ShreeNathji Mandir on Giriraj Govardhan

ShreeNathji Mandir on Giriraj Govardhan

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ShreeNathji Mandir on Shri Govardhan: A Panoramic view.

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Darshans here are of this ShreeNathji Chavi. The original Murti is now at Nathdwara Haveli. The journey to Mewar, as desired by Thakurjee, began in 1669 AD, on Asadh Sud Punam on Friday, during the last 3 hours of the night. ShreeNathji with all His sewaks arrived in Sinhad (Nathdwara) in 1672 AD, on Falgun Vad Satam on Saturday.

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Many bhakts are not able to get these darshans, as they are unable to climb up; either because of bad health, old age, or the belief that one should not give shram to Shri Girirajji by climbing on Him. Please enjoy these Darshans.

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Few details about this sacred mandir:

In 1499 AD, ShreeNathji gives hukum in a dream to Puranmall Kshtri. “Come to Vraj Mandal and build a large mandir for me”. So Puranmall sold all his property and came to Shri Govardhan at Vraj. He asked the Vrajvasi the where about of Shree Dev Daman.

Puranmall was very happy to do the darshans, after which he meets Shri Vallabh Acharya and narrates the dream. “I have sold everything that I possessed and come here with all my wealth to build the mandir as per Shreeji’s hukum”.

Shri Maha Prabhuji grants permission for building. Purnmall then requests Shri Giiriraj that there will be a lot of disturbance in building the mandir, I need your permission. Giriraj Govardhan says, “ShreeNathji will live in my heart, so all the digging work etc will not cause any parishram to me, please go ahead and start the work”.

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The mandir foundation was laid in the year 1499 AD, Vaishak Sud 3, in Rohini Nakshatra.

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All of Puranmall’s wealth was soon exhausted. He went south again to work and earn money so that the mandir could be completed. Shreeji refused to accept this sewa from any other bhakt and waited for 20 years, till Puranmall could complete the mandir!

Till then Shreeji stayed in a small mandir. These 20 years, Ramdas Chauvan Rajput did the sewa. Thus from 1488 AD till 1519 AD, Shreeji did His Leela from this small mandir.

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The architect Hiramani lived in Agra. As per hukum in his dream, he came to Vraj and met Shri Vallabh Acharya. Shri Vallabh Acharya gave him the permission and instructed him to start drawing the plan on paper. He drew the plan of a mandir without a shikhar. But as soon as he finished drawing the plan it would change to a drawing of a mandir with a shikhar. This happened three times, so Shri Maha Prabhuji understood that it was Shreeji’s desire to stay in a mandir with a shikhar.

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He tells Damodardas, “Since ShreeNathji wishes to stay in a mandir with a shikhar, it means He will stay in Shri Govardhan for many years. Then there will be attack by the Mughals, after which Shreeji will move to some other part of the country. He will stay here also for several years, after which He will move back to Vraj.

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New mandir Paat Utsav

Once this new mandir was ready, Shre Maha Prabhuji reached Vraj after completing parikrama of the country. Shreeji was established in His new mandir in 1519 AD; Vaishak Sud Teej; on Akha Teej. This day is also called the Paat Utsav of ShreeNathji.

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This is the ancient mandir built by Shri Puranmall. It has been restored twice since.

(Paragraph taken from our website for ShreeNathji – Abha Shahra Shyama)

Please share with due credit.

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This is how the mandir looks from the inside. Many bhakts do not climg up, so this photo can be helpful.

Gurushree Sudhir bhai, Ashokji, on Shri Govardhan at Shreeji's Pargatya sthal

Gurushree Sudhir bhai, Ashokji, on Shri Govardhan at Shreeji’s Pargatya sthal

 

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A distant view of the mandir

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View of the mandir from the parikrama maarg

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A book on Shri Govrdhan and ShreeNathji details. I took it with me when I climbed on Shri Govardhan, and enjoyed taking this picture here. Jai Shree GovardhanNathji!

Gurushree Sudhir bhai, with whose kripa I have been able to find ShreeNathji and  bring these photos to you all. My humble pranam1

Gurushree Sudhir bhai, on Girirajji; with whose kripa I have been able to find ShreeNathji and bring these photos to you all. My humble pranam!

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This is the bok we published which has all details of ShreeNathji and Shri Govardhan.

This is the book we published which has all details of ShreeNathji and Shri Govardhan.

 

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Save Vraj Mandal-Stop the use of Plastic

“VRAJ MANDAL”

This is a post written in Hindi, as it needs to reach out to the locals and majority of bhakts speak and read Hindi, our National language. It is an appeal from this Vraj lover to take some immediate measures. It talks about the filth and plastic that has become a second layer on this sacred land of ShreeNathji, Shree RadhaKrishn.

