ShreeNathji-Kesar Snan

Kesar Snan at ShreeNathji mandir-ज्येष्ठाभिषेक (स्नान-यात्रा)

ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा

Monday, 17 June 2019

आज ज्येष्ठाभिषेक है जिसे केसर स्नान अथवा स्नान-यात्रा भी कहा जाता है.

Shreenathjibhakti.org

Kesar Snan@ShreeNathji

श्री नंदरायजी ने श्री ठाकुरजी का राज्याभिषेक कर उनको व्रज राजकुंवर से व्रजराज के पद पर आसीन किया, यह उसका उत्सव है.

आज के दिन ही ज्येष्ठाभिषेक स्नान का भाव एवं सवालक्ष आम अरोगाये जाने का भाव ये हे की यह स्नान ज्येष्ठ मास में चन्द्र राशि के ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है और सामान्यतया ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को होता है.

इसी भाव से स्नान-अभिषेक के समय वेदमन्त्रों-पुरुषसूक्त का वाचन किया जाता है. वेदोक्त उत्सव होने के कारण सर्वप्रथम शंख से स्नान कराया जाता है.

ऐसा भी कहा जाता है कि व्रज में ज्येष्ठ मास में पूरे माह श्री यमुनाजी के पद, गुणगान, जल-विहार के मनोरथ आदि हुए. इसके उद्यापन स्वरुप आज प्रभु को सवालक्ष आम अरोगा कर पूर्णता की.

श्रीजी प्रभु वर्ष में विविध दिनों में चारों धाम के चारों स्वरूपों का आनंद प्रदान करते हैं.

आज ज्येष्ठाभिषेक स्नान में प्रभु श्रीजी दक्षिण के धाम रामेश्वरम (शिव स्वरूप) के भावरूप में वैष्णवों को दर्शन देते हैं जिसमें प्रभु के जूड़े (जटा) का दर्शन होता है

इसी प्रकार आगामी रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ के रूप में प्रभु भक्तों पर आनंद वर्षा करेंगे.

आज कैसे सेवा की जाती है :

पर्व रुपी उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को पूजन कर हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.

झारीजी में सभी समय यमुनाजल भरा जाता है. चारों समय (मंगला, राजभोग, संध्या व शयन) की आरती थाली में की जाती है.

गेंद, दिवाला, चौगान आदि सभी चांदी के आते हैं.

आज मंगला दर्शन में श्रीजी को प्रतिदिन की भांति श्वेत आड़बंद धराया जाता है.

मंगला आरती के उपरांत खुले दर्शनों में ही टेरा ले लिया जाता है और अनोसर के सभी आभरण व प्रभु का आड़बंद बड़ा (हटा) कर केशर की किनारी से सुसज्जित श्वेत धोती, गाती का पटका एवं स्वर्ण के सात आभरण धराये जाते हैं.

इस उपरांत टेरा हटा लिया जाता है और प्रभु का ज्येष्ठाभिषेक प्रारंभ हो जाता है.

सर्वप्रथम ठाकुरजी को कुंकुम से तिलक व अक्षत किया जाता है. तुलसी समर्पित की जाती है.

तिलकायत जी अथवा उपस्थित गौस्वामी बालक स्नान का संकल्प लेते हैं और रजत चौकी पर चढ़कर मंत्रोच्चार, शंखनाद, झालर, घंटा आदि की मधुर ध्वनि के मध्य पिछली रात्रि के अधिवासित केशर-बरास युक्त जल से प्रभु का अभिषेक करते हैं.

सर्वप्रथम शंख से ठाकुरजी को स्नान कराया जाता है और इस दौरान पुरुषसूक्त गाये जाते हैं. पुरुषसूक्त पाठ पूर्ण होने पर स्वर्ण कलश में जल भरकर 108 बार प्रभु को स्नान कराया जाता है. इस अवधि में ज्येष्ठाभिषेक स्नान के कीर्तन गाये जाते हैं.

