ShreeNathji-Return to Vraj

                                                                                           “Jai ho ShreeNathji”
When You return to Vraj very soon, this is what Girirajji will feel like.

Your Dhajaji will fly on Shri Govardhan, though unseen to the world. Visible only to Your chosen bhakts.


Your Presence will again bring to life the dormant urjas and vibrations of several hundred years ago.

 ।। श्री गोवर्धननाथ स्योद्धववार्ता ।।
अर्थात्
।। श्रीनाथजी की प्राकट्य वार्ता ।।

यह ३ वाक़या जो इस पोस्ट में लिखे हैं, श्रीनाथजी की प्राचीन पुस्तक से लिए हैं.

तीन जगह उल्ल्लेख है की श्रीनाथजी व्रज जल्द ही पधारने वाले हैं. 
हो सकता है की श्रीजी ने इसके लिए पूर्ण तय्यारी भी कर ली होगी, अपने किसी भक्त और सेवक के साथ.

जय हो श्रीजी, जय श्री गोवर्धननाथजी
आपकी

आभा शाहरा श्यामॉ

कुछ भूल हुई तो क्षमा करिए
श्रीनाथजी के बहुत से नटखट दिव्य खेल और लीला 
”आज के वक़्त में”, 
इस लिंक पर पढ़ सकते हैं:

http://www.shreenathjibhakti.org

 

We all wait to welcome YOU SHREEJI, back to YOUR ORIGINAL DHAM AND YOUR REAL HOME:
“SHRI GIRIRAJ GOVARDHAN”.
YOU TOO MUST HAVE MISSED BEING HERE WITH YOUR BELOVED CHOSEN BHAKTS AND SHAKTIS.

ShreeNathji kripa 🙏

This life is a journey of many past lifetimes.

The soul which is blinded in maya can become pure with kripa of ShreeNathji.

When purity levels become high and deep, the jeevatma is able to recognise its reality.

Kripa and blessings enter when one keeps faith high, no matter what!

Jai ho!

Jai Shree RadhaKrishn  Jai ShreeNathji Prabhu

🙏

26758061_2005082496173733_3413628262433566674_o

 

ShreeNathji as a Jyotish Acharya-“Live Varta”

ShreeNathji Thakurjee:Live interaction varta in today’s time period

(This post is in hindi)
१०.११.२०१७; वृंदावन धाम

‘श्रीनाथजी की एक खेल वार्ता ज्योतिष शास्त्र पर, श्री गुसाँईजी के साथ’
आज के स्वप्न में:

श्रीनाथजी का दिव्य विवरण उनके ही मधुर शब्द, मैंने कोशिश करी है पूर्णता से वही रखने की।
Narration by ShreeNathji Himself:

श्रीजी कहते हैं, “चलो आभा शाहरा श्यामॉ आज कुछ अच्छा बताता हूँ तुझे, सुनेगी क्या?”

आभा, “ ज़रूर श्रीजी, हमें तो हमेशा उत्सुकता रहती है, कुछ नया सुनने की। बताने की कृपा करें“🙏

श्रीजी, “सुन तो; एक दिन गुसाँईजी के साथ कुछ खेल करने का मन हुआ। मैं उसके पास गया और अपना पैर दिखा कर बोला; ‘ गुसाँई जी ये देखो मेरे पैर में चोट आइ है, ज़रा पंचांग देख कर बताओ ऐसा कौन सा समय था की मुझे आज चोट लगी’
मेरी चोट तो बहुत ही छोटी सी थी, लेकिन मैंने दिखाने के वक़्त उसे इतना बड़ा कर के दिखाया, हा हा।
(गुसाँई जी से मस्ती करनी थी। वो ज्योतिष shashtr के बहुत बड़े जानकार थे और ज्ञानी भी);
‘हाँ तो बताओ कौन सा ख़राब महूरत था जब मुझे लगी?’

गुसाँई जी ने चोट देखी और गर्दन हिला कर कहा, “ हाँ बाबा चोट तो लगी है, किंतु महूरत देखने के लिए ज़रा मुझे बताइए किस ‘समय’ चोट लगी थी. उस ‘समय’ के अनुसार मैं पंचांग देखता हूँ”।

