Hindustan

Shri Narendra Modi was elected Prime Minister of India on 26 May 2014.

From this day onwards our nation became Bharat once again and all of us Bharatwasi.

Hindustan or India; Hindustani-Bharatvasi or Indians; choice will be in your hands, who you elect in 2019.

भारतवासी – आज एक बार फिर अपने देश पर कुछ परोपकार करो, और भारतवासी, हिंदुस्तानी होने का फ़र्ज़ पूरा करो

नरेंद्र मोदी ने जो भी देश के लिए शुभ करा है, उसे समझो और वे प्रधान मंत्री बने रहे, यह कोशिश करो; सच्चाई पर जो चलने की हिम्मत रखता है, वह ही सच्चा इंसान है

नरेंद्र मोदी, मेरे जैसे और बहुत हैं जिन्हें पहली बार लगा है की हम हिंदुस्तानी किसी से कम नहीं हैं।

नरेंद्र मोदी आप के PM बन ने से पहले हम ‘Indians’थे, जो आज भी ग़ुलामी कर रहे थे; जो दब दब कर भूल गए थे, उनकी असली पहचान।

गर्व होता है आज, अपने हिंदुस्तानी होने पर।

कोई PM तो है जो सामने आकर ‘हिंदुस्तान’ को हिंदुस्तान कहने का बल रखता है।

#Primeminister प्रभु आपकी रक्षा करे और बुलंद करे; जो सवा करोड़ हिंदुस्तानी के लिए आपने सर उठा कर जीने की दिशा तो दिखा दी

#pmo #narendramodi #india #primeministerofindia #bharat #hindustani

जय हो, जय हिंद 🇧🇴

।।वन्दे मातरम ।।

Sunrise on Giriraj Parvat

Shri Giriraj Govardhan Parvat-Vraj Mandal Jai ShreeNathji-Jai Shree RadhaKrishn

१५-०१-२०१९ का ये छोटा सा विडीओ आप के लिए 🙏

यूँ लगता है सूर्य देव बादल के माध्यम से गिरिराज जी को नमन कर रहे हैं

सुबह का यह दृश्य आलोकिक है, कुछ पल के लिए गिरिराज जी सूर्य की इस अद्भुत लालिमा में डूब जाते हैं।

चाहती तो हूँ की समय यहीं पर कुछ समय रूक जाए और यह दिव्य नज़ारा हम निहारते रहें।

किंतु प्रकृति तो किसी के लिए इंतज़ार नहीं करती, और देखते ही देखते २-५ मिनट में यह लालिमा पूर्ण हो जाती है।

Video clip shot early morning on iPhone xs

#iPhonephotography #vrajmandal #girirajgovardhan #redsunrise

Jai Ho 🙏

Bhakti- Different moods

On way to Shree RadhaRani mandir this sadhu bhakt sits shaded by the shrub; lost in his bhajan and accepts whatever alms given.

This is Vraj, the land of the seen and the unseen.

This pavitra bhumi is filled with various colours and flavours

ShreeNathji-Important dates in His Pragatya

ShreeNathji has been on tis Earth for a period of 606 years (Till 2015). If we add till 2019 it will be a total of 609 years.

I have tried to mark out some important dates in His Prithvi Avtaar in a chart form, as per ‘Pragatya Vaarta’.

Hope it helps to give a new perspective to His Appearance at Shri Giriraj Govardhan

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Jai ShreeNathji Prabhu!

Vishram Ghat – Sandhya arti

Vishram Ghat Sandhya arti @ Shri yamunaji:

View from the opposite side on Shri Yamunaji, Mathura, Vraj Mandal

Sandhya Arti @ Vishram ghat, Mathura

 

 

‘Live’ Holi varta with ShreeNathji Thakurjee

‘Live’ Holi varta with ShreeNathji
2.03.2018

अदृश्यमान होली के रंग, श्रीजी के संग

कुछ दिनों से हम (गुरुश्री, श्रीजी और मैं) गिरिराज जी पर हैं। होली दहन के दिन श्रीजी कुछ समय हमारे ही साथ खेल रहे थे। फिर bye bye कर के चले गए, ये कह कर की होली का दहन है, उन्हें कुछ ज़रूरी काम है।

मैं भी आज जल्दी सो गयी थी।
श्रीजी को याद करके, और गिरिराज जी को प्रणाम कर, जप करते करते आँख लग गयी।
अचानक ऐसा लगा जैसे की मैं गुलाल के ढेर में डूब रही हूँ। घबरा कर मेरे श्रीजी को ढूँढती हूँ, उन्हें आवाज़ देती हूँ. “देखो ना श्रीजी, चारों तरफ़ रंग ही रंग हो गया, गुलाल में कमर तक डूब गयी हूँ, निकलने की कोशिश करती हूँ तो और गहरी डूब जाती हूँ; अरे श्रीजी कहाँ हो, थोड़ी मदद करीए ना, इस गुलाल के ढेर से बाहर निकालो ना”।
श्रीजी की हँसती हुई गूँज सुनती है,
“अच्छा, अच्छा; मैं मदद करूँ? आभा शाहरा श्यामॉ, लो मेरा हाथ पकड़ो”
मैंने कस के हाथ पकड़ा और श्रीजी ने बाहर खींच लिया। लेकिन यह क्या! बाहर भी चारों तरफ़ गुलाल उड़ने लगा, और श्रीजी भी ग़ायब हो गए।