स्नान का कीर्तन – (राग-बिलावल)

मंगल ज्येष्ठ जेष्ठा पून्यो करत स्नान गोवर्धनधारी l

दधि और दूब मधु ले सखीरी केसरघट जल डारत प्यारी ll 1 ll

चोवा चन्दन मृगमद सौरभ सरस सुगंध कपूरन न्यारी l

अरगजा अंग अंग प्रतिलेपन कालिंदी मध्य केलि विहारी ll 2 ll

सखियन यूथयूथ मिलि छिरकत गावत तान तरंगन भारी l

केशो किशोर सकल सुखदाता श्रीवल्लभनंदनकी बलिहारी ll 3 ll

स्नान में लगभग आधा घंटे का समय लगता है और लगभग डेढ़ से दो घंटे तक दर्शन खुले रहते हैं.

दर्शन पश्चात श्रीजी मंदिर के पातलघर की पोली पर कोठरी वाले के द्वारा वैष्णवों को स्नान का जल वितरित किया जाता है.

मंगला दर्शन उपरांत श्रीजी को श्वेत मलमल का केशर के छापा वाला पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर सफ़ेद कुल्हे के ऊपर तीन मोरपंख की चन्द्रिका की जोड़ धराये जाते हैं.

मंगला दर्शन के पश्चात मणिकोठा और डोल तिबारी को जल से खासा कर वहां आम के भोग रखे जाते हैं. इस कारण आज श्रृंगार व ग्वाल के दर्शन बाहर नहीं खोले जाते.

गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में आज श्रीजी को विशेष रूप से मेवाबाटी व दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है.

राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता अरोगाया जाता है.

सखड़ी में घोला हुआ सतुवा, श्रीखण्ड भात, दहीभात, मीठी सेव, केशरयुक्त पेठा व खरबूजा की कढ़ी अरोगाये जाते हैं.

गोपीवल्लभ (ग्वाल) में ही उत्सव भोग भी रखे जाते हैं जिसमें खरबूजा के बीज और चिरोंजी के लड्डू, दूधघर में सिद्ध मावे के पेड़ा-बरफी, दूधपूड़ी, बासोंदी, जीरा मिश्रित दही, केसरी-सफेद मावे की गुंजिया, घी में तला हुआ चालनी का सूखा मेवा, विविध प्रकार के संदाना (आचार) के बटेरा, विविध प्रकार के फलफूल, शीतल के दो हांडा, चार थाल अंकुरी (अंकुरित मूंग) आदि अरोगाये जाते हैं.

इसके अतिरिक्त आज ठाकुरजी को अंकूरी (अंकुरित मूंग) एवं फल में आम, जामुन का भोग अरोगाने का विशेष महत्व है.

मैंने पूर्व में भी बताया था कि अक्षय तृतीया से रथयात्रा तक प्रतिदिन संध्या-आरती में प्रभु को बारी-बारी से जल में भीगी (अजवायन युक्त) चने की दाल, भीगी मूँग दाल व तीसरे दिन अंकुरित मूँग (अंकूरी) अरोगाये जाते हैं.

इस श्रृंखला में आज विशेष रूप से ठाकुरजी को छुकमां मूँग (घी में पके हुए व नमक आदि मसाले से युक्त) अरोगाये जाते हैं.

(Details taken fromhttps:m.facebook.com/Shreenathjiprasad/)

राजभोग दर्शन का विस्तार

कीर्तन – (राग : सारंग)

जमुनाजल गिरिधर करत विहार ।

आसपास युवति मिल छिरकत कमलमुख चार ॥ 1 ll

काहुके कंचुकी बंद टूटे काहुके टूटे ऊर हार ।

काहुके वसन पलट मन मोहन काहु अंग न संभार ll 2 ll

काहुकी खुभी काहुकी नकवेसर काहुके बिथुरे वार ।

‘सूरदास’ प्रभु कहां लो वरनौ लीला अगम अपार ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में श्वेत मलमल की पिछवाई धरायी जाती है जिसमें केशर के छापा व केशर की किनार की गयी है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को श्वेत मलमल का केशर के छापा वाला पिछोड़ा धराया जाता है.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला का (चरणारविन्द तक) उष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.