अब मैं तो चुप; मुझे तो याद भी नहीं था और कोई ऐसी चोट भी नहीं थी, क्या करूँ? सोचता था।
तो मैं ने गुसाँईजी से कहा, ‘मैं ज़रा सोचता हूँ, थोड़ा वक़्त दो’;
और भागा ‘मेरा पंचांग’ देखने के लिए। क्योंकि अगर मैं कोई भी समय बता देता और वह ‘चल लाभ अम्रत’ का महूरत होता तो मैं पकड़ा जाता। इसलिए मैं देखने भागा की कौन से ‘समय’ में ‘काल, राहु काल,’ था उस दिन।
और मेरी प्रतिकृति उनके सामने बिठा दी, जिस से उनको लगे मैं सामने बैठा सोच रहा हूँ।

पंचांग जल्दी जल्दी देख कर वापस आया, ‘ हाँ मुझे याद आ गया, … इस समय लगी थी, अब जल्दी से देखो और बताओ’।
गुसाँई जी देखते हैं और कहते हैं, ‘हाँ बाबा यह तो राहु काल का समय था; किंतु इस समय अगर लगी है तो यह जल्दी ठीक होने वाली नहीं है, ये तो अब और फूल कर इतना बड़ा हो जाएगा’।
मैं तो फँस गया, अब क्या करूँ? मैंसोचता हूँ की शायद से गुसाँई जी ने मुझे पकड़ लिया है।
इतने में वो बोलता है, ‘श्रीजी ऐसा करो, एक बार फिर से सोचो सही समय क्या था, हो सकता है ग़लत याद आया हो’।
मैं ख़ुश हो गया, ‘हाँ हाँ ज़रूर हो सकता है मेरे याद करने में कुछ ग़लत हो गया हो, में फिर से याद करता हूँ’।
मुझे मेरी बात ठीक करने की जगह मिल गयी, मैं फिर भागा और पंचांग देखा की ‘चल,लाभ,अम्रत’ कब का है।

और आ कर वो समय बता दिया। ‘गुसाँई जी याद आ गया, … ये समय था, शायद पहली बार ग़लत बता दिया था’।
उसने पंचांग देखकर बताया, ‘चलो श्रीजी बच गए, ‘चल’ में लगी थी चोट तो चलता है कोई चिंता की बात नहीं है, क्योंकि चल के बाद लाभ है और लाभ के बाद अम्रत और शुभ है, तो सुबह तक बिलकुल ठीक हो जाएगी, आप खेलिए’।
तो फिर मेरी चोट को मैं ने जल्दी से छोटा कर दिया और ग़ायब हो गयी।

गुसाँई जी मेरी मस्ती खेल पकड़ लेते थे किंतु हमेशा मुझे रास्ते भी बता देते थे।

मुझे भी आता है पंचांग देखना, हाँ … नक्षत्र, होरा, महूरत सब देखना आता है मुझे, भले ही पाठशाला में पढ़ने नहीं गया.. हा हा हा।

और गुसाँई जी के पुत्र गोकुल नाथ ने तो ज्योतिष शास्त्र आधारित ‘ वाचनामृत कोठा’ की रचना की थी।

गुसाँईजी मेरे बहुत ही प्रिय थे; हम लोग ऐसे ही खेलते थे।
सब को ख़ुशी बाँटनी चाहिए, इस लिए सब को सुनाना।

जय हो प्रभु 🙏
आपकी लीला और खेल बहुत आनंद प्रदान करते हैं

श्रीनाथजी की जय हो!
हमेशा आपकी भक्ति में

#ShreeNathji #ShriGusainji #Vrindavandham
#ShreenathjiVarta #ShriGovardhannathji

24131016_1962262550455728_8920603100393313216_n

Be aware if you are taking Gelatin capsules

Vegetarians please be aware before you pop that capsule:

Vegetarian people please read this post and be aware:

अगर आप शाकाहारी हैं तो इस पोस्ट को कृपा करके पढ़िए 🙏

बहुत सारे डॉक्टर आपको बेवक़ूफ़ बनाते हैं; माँसाहारी (non – vegetarian) दवाई दे रहे हैं जानकारी नहीं देते हैं।

Gelatine Capsules come as hard gel or soft gel, origin is always Beef or pork.