पुकारने पर श्रीजी की मधुर आवाज़ फिर सुनती है,
“आभा शाहरा श्यामॉ, शायद तू तो मानसिक भाव से रंग खेल रही है, यहाँ गुलाल है ही किधर, अदृश्यमान द्रश्य में खो कर स्वप्न देख रही है तू”।
“जिसके अंदर आभा फूलती(प्रकाश मान)हो, अद्रश्यमान प्रगट होती हो, तुझे होली के रंग (सप्त रंग) की कहाँ ज़रूरत है”।
“शुद्ध, सात्त्विक, प्रगटमान आभा है तू, मेरे रंगों में पूर्ण रूप से हमेशा रंगी रहती है, शुद्धि का रंग तुझ में भरा है; बाहरी रंग की ज़रूरत नहीं है तुझे।
जा अपने आनंद में रह, मेरे भाव की मस्ती के रंगों में हमेशा भरी रहेगी तू, भूल जा बाक़ी सब कैसे होली मनाते हैं।
देख चारों तरफ़ गोवर्धन पर रंग ही रंग भर दिए हैं लोगों ने, कोई बात नहीं।

तू अपनी मानसिक यात्रा में होली के रंग खेलते खेलते अब जाग जा”।

और मैं जाग गयी, देखा तो सुबह के चार बजे थे। जैसे की मेरी आदत है, मैंने जल्दी से श्रीजी के शब्द पुस्तक में लिख लिए।

बाद में गुरुश्री को यह वार्ता सुनाई। उन्हें भी बड़ा आनंद आया। उन ने श्रीजी से आज्ञा ली, फिर लेकर मुझे कहा की इसे और भक्तों के साथ share करूँ। आनंद को बाँटूँ।

इसलिए मेरे गुरुश्री और महा गुरुश्री की आज्ञा से आप लोगों के सामने प्रस्तुत कर रही हूँ।

शब्द श्रीनाथजी प्रभु के ही हैं।

कुछ भूल हो गयी हो प्रस्तुत करने में तो क्षमा करें
जय हो प्रभु 🙏
(तस्वीर श्रीनाथजी मुखारविंद की है)

Holi being played at ShreeNathji Mukharwind, Jatipura – Shri Govardhan

The Holy Cow-Vedic Gaumata

Wholesome cow milk converted to slow acting poison..?

गाय के दूध को ज़हर बना दिया..!

हमारे देवताओं ने, पूर्खों ने गाय को माता का दर्जा दिया, उसे पूजा; और जिसका दूध अम्रत समझ कर आरोगा,
कलियुग के प्रभाव ने उसी माता को आम पशु बना दिया। उस जीवन दायी गौ माता को ज़हरीले रासायन देकर उसके अम्रत समान दूध की मिलावट कर ज़हर बना दिया और हमें कहा की दूध मनुष्य का भोजन नहीं है!
कुछ इंसान का लालच कारण हुआ, की जीवन देने वाले दूध को धीमा ज़हर बना कर उसके उच्च दर्जे से नीचे गिरा दिया। 😥
क्या हमारे हज़ारों साल पहले के ऋषि मुनि बेवक़ूफ़ थे? या फिर सभी देवता जन ना समझ?

That cow, who our God’s worshipped and our ancestors gave the prefix of a mother, whose milk was thought to be an Amrit like food which we all drank and stayed healthy and fit with;
Negativity of kalyug brought this gau mata down to the category of a common animal,
The so called ‘Intelligent people’ mixed it with various poisons by feeding chemicals to mother cow thus converting the amrit like milk to slow acting poison and telling us all that milk is bad for humans!
Greed of the few highly placed humans spoilt the Indian breed of cows and then nutritionists and doctors world over, began the chant of ‘Milk is not for humans’.
Where is the logic in this statement?

Were all the Indian rishi muni, Ayurvedic practitioners 5000-6000 years ago fools??

ShreeNathji and Shree Krishn are called ‘Gopal’, meaning the keeper of cows!

Photo(Shree Krishn doing pujan of Gau mata).

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Giriraj Govardhan-Tongue at Radha\Shyam Kund

ShreeNathji, Shree Giriraj Govardhan

जीवहा मंदिर, राधा कुंड पर: Jihva (Shri Giriraj tongue) mandir at Radha Kund

राधा कुंड के इस मंदिर को गिरिराज जी की जीवहा (जीब, tongue)मानते हैं।

यह शिला जो आप देख रहे हैं, गिरिराज जी की पवित्र शिला है।

इसके पीछे एक वार्ता है:

‘श्री रघुनाथ दास स्वामी को एक कुआँ खोदना था, तो उन्होंने काम चालू करवाया। मज़दूर जब खुदाई कर रहे थे, उनका औज़ार एक शिला पर लगा जिस के कारण उस शिला से ख़ून बहने लगा।

खुदाई तुरंत बंद कर दी गई।

उसी रात स्वप्न में श्री कृष्ण ने श्री रघुनाथ स्वामी को बताया, “मैं गोवर्धन से अलग नहीं हूँ, यह शिला गिरिराज की जीभ है, उसे निकाल कर मंदिर में बिठाओ और पूजन शुरू करो।

राधा कुंड के जल से सेवा करो”।

यह वही प्राचीन मंदिर है; गिरिराज जी की हर शिला पवित्र और दिव्य है।

गिरिराज महाराज की जय हो!

श्रीनाथजी ठाकुरजी की जय

श्री राधा कृष्ण की जय

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