हीरा एवं मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर श्वेत रंग की कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, तीन मोरपंख की चंद्रिका की जोड़ तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.

श्रीकंठ में बघ्घी धरायी जाती है व हांस, त्रवल नहीं धराये जाते. कली आदि सभी माला धरायी जाती हैं. तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.

श्रीहस्त में चार कमल की कमलछड़ी, मोती के वेणुजी तथा दो वेत्रजी धराये जाते हैं.

पट ऊष्णकाल का व गोटी मोती की आती है.

आरसी श्रृंगार में हरे मख़मल की एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.

जय श्रीनाथजी प्रभु

ठाकुरजी श्री राधा कृष्ण की जय हो

🙏

Shreenathjibhakti.org

Kesar snan at ShreeNathji mandir

Shreenathjibhakti-Kesar snan at ShreeNathji mandir

ShreeNathji mandir on Giriraj Govardhan

ShreeNathji Mandir darshan on Shri Giriraj Govardhan parvat

श्रीनाथजी प्रभु का प्राचीन मंदिर, गिरिराज गोवर्धन पर।महिमा सुनिए, दिव्य दर्शन कीजिए

इस दुर्लभ विडीओ में देखिए मंदिर के वे दर्शन:

⁃ उस खिड़की का दर्शन कीजिए जहाँ से श्री ठाकुरजी श्री गुसाँई जी को दर्शन देते थे, अपने मंदिर से चंद्र सरोवर पर जब श्री गुसाँई जी ने ६ महीने विप्रयोग का अनुभव करा; उनकी बैठकजी है यहाँ पर

⁃ उस खिड़की का जहाँ श्रीनाथजी मोहना भंगी को दर्शन देते थे

⁃ उस खिड़की का जहाँ से श्रीनाथजी व्रज वासी को दर्शन देते थे बिलछु कुंड पर; और बिलछु कुंड पर अपनी ही युगल स्वरूप लीला का अनुभव करते थे

⁃ शैया मंदिर में श्री महा प्रभुजी की १५वीं बैठकजी के दर्शन कीजिए

⁃ उस शैया मंदिर का दर्शन कीजिए जहाँ श्री महाप्रभुजी श्री नवनीत प्रियाजी के साथ शयन करते हैं

⁃ दर्शन कीजिए वह सुरंग का जो सीधी नाथद्वारा जाती है, जहाँ से कहते हैं श्रीनाथजी नाथद्वारा से श्री गोवर्धन आते जाते थे

🙏

जय श्रीनाथजी प्रभु

‘Live’ Holi varta with ShreeNathji Thakurjee

‘Live’ Holi varta with ShreeNathji
2.03.2018

अदृश्यमान होली के रंग, श्रीजी के संग

कुछ दिनों से हम (गुरुश्री, श्रीजी और मैं) गिरिराज जी पर हैं। होली दहन के दिन श्रीजी कुछ समय हमारे ही साथ खेल रहे थे। फिर bye bye कर के चले गए, ये कह कर की होली का दहन है, उन्हें कुछ ज़रूरी काम है।

मैं भी आज जल्दी सो गयी थी।
श्रीजी को याद करके, और गिरिराज जी को प्रणाम कर, जप करते करते आँख लग गयी।
अचानक ऐसा लगा जैसे की मैं गुलाल के ढेर में डूब रही हूँ। घबरा कर मेरे श्रीजी को ढूँढती हूँ, उन्हें आवाज़ देती हूँ. “देखो ना श्रीजी, चारों तरफ़ रंग ही रंग हो गया, गुलाल में कमर तक डूब गयी हूँ, निकलने की कोशिश करती हूँ तो और गहरी डूब जाती हूँ; अरे श्रीजी कहाँ हो, थोड़ी मदद करीए ना, इस गुलाल के ढेर से बाहर निकालो ना”।
श्रीजी की हँसती हुई गूँज सुनती है,
“अच्छा, अच्छा; मैं मदद करूँ? आभा शाहरा श्यामॉ, लो मेरा हाथ पकड़ो”
मैंने कस के हाथ पकड़ा और श्रीजी ने बाहर खींच लिया। लेकिन यह क्या! बाहर भी चारों तरफ़ गुलाल उड़ने लगा, और श्रीजी भी ग़ायब हो गए।