#vraj #swachbharat #stopuseofplastic #radhakrishnbhumi #hinduteerth

श्री राधा कृष्ण, श्रीनाथजी की पवित्र लीला भूमि:

” व्रज के प्रेमी, व्रज मंडल को बचाना आपके हाथ में है”

श्री राधा कृष्ण, श्रीनाथजी की पवित्र लीला भूमि में आपका स्वागत है।
आप यहाँ आए हैं, आपको व्रज के हर शुभ चिन्तक का प्रणाम।

(आपसे विनती है, कृपया पूरा पोस्ट पढ़िए, और सहमत हैं तो औरों तक पहुँचाने में मदद करिये. अपने विचार कमेंट्स में जरूर शेयर करिये).
इस पवित्र लीला भूमि पर जो भी आते है, वह चाहे किसी भी मनोरथ से आते हो, कुछ आशीर्वाद लेकर ही लौटते है।
किंतु, आज के कलियुग में, हम जो दर्शन के लिए, कुछ पाने की लालसा से, इस पवित्र लीला भूमि में पैर रखते हैं, यहाँ के लिए दुखदायक हो रहा है।

ग़लत मत समझिए; मेरा सही मतलब कृपा कर के  आगे पढ़िए।

“इस पवित्र भूमि पर अपवित्रता कुछ ज्यादा ही बढ़ रही है।

पवित्र शक्तियाँ को हम मजबूर कर रहे हैं, की आप यहाँ से निकल जाइए”.

– क्योंकि, सर्वप्रथम बात यह  है, कि यहाँ ज्यादा भक्त आ रहे हैं (जो कि बहुत ही अच्छी बात है), लेकिन दुर्भाग्य से इस प्रदेश की सरकार यहाँ की प्रगति नहीं चाहती, इसलिए सुविधा नहीं बढ़ा रही हैं।

कचरा कूड़ा का ढेर हर गली में इखट्टा है। कहीं भी कूड़ादान की सुविधा नहीं दी है। सफ़ाई के लिए प्रशासन अपना काम नहीं कर रही हैं।

Blog-Help Braj Dham
लेकिन आप ज़रूर मदद कर सकते हैं, की जब यहाँ आयें तो प्लास्टिक और थेरमोकोल का इस्तेमाल ही ना करें। दुकानदार से प्लास्टिक लेने से मना कर दें।

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जब मैंने सफ़ाई करवाने की कोशिश की तो यह तथ्य सामने आया की व्रज मंडल की पवित्र भूमि में ६ इंच तक यह प्लास्टिक अंदर धँस गया है। झाड़ू लगाते रहो, तो भीतर से प्लास्टिक निकलता ही जाता है। कुछ साल और ऐसे ही होता रहा तो आप को साफ़ सुथरी व्रज की रज कहीं नहीं मिलेगी।

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– यहाँ पर बहुत ज़्यादा बिल्डिंग सोसायटी और टाउन शिप का निर्माण हो रहा है; जिस कारण से प्राचीन लीला भूमि के पेड़ और पशु पक्षी से उनकी जगह छिन गई है।

भक्तों से विनती है, अगर आप सिर्फ़ इन्वेस्टमेंट के लिए पैसा लगा रहे हैं, तो कृपया रुक कर फिर से विचार कीजिये. अगर यहाँ रहने का विचार नहीं है तो, व्यर्थ में फ़्लैट मत लीजिय। यहाँ बहुत अच्छे आश्रम और होटेल बने हैं, उनमें अच्छी सुविधा है, वहाँ रह सकते हैं।

अगर ख़रीददार ही नहीं होंगे तो प्राचीन वन को, काटकर यह व्यर्थ की इमारतें खड़ी करना बंद हो जाएगा।

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बिल्डर्स और प्रशासन मिलकर इस भूमि की काफ़ी तबाही कर चुके हैं, अगर अभी भी नहीं रुका तो आपको कोई प्राचीन पेड़ दिखाई ही नहीं देंगे ।

व्रज मंडल को दिव्य माना गया है, और यहाँ के वन और पेड़ो को दिव्य मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं। श्री राधा कृष्ण की दिव्य लीला इन्ही वन में रची थीं, जिन्हें आज स्थानीय अधिकारी  बिल्डर्स  के साथ मिलकर कुछ पैसे के लालच में तबाह कर रहे हैं।

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वे जानते ही नहीं की उनके लालच ने भक्तों से क्या छीन लिया है, क्योंकि उनमें भक्ति भाव नहीं है।
– प्रशासन ने हर दिव्य भूमि से लग कर, सफ़ाई करने वालों का गाँव बसा दिया है।

उन्हें हर तरह की सुविधा और खेती के लिए मुफ़्त भूमि भी प्रशासन की तरफ़ से मिली है।