जेलेटिन (Gelatin) से बहुत सारे कैपसूल (capsule) बनते हैं। जेलेटिन सिर्फ़ और सिर्फ़ गाय और सूवर की हड्डी और चमड़ी से बनते हैं। इसमें hardgel और soft gel के कैपसूल आते हैं।

Allopathy हो या आयुर्वेद, उस कैपसूल में भले ही अंदर बहुत अच्छे शाकाहारी (vegetarian) पाउडर से भरे हों, ये पूर्ण तरह से माँसाहारी ( non-vegetarian) होते हैं।

मुझे भी एक आयुर्वेदिक डॉक्टर ने पाँच दवाई दी,जिन पर gelatine origin लिखा है। मुझे जानकारी थी की जेलेटिन गाय या सूवर की हड्डी से ही बनता है। किंतु doctor से ये बात सीधे पूछने पर भी उसने कहा की कहीं माँसाहारी नहीं लिखा है, आपको दवाई समझ कर खा लेना चाहिए।

तो फिर मैंने इन चार Ayurvedic कम्पनी से सीधी पूछताछ से confirm करा की उनके capsule गाय और सूवर से ही बने हैं।

मैंने अपना फ़र्ज़ समझ कर ये पोस्ट लिखी है, शायद किसी और के काम आ जाए – आप share भी करें।

Proof के तौर पर मेरे पास उन कम्पनी के mail भी हैं।

आप वैष्णव शाकाहारी हैं तो किसी भी दवाई लेने से पहले ज़रूर जाँच कर ले, उस पर अगर gelatine लिखा है तो वह माँसाहारी ही है। जो vegetarian capsule हैं उन पर लिखा होता है

If it is a vegetarian capsule it is always mentioned in the pack.

कम्पनी से:

Our two-piece hard-shell gelatin capsules (powder filled) are typically made of a combination of beef (bovine) and pork (porcine) gelatins. By contrast, our softgel (liquid filled) gelatin capsules are typically derived solely from beef gelatin, not pork.

(All come from Bovine sources)

अपने शुद्धि का ध्यान रखें 🙏

Indr Sarovar-Udaipur

Sacred Lotus Pond – Kamal Kunj at sacred Indr Sarovar, #Eklingi, Udaipur; Near Nathdwara.

Lotus from here are used for ShreeNathji Shringar at Nathdwara mandir. #ShreeNathji Thakureje normally wears Kamal on His waist, the number depending o the type of Shringar on that particular day.

An album of 34 photos from this day; at sacred Indr Sarovar, month of June.

#Indrsarovar #ShreeNathji #Nathdwara #Eklingjimandir

untitled-07083

untitled-07034

untitled-06874

untitled-07030

untitled-06950

untitled-06932

untitled-06815

untitled-06892

DSC07013

DSC06933

untitled-1843

untitled-1842

untitled-07049

untitled-07046

untitled-07040

untitled-07068

untitled-07052

DSC07031

untitled-06893

untitled-06895

untitled-06812

untitled-07031

DSC06872

untitled-06858

untitled-06870

untitled-06958

untitled-06798

DSC06894

DSC06921

DSC07037

DSC07084

untitled-06858

untitled-06793

 

1-18

ShreeNathji wearing four Lotus

 

Do not create picnic spots at Vrindavan

श्री राधा कृष्ण श्रीनाथजी की पवित्र लीला भूमि, व्रज मंडल को टुरिस्ट स्पॉट बना कर और नष्ट मत करीए 🙏

#CMOyogi आपसे निवेदन है सभी व्रज प्रेमियों का, पहले संरक्षण (preservation) और मरम्मत (restoration) के लिए funds दीजिए। नए विकास (development) की यहाँ जगह और ज़रूरत इस समय नहीं है 🙏

– first step towards responsibility for Vraj Mandal is preservation and restoration of what is left.

(Several things are already beyond repair).

If nothing is done even today for preservation, Vraj will be in a crisis situation.

The point of no return😢

CM YOGI COMING TO VRINDAVAN TO INAUGURATE THE BIGGEST PARK IN INDIA😥 Our plea to this government who is spending multi crores to hide the sad state of Vraj.. ख़ुश होने की बात है? नहीं!!

The crores and crores they sign on papers need to be used for preservation first. If preserved there will be no need to create anything new. Vraj Mandal cannot be marked as a tourist spot.

It’s excellent that the present government is giving any thought to re development of Vraj.

Sadly this re development will not work till preservation and restoration is given priority.

One just has to take a walk on Vrindavan Parikrama marg to see the degradation of this pavitra Dham.

– We first need to vacate the encroachment on the marg and make a walkway at Shri Yamunaji. From where bhakts can access the pavitr leela sthals of Shree RadhaKrishn.

– Removing the monkey menace is the second step in taking care of our pavitr Dham. All peacocks are being driven away by this menace and bhakts walk in fear.

– Pigs have entered every sacred sthal, including at Shri Govardhan. Which need to be removed ASAP. Five years ago none were there.

Someone is trying to destroy the pavitrata of Hindu teerths.

– Entire Chatikara pavements have already been taken over by the illegal hawkers.

– The Nagar Palika and Police force should become accountable.