पुकारने पर श्रीजी की मधुर आवाज़ फिर सुनती है,
“आभा शाहरा श्यामॉ, शायद तू तो मानसिक भाव से रंग खेल रही है, यहाँ गुलाल है ही किधर, अदृश्यमान द्रश्य में खो कर स्वप्न देख रही है तू”।
“जिसके अंदर आभा फूलती(प्रकाश मान)हो, अद्रश्यमान प्रगट होती हो, तुझे होली के रंग (सप्त रंग) की कहाँ ज़रूरत है”।
“शुद्ध, सात्त्विक, प्रगटमान आभा है तू, मेरे रंगों में पूर्ण रूप से हमेशा रंगी रहती है, शुद्धि का रंग तुझ में भरा है; बाहरी रंग की ज़रूरत नहीं है तुझे।
जा अपने आनंद में रह, मेरे भाव की मस्ती के रंगों में हमेशा भरी रहेगी तू, भूल जा बाक़ी सब कैसे होली मनाते हैं।
देख चारों तरफ़ गोवर्धन पर रंग ही रंग भर दिए हैं लोगों ने, कोई बात नहीं।

तू अपनी मानसिक यात्रा में होली के रंग खेलते खेलते अब जाग जा”।

और मैं जाग गयी, देखा तो सुबह के चार बजे थे। जैसे की मेरी आदत है, मैंने जल्दी से श्रीजी के शब्द पुस्तक में लिख लिए।

बाद में गुरुश्री को यह वार्ता सुनाई। उन्हें भी बड़ा आनंद आया। उन ने श्रीजी से आज्ञा ली, फिर लेकर मुझे कहा की इसे और भक्तों के साथ share करूँ। आनंद को बाँटूँ।

इसलिए मेरे गुरुश्री और महा गुरुश्री की आज्ञा से आप लोगों के सामने प्रस्तुत कर रही हूँ।

शब्द श्रीनाथजी प्रभु के ही हैं।

कुछ भूल हो गयी हो प्रस्तुत करने में तो क्षमा करें
जय हो प्रभु 🙏
(तस्वीर श्रीनाथजी मुखारविंद की है)

Holi being played at ShreeNathji Mukharwind, Jatipura – Shri Govardhan

Shri Gusainji Baithakji at Chandra Sarovar

Shri Gusainji Baithakji at Chandra Sarovar is called the Viprayog baithakji. It is the 6th Baithakji.

For six months Shri Gusainji has to stay here away from ShreeNathji.

ShreeNathji Mandir in Shri Govardhan is also visible from here.

You can hear details of this ShreeNathji varta from the present mukhiyaji in this video below.

ShreeNathji Mandir on Shri Govardhan is visible from here

View of ShreeNathji Mandir on Shri Govardhan from this Baithakji

Shri Gusainji Viprayog Baithakji at Chandra Sarovar

ShreeNathji was very attached to Shri Gusainji

Jai ShreeNathji Prabhu 🙏

“ShreeNathji Sakshatkar darshans on Girirajji”

“ShreeNathji Sakshatkar darshans on Girirajji”: Prabhu ShreeNathji and Gurushree’s kripa

श्री ठाकुरजी के साक्षात दर्शन, उनके मुखारविंद, जतीपुरा में; आज से ठीक १३ साल पहले; ऐसी कृपा की कोई और मिसाल नहीं है।

दर्शन भी दिए और फ़ोटो भी लेने दिया; २०१४ में हमें आज्ञा भी दी सभी वैष्णव के साथ शेर करने की: क्या ऐसा कभी पहले हुआ है?