जैसा कि हमें लोकल संतों ने बताया, इन गाँवों को बसाया था लीला भूमि की सफ़ाई करने के लिए। लेकिन प्रशासन उन को सुविधा देकर जाँच करना ही भूल गयी कि वह अपना काम करते हैं या नहीं।
इन की औरतें ने जंगल काटना अपना अधिकार समझ लिया, और बहुत ही प्राचीन पेड़ काट रही है घर में चूल्हा जलाने के लिए। अगर उन्हें कोई संत, या भक्त रोकने की कोशिश करता है, तो इन महिलाओं को अधिकार मिला है प्रशासन की ओर से;  वह पोलिस में शिकायत करे, और बिना सुनवाई के उस व्रज के भक्त को जेल में डाल दिया जाता है।
इस कारण से व्रज के भक्त लाचारी से व्रज का नाश होते देख ख़ामोश रह जाते हैं। क्योंकि प्रशासन में उनकी सुनवाई नहीं होगी।
इन गांववालों ने अपने बच्चों को सिखा दिया है, भीक माँगना। तो आप किसी भी स्थल पे जाइए, इनके बच्चों का झुंड आपको एक पल भी शांति से प्रार्थना नहीं करने देंगे। मुफ़्त स्कूल भी नहीं जाना चाहते हैं यह बच्चे।

– तीर्थ स्थल के भिखारी भगुए वस्त्र पहन कर अच्छी ख़ासी कमाई करते हैं।

बहुत ही आसानी से कमाई हो जाती है, और आराम का जीवन बिताते है।  ज़्यादातर सभी साधू भिखारी और छोटे बच्चे भिकारी, बीड़ी, चरस, गाँजा फूँकते हुए मिलेंगे। यहाँ के बच्चों को कामचोर मत बनाइये.
आप को सोच समझ कर दान करना चाहिए। पात्रता देखकर दान करिए।

तीर्थ स्थल, आराम की कमाई के स्थल होते जा रहे हैं।

इसलिए आप सभी व्रज भक्तों से हाथ जोड़ कर विनम्र प्रार्थना करती हूँ,
तीर्थ स्थल को पिकनिक स्पॉट नहीं बनाइए। इस लीला भूमि की पवित्रता आप के हाथ में है, इसे बनाय रखने में आपका सहयोग ज़रूरी है। प्रशासन के भरोसे पर तो व्रज मण्डल का विनाश हो रहा है।

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दिव्य शक्तियों को साफ़, सुथरा पवित्र वातावरण चाहिए.
नहीं तो वह दिन दूर नहीं, की वे सब भूतल में गहरी उतर जाएँगी और हम हाथ मलते रह जाएँगे, अपने दुर्भाग्य पर। हमारे बच्चों को दर्शन का लाभ नहीं मिल पाएगा, और हम सब इसके ज़िम्मेदार  होंगे।

जय श्रीनाथजी, जय श्री राधा कृष्ण
कृपा करें, सदबुद्धि दें,
आभा शाहरा श्यामा

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The divya shaktis are being drowned in this filth and plastic.

Please read the complete post, and play your role in trying to maintain the purity of this divine land.
It will really help if you write your thoughts in the comments, and share this post on as many pages and groups, so that the message spreads far and wide.
Thank you for reading this message;
Warm regards,

Vraj Mandal bhakt,
Abha Shahra Shyama.

Wake up Vraj Vasisis and Vaishnavs!

This photo is from your favorite most sacred Giriraj Govardhan!

You are not even allowed to climb on this most sacred Parvat; and if you do then you have to ask for forgiveness. The local Pundas here keep shouting at you if you even step close by mistake with your shoes or socks on. But these same Pandas turn a blind eye to this filth created by them only. Pictures speak more then any words I could have written. Wake up. Stop giving these local Pundas any dakshina till they realize their responsibility. They have become accustomed to loving in free, no matter what they do or dont do.

The most sacred parvat, Shri Govardhan is also drowing in plastic. This photo is from the Anyor side of the Girirajji.

The most sacred parvat, Shri Govardhan is also drowing in plastic. This photo is from the Anyor side of the Girirajji.

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Divine ShreeNathji

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….  FOR MY DEAREST DIVINE SHREENATHJI

Some words in love for my ShreeNathji – my ShreeRadhaKrishn;

with whose blessings and grace;

in whose Bhao and Mahabhao I have realized my divine nature; my reality

ShreeNathji

“YOU are the dawn of everyday to me, the Hope that sees me through,

The Light that guides the way for me, the Love that’s always true –

YOU are the Joy that fills the heart in me

The BLISS that completes the dreams in me.

YOU are the reason for my tomorrows

YOU are the reason for today

YOU are the reason for my life’s living

YOU are the reason for my soul’s shinning.

YOUR love, friendship, grace

Has shown a new dimension –

I had never thought

I’d attain such contentment.

I want to be possessed by YOU.

I want to belong to YOU.

In my deepest thoughts

I want to hold on to “YOU”.

In total surrender and Bhakti

I offer my total to “YOU”.

Shreeji

 

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