The people in power never see the REAL VRAJ PROBLEMS. As every thing is cleared and cleaned at the areas where they visit.

In olden days the Raja and Maharajas walked around their cities in disguise to SEE THE REAL STATE OF THEIR LAND.

Wonder what Vraj Mandal we are leaving for our children and grandchildren.

They will only be able to see the original reality in some photos or videos which bhakts may have uploaded.

And Girirajji Govardhan is in the worst of state today.

All just TAKE..TAKE..TAKE.

May the present government see the truth of their actions.

The crores and crores they sign on papers need to be used for preservation and restoration first. If preserved there will be no need to create anything new.

The old and ancient pavitrata if returned to Vraj Mandal will be enough for the higher divine shaktis.

OR ELSE THESE SHAKTIS WILL NO LONGER BE AROUND.

दिव्य शक्तियों को साफ़, सुथरा पवित्र वातावरण चाहिए.

नहीं तो वह दिन दूर नहीं, की वे सब भूतल में गहरी उतर जाएँगी और हम हाथ मलते रह जाएँगे, अपने दुर्भाग्य पर। हमारे बच्चों को दर्शन का लाभ नहीं मिल पाएगा, और हम सब इसके ज़िम्मेदार होंगे।

जय श्रीनाथजी, जय श्री राधा कृष्ण

कृपा करें, सदबुद्धि दें,

आभा शाहरा श्यामा

#vrajmandal #cmyogi # savevraj #savegovardhan #saveyamuna #utterpradeshgoverment #adityanathyogi #primeministeroffice #savevrindavan #pmoindia #cmoyogi

Vraj Mandal belong to Shree RadhaKrishn-ShreeNathji, and we are doing our best to destroy Their divine land

Stop using leather if you are a Vaishnav

For all Vaishnavs, “Do you do seva of Shree Thakurjee  and  Gaumata”

Then stop using leather

सभी वैष्णव के लिए; “श्री ठाकुरजी और गौमता की सेवा और पूजन करते हैं?”

चमड़ा इस्तेमाल करना बंद कीजिए

The Indian Vedic Cow, known as gaumata is the original Cow about which is spoken in all our scriptures.

Hinduism has no place for cruelty to animals and eating of corpses. Humanity does not propagate farming of animals for human consumption.

Our environment needs to be purified; as well as our human body, to enable any rise in consciousness within ourself or on Earth vibration level.

गौमता

सभी वैष्णव के लिए; “गौमता की सेवा और पूजन करते हैं?”

श्रीनाथजी हवेली नाथद्वारा के बाहर लिखा रहता है;

चमड़ा पहन कर भीतर नहीं जायें

कभी सोचा है क्यों?Abha Shahra

ShreeNathji Haveli at Nathdwara

ShreeNathji Haveli main entrance at Nathdwara – where it is written; to remove leather belts before entering the premises

चमड़ा किसी मरे हुए जानवर की खाल है। ठाकुरजी के शुद्धि नियम अनुसार इससे अशुद्धि होती है।

हमारा शरीर जब मरे हुए जानवर की खाल पहनता है या उपयोग में लेता है, तो अशुद्धि में होता है।

दूसरी सच्चाई यह है की अधिकतम चमड़ा गौमाता से बनाया हुआ होता है।

हम अगर वैष्णव हिंदू हैं तो ज़रूर गाय की सेवा और पूजा करते हैं।

फिर हम उसी मरी हुई गाय की वस्तु का इस्तेमाल करते हैं।

गौ की सेवा, श्रीनाथजी की सेवा, श्री राधा कृष्ण की सेवा, पूजा करते हैं, और दूसरी तरफ़, उन्ही की गौमता (या अन्य जानवर) को मारकर बनाई हुई वस्तु का इस्तेमाल भी करते हैं?

यह सच्चाई हमारे धर्म और भक्ति से जुडी है.

दूसरी सच्चाई, अगर इंसानियत के अनुसार देखें; की किस तरह से गौमता (या कोई भी जानवर) को तड़पाकर यह चमड़ा निकालते हैं, तो आपकी आत्मा भी काँप जाएगी.

जितनी कोमल गाय का बछड़ा, उतनी क़ीमती उसकी खाल होती है.Abha Shahra

Young calves are used to make the most expensive leather products

Young calves are used for making the most expensive leather products

आप चाहें तोयूटूब (U Tube)’ पर गाय से उसकी खाल निकलना और उससे वस्तु कैसे बनती है; उसका प्रॉसेस देख सकते हैं।

(लिंक देने की ज़रूरत नहीं समझती हूँ, क्योंकि बहुत आसानी से आप ढूँढ सकते हैं)

१४ साल पहले जब सत्य मैंने समझा, तभी से चमड़े की बनी वस्तुएं का इस्तेमाल बंद कर दिया है. इसके पहले मुझे भी बहुत शौक था चमड़े के डिज़ाइनर बैग और जूते चप्पल पहनने का.