This divine leela happened 13 years ago on the auspicious day of 9th June 2005, at ShreeNathji Mukharwind, Giriraj Govardhan, Jatipura, with kripa of Gurushree Sudhir bhai; and only because of his close sakha bhav with prabhu ShreeNathji.

We all wonder what Shree Prabhu looks like!

The only True photo of ShreeNathji, Shree GovardhanNathji, Shree Thakurjee, Shree Dev Daman: In His Child Swarup.

Please take a moment and see for yourself in the photo above, just below the point where I am applying tilak; complete Face of Shree Thakurjee is visible as this (white) Ujjaval Urja (energy). This divine face Appeared for the duration of my pujan and Gurushree clicked the photos. The mukut, mor pankh, tilak, earrings, long black hair, both palms holding His own face and watching me do pujan, is ShreeNathji giving darshans of His Lalan swarup.

(Just for the record: it is not photoshopped, nor tampered in any way.

Details can be read on our website: http://www.govardhan.org.in

Given to us and ordered to share with His bhakts all over the world.

Thank you Prabhu for this kripa on all Your bhakts.

ShreeNathji Sakshatkar photo

ShreeNathji Sakshatkar from His Mukharvind

Jai ShreeNathji

ShreeNathji enjoys sports day at a school.

ShreeNathji – His ” LIVE” interactions Varta in today’s time period

श्रीनाथजी से दिव्य  वार्तालाप आज के ज़माने मैं..

ShreeNathji enjoys sports day at a school.

श्रीनाथजी, “मैं ६ बजे तेरे यहाँ आ गया और मेरी छवि मैं बैठ गया था, फिर जल्दी से भागा और उसके साथ गाडी में बैठ गया”…

image

1st November 2006

It is my child’s sports day today.
She has always been a very good athlete, and is excited, though a little nervous. She has to leave very early for the sports ground. Before leaving she prays to ShreeNathji for His blessings. (Shreeji’s large Chavi is in our living room and we pass it always when leaving the house).

As I am not going with her, I call my dear close friend, Millie who would be there at the sports ground, and request her to keep me posted about happenings at the races. Few hours into the event I receive her call, saying that my child has won gold in all the events. She won five gold medals in athletics this year.

As the varta goes:

A day earlier to the sports day, I had called up my Gurushree, Shri Sudhirbhai, asking for blessings for my child; so now I call up to inform him about her accomplishments.

Gurushree, is delighted and I hear him thanking ShreeNathji also.

Later that same night I have this very incredible vivid conversation with ShreeNathji Himself who describes His version of the sports event!

Writing it exactly as it went:

श्रीजी मुझसे कहेते हैं, “कल जब तुम सुधीर से फ़ोन पर बात कर रही थी मैं सुधीर के पास ही था. मैंने उसको पूछा की ये स्पोर्ट्स डे क्या होता है? आभा क्या बात कर रही है?
Shreeji tells me, “Yesterday, when you were talking to Sudhir on the phone, I was there with him. I asked him what sports day means. What is Abha talking about?

श्रीजी आगे बताते हैं, “तो सुधीर ने मुझे समझाया की स्कूल के बच्चों की प्रतियोगिता होती है, और मुझसे पूछा की आप वहां जाकर देखना चाहते हैं? मैंने हाँ करी.
Shreeji continues, “Sudhir explained to Me that it is a school competition, and asked Me if I wished to go there and see how it happens. I said yes to him”.

श्रीजी- “अरे, इसने (सुधीर) बोला तो मैं वहां गया. नहीं तो मैं ऐसे कहीं किसी के साथ नहीं जाता”.
Shreeji- “Arrey, Sudhir told me to go, that is why I went there. Other wise I never go any where with anyone like this.

श्रीजी- “फिर समस्या हुई की मुझे कैसे पता चलेगा कहाँ जाना है? सुधीर ने सुझाव दिया की सुबह जल्दी आभा के यहाँ चले जाना और बच्ची के साथ में ही स्पोर्ट्स ग्राउंड चले जाना”.
Shreeji- “Then rose the problem of how will I know where to go? Sudhir guided Me saying that I should go early to Abha’s house. From there I can go with her child to the sports ground.

