vaishnavs:

Hindu religion and culture comprises of several Form of God’s and Goddess. What I have noticed in many households is that several of these Forms are combined together in the home mandir within a small space, which in the process mixes the vibrational levels of the various Forms.

Each Form of Bhagwan (Parivar) requires different type of worship or sewa. The mantras, rituals of worship, sewa, bhog samagri, aarti, festival celebrations are very different, as per our ancient scriptures and traditions.

How would it be correct to place all of Them together in one house (mandir), and mix up the various types of sewa or worship? Would it not create clutter or impurity of Forms?

Let’s honor and respect Their uniqueness by allocating a distinct space in our home mandir, for each God Parivar.

All can be offered an asan adjacent to each other, with a dividing space between Them.

Though God is one Super power; when He or She comes in a particular Form, the divine Shakti, Urja, takes a different distinctive vibrational level. This is the reason that different ways of sewa and worship are prescribed in our religious books.

The really ALIVE original mandirs will have only one type of God Parivar in the Nij mandir. All the various Hindu Form of Gods and Goddesses have specific mandirs dedicated to Them.

All Divine Form of God’s, also have Their own locations as the major Teerths, since olden times.

This segregation by our higher Sants would have been organised for a proper reason.

(I have seen a few smaller mandirs, where a mix of all the God Parivars is found. These are new and have no ancient history attached to them, which may be to facilitate all types of bhakts who visit).

Ideal would be to go deep in one Form of God worship, but if not possible then at least a distinct space for each God Parivar. Let’s honor and respect Their uniqueness.

 Jai Shree RadheKrishn!

Jai Shreeji!

(Just as an example, I have put up few God parivars, as per Hindu religion):

Shree RadhaKrishn-ShreeNathji Pariwar

Shree RadhaKrishn-ShreeNathji Pariwar

Shree Ram Sita Pariwar

Shree Ram Sita Pariwar

Shree Shiv Parvati Pariwar

Shree Shiv Parvati Pariwar

Shree Vishnu Laxmi and Brahmaji

Shree Vishnu Laxmi and Brahmaji

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Each Devi has Her own dedicated mandir