आज बाजार में अच्छी क्वालिटी चमड़ा रहित चप्पल, जूते, पर्स, वॉलेट, बेल्ट, सोफ़ा, कुर्सी आदि मिलने लगे हैं.

चमड़े का इस्तेमाल बंद करके हम चाहें तो अपने जीवन में शुद्धि बढ़ा सकते हैं.

जब शारीरिक शुद्धि बढ़ेगी तो भाव शुद्धि में भी बढौती होगी.

भाव शुद्धि जितनी बढ़ेगी, हम उतना ज्यादा ठाकुरजी के करीब अपने आपको पाएंगे.untitled-11-2


हम इतने अंधकार में कैसे जी सकते हैं?

जय हो प्रभु किहमें सदबुद्धि मिले

ठाकुरजी, श्रीनाथजी बाबा की जय हो!

(अगर आप इस बात से सहमत हैं, तो कृपया पोस्ट को शेयर करिये.

मेरा अनुभव है की ज्यादातर लोग बहुत बार बिना सोचे समझे कुछ करते रहते हैं; जैसे की चमड़े का इस्तेमाल करना.

बहुत से लोग इस्तेमाल कर रहे है क्योंकि सच्चाई को कभी ध्यान नहीं दिया.

इन वैष्णव की आँख खुलने के बाद शायद चमड़ा इस्तेमाल बंद कर दें. उनकी मदद करिये).

धन्यवाद आप सभी को, जय श्रीकृष्ण!

(किसी ने कामेंट्स में पूछा की मैंने सिर्फ़ गौमता क्यों लिखा, सभी जानवर की खाल से वस्तु बनती है, उसका जवाब मेरी समझ में:

इस पोस्ट में दो बातें हैं.

पहली, की जो माँसाहारी हैं, उनका भोजन ही जानवर से बनता है, इसलिए वे ऊपर से शरीर पर कुछ भी पहने, एक ही बात है.

तो अगर मैं उनसे कहूँ की आप चमड़ा नहीं पहनिए, तो ना इंसाफ़ी होगी, क्योंकि जो भोजन वे करते है, उसे पहनने में कुछ ग़लत नहीं है.

सभी जानवर की खाल से चमड़ा बनता है, क्रूरता से, लेकिन माँसाहारी भोजन भी इतनी ही क्रूरता से बनता है;

तो जब तक आप शाकाहारी नहीं होते, कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, की आप क्या पहनते हैं; और मैंने यह पोस्ट माँसाहारी इंसान को शाकाहारी बनानेके लिए नहीं लिखी.

दूसरी बात, जो भक्ति मार्ग से जुड़े हैं, वे वैष्णव कहलाते हैं, ठाकुरजी की सेवा करते हैं, और भक्ति में सात्त्विक भोजन ज़रूरी होता है. तो इन भक्तों को माँसाहारी नहीं होना चाहिए.

और अगर आप माँसाहारी नहीं हैं तो फिर चमड़ा मत पहनिए; इस पोस्ट का मेसिज यह है.

ठाकुरजी श्रीनाथजी, श्री राधा कृष्ण की सेवा और पूजन में गौ ज़रूरी है.

7-17

इसलिए उन भक्तों की आँख खोलने के लिए लिखा है,

अगर आप शाकाहारी हैं, भक्ति में हैं, तो चमड़ा शरीर पर धारण मत कीजिए.

बाक़ी सभी जानवर को क्रूरता से बचाना ज़रूरी है, वह कोई और पोस्ट में लिखूँगी)

धन्यवाद. 🙏

#gaumata #abhashahra #stopleatheruse #crueltytoanimals #shreenathjihaveli #deadanimals #peta #cowleather #hinduism #eatingcorpse #vediccow

Website in ShreeNathji, Shree RadhaKrishn seva

Website in ShreeNathji, Shree RadhaKrishn seva

SHREENATHJI..ONLY SHREENATHJI

श्रीनाथजी ठाकुरजी की वेब्सायट :
SHREENATHJI THAKURJEE website in His seva

http://www.shreenathjibhakti.org

The website made only in ShreeNathji seva initially in 2008, is now updated and available to all bhakts.