श्रीजी आगे बताते हैं, “इसलिए मैं सुबह ६ बजे से तेरे यहाँ आ गया था; मेरी बाहर वाली छवि मैं बैठ गया. सुबह तैयार होकर तेरी बच्ची मेरे पास आई प्रणाम करने और आशीर्वाद के लिए”.
“फिर जब देखा की वोह निकल रही है, जल्दी से भागा और उसके साथ गाडी में बैठ गया. क्यों की मालूम नहीं था की कहाँ जाना है”.
Shreeji continues, “So early morning at 6 I reached your house and sat down in My Chavi which is outside in the hall. Your child came to Me to do her pranam and for blessings, before she left. As soon as I saw her leave, I also ran and sat in the car with her; as I did not know where to go.

श्रीजी- “स्पोर्ट्स मैदान में, मैं उसके पीछे खड़ा हो गया, क्योंकि मालुम ही नहीं था की क्या करना है”. “फिर सब भागने लगे, और तेरी बच्ची भी तेज़ी से भागी. मैं तो खड़ा ही रह गया.वोह पहले नंबर पर आई, और खूब जोर से ताली बजी;
Shreeji- “At the sports ground I stood behind her, as I just did not know what to do”. “Then suddenly all began to run and your child also ran fast. I was just left standing there alone. She came first and all clapped loudly for her.

श्रीजी थोड़ी सी उदास आवाज़ में आगे बताते हैं, “लेकिन मुझे कोई नहीं देख रहा था. मैं खड़ा रहा, समझ में नहीं आया क्या करूँ. लेकिन मज़ा आया. बहुत धूप थी, और गर्मी भी.
Shreeji continues a little sadly, “But no one was looking at Me. I just stood there as I did not understand what to do.
It was a lot of fun. But it was very sunny and hot.

श्रीजी- “थोड़ी थोड़ी देर में मैं तेरी बच्ची का चेहरा देख लेता था, मैं सही जगह पर ही हूँ न.
वहाँ कई बच्चे कागज़ खोल कर कुछ खा रहे थे, वो क्या होता है?
Shreeji- “Every few minutes, I would look at your child’s face; and made sure that I am yet in the right place. Many children were eating something from a paper packet, what was that?”

आभा- “श्रीजी, वो सैंडविच होगा, सब बच्चे पसंद करते हैं”.
Abha- “Shreeji, that must be a sandwich. Most of the children enjoy eating that.

आभा- “श्रीजी यह तो बताइये की आपको कैसा लगा? आशा है की स्पोर्ट्स डे में आपको मजा आई. आपने कभी ऐसा देखा ही नहीं होगा”.
Abha- “Shreeji, how did You like being there, hope you enjoyed the Sports day and had fun. I am sure You must have never seen anything like this before”.

श्रीजी शिकायत के लहजे में, “अरे, सब कितनी आवाज़ करते हैं! बहुत गर्मी भी थी वहां. वोह लोग ऐ.सी (AC)रूम में क्यों नहीं भागते हैं?
Shreeji in a complaing tone, “Arrey, these children make so much noise! It also became very hot. Why don’t these children run in an AC room?”

मुझे हँसी आती है. “श्रीजी इसलिए की बहुत बच्चे होते हैं इतना बड़ा कमरा कहाँ से लाएँगे”.
I burst in laughter. “Shreeji, maybe because there are a lot of children. It is not possible to get such a large room for sports events”.

श्रीजी नटखट आवाज़ में कहते हैं, “हाँ.. फिर तो उनको एक छोटा ए.सी (AC) साथ लेकर दौड़ना चाहिए, अपने अपने सर के ऊपर. हा हा हा. लेकिन वोह चलेगा कैसे”.
और यह देखो, धूप में मैं कितना काला हो गया”. श्रीजी मजाक में कहते हैं.
Shreeji continues talking in His naughty tone, “Han.. But then they should all run with a small AC fitted on their head. Ha Ha, but then how will the AC work”.
Also just see, how black and dark I have become in the sun..” Shreeji jokes.

श्रीजी आगे कहते हैं, “बहुत बच्चे थे, मुझे आनंद आया. पहले मैंने सोचा की तेरी बच्ची को उठा कर जल्दी से आगे रख दूँ, पर सुधीर की कही हुई बात याद आ गयी। उसने बोला था, ‘श्रीजी कोई मस्ती नहीं करना वहाँ पर. सब लोग घबरा जायेंगे. कुछ नुक्सान भी नहीं होना चाहिए. फिर जब मन करे, आप वापस आ जाना’.
Shreeji continues with His dialogue, “There were a lot of children, I enjoyed Myself. Initially I had thought of lifting your child and putting her directly on the finish line. But I remembered Sudhir’s warning. He had told Me not to do any mischief and just watch. Sudhir had explained that I should not cause any problem, as it could frighten the people present there. And whenever I feel like it, I could leave and go back”.

My child also told me later. “I felt very confident and there was no exhaustion after running the races. There was no negative thought in my mind”. (She had won gold in all the three running events).
I explained God’s blessings to her, her own faith in Shreeji, and His Presence in our house. We both did a dhoop for Shreeji and thanked Him for His blessings.

The same day later Millie too told me that as she entered the sports ground, she smelt the fragrance of Nathdwara Prasad. She looked around her, but there was no tree or foliage from which the fragrance could come. It all felt very divine. While returning also, at the same point; she could smell the Nathdwara Prasad fragrance again.
This might be because of ShreeNathji’s Live Presence as Lalan in that area. And Millie is His bhakt.

Some happenings are un explainable and incredibly divine in nature. They cannot be explained in worldly language and can be understood and accepted only in faith and bhakti.

(For those who have never eaten the prasad from Nathdwara, Shreeji’s prasad has the typical fragrance of kapur( camphor) and some added spices which is very typical of the Nathdwara Haveli prasad).

It is always kripa of God and Guru, that one can be fortunate enough to be a nimit for such divine interactions.

My pranam to my Gurushree and MahaGurushree, I am humbled by this divyata in my life and the divine love and kripa that I am showered with!

Jai Shreeji
Jai Shree Radhe Krishn!

पूर्णता से समर्पित मेरे श्रीजी के चरणों में

With Thakurjee’s desire and my Gurushree’s permission this present day leela and Khel is being made public. It is ShreeNathji’s Love for His bhakts.
ठाकुरजी के भक्त उनकी मीठी और दिव्य खेल और लीला का आनंद उठा सकते हैं।
और लीला मेरे इसी फ़ेस बुक पेज पर आपको मेलिगी। ज़रूर पढ़िए और आनंद लीजिए
Many more Live leela with ShreeNathji can be read on my face book page: abha shahra Shyama.

ShreeNathji Kripa of His Darshans at Gowardhan

 

Devotion for me is offering of myself at your feet, Shreeji-Shree RadhaKrishn. Through You I surrender to eternity”.

ShreeNathji's kripa

Shreeji, Aapki kripa hamesha bani rahe

 

As I feel myself experiencing this Divine energy, my whole being gets transformed. Had never experienced such sacredness in any situation before. Beyond the ordinary, the mundane, this flow of such incredible intensity moving is in no way connected to the outer reality.

It’s as if experiencing another world, some different level of reality where all is vibrations colors and energy.

What moves within?

Something just takes hold of me and transports me to another dimension.

It makes me greedy – wanting more and more. In this close experience with the Divine, with existence, it feels as if something is filling me up which creates a feeling of gratitude and a lot of joy. It’s as if I’ve finally found what I had been searching and waiting for.

This is the door for the ‘Bhao’ that I want to be a part of.

It intoxicates me – the flow of such Divine love, I am unable to keep myself to myself- I have to melt away- do away with all the physical boundaries of this gross body and move deeper and deeper to reach the Dot.

The purity, the sacredness of the total experience shows me a new and different way of being. I feel I am floating away carried away into a cradle of love, love and a lot of love. I feel rested, I feel peace and most of all I feel of not wanting to stop this flow and come back to outer reality we call life. As the vibrations enter every pore, each cell of my being, I feel I want to drown totally in this flow, in this bliss.

Krishn, let my heart be totally pure and mind intent on the goal”.

The wearing of Shreeji’s pujan ‘mala’ at the Mukharvind, and the Tilak  of the pujan at the Shyamkund, stirred up un describable devotion and a feeling of complete surrender and peace – of “belonging”.

Abha doing pujan at Shreeji Mukharwind at Gowardhan. Shreeji Gives His Mukhar Darshans at this moment. Please look closely at this picture

Abha doing pujan at Shreeji Mukharwind at Gowardhan. Shreeji Gives His Mukhar Darshans at this moment. Please look closely at this picture

 

 

Such moments of pujan become memorable, I call them soul presence, as there is nothing of the mind and body present at the time of  darshans; it is ourselves, as the true beings in the original identities.

This can only be experienced, not explained, and I guess only possible in the close proximity of one who is the highest in purity and spirituality, which is Gurushree, Sudhir bhai .

ShreeNathji leaves His Haveli Mandir from Nathdwara, as Shreeji enjoys staying with Gurushree most of the time. It is his kripa that Shreeji gave His sakshat darshans from His Mukharwind at Giriraj Govardhan.

Such intensity and Bhao I have never experienced before – such total acceptance of me as myself; as the truth about my true identity.

Jai Shreeji!!

 

Paragraph taken from my book: Zero2Dot.  http://www.zero2dot.org/

A complete website dedicated to This Darshans is coming up soon!

 

 

 

Divine ShreeNathji

********************************************************************************************************

….  FOR MY DEAREST DIVINE SHREENATHJI

Some words in love for my ShreeNathji – my ShreeRadhaKrishn;

with whose blessings and grace;

in whose Bhao and Mahabhao I have realized my divine nature; my reality

ShreeNathji

“YOU are the dawn of everyday to me, the Hope that sees me through,

The Light that guides the way for me, the Love that’s always true –

YOU are the Joy that fills the heart in me

The BLISS that completes the dreams in me.

YOU are the reason for my tomorrows

YOU are the reason for today

YOU are the reason for my life’s living

YOU are the reason for my soul’s shinning.

YOUR love, friendship, grace

Has shown a new dimension –

I had never thought

I’d attain such contentment.

I want to be possessed by YOU.

I want to belong to YOU.

In my deepest thoughts

I want to hold on to “YOU”.

In total surrender and Bhakti

I offer my total to “YOU”.

Shreeji

 

*******************************************************************************************************

Malkapur visit

 

_____________________________________________________________________________

Malkapur is a small town in Maharashtra, India.

This page is developed as an expression of gratitude for the wonderful Kochar family, whose hospitality we enjoyed for four days in the first week of February 2014.

Gurushree, Shri Sudhir bhai, and us were invited to visit Malkapur to meet all the family members, and who wished to have enjoy a Satsang (Spiritual talk) with Sudhir bhai and honour him as their son’s Guru.

It’s not an everyday occurrence, that one gets to meet a family who is so warm and devoted.

It is Ritesh Kochar who is a disciple of Sudhir bhai, and his entire family places complete trust and faith in his following.

The immediate family of eight welcomed us with so much warmth and respect and extended honour; I will always remember this visit as a very unique one in my life.

In fact the extended family members of six brothers were an example of humility and warmth, who went out of their way to make us comfortable in every way.

I also have to mention the unusual special meals that they served us, going out of their way to make sure that the menu and taste was perfect.

Arunaji, Roopali, Ritu – thank you for the special cooking you all did for us. Shri Suganchandji and Tusharji, thank you for the hospitality, and special mention to the lovely children, Parth and Malini who were there to run any task required.

Ritesh, thank you for inviting us to your home, with so much love, warmth, respect; and making us meet all the wonderful family people

I will always remember this one trip as a wonderful four days spent with a family, where the olden traditions of Indian hospitality are yet alive.

11a1b22a,2a2b2c2e2f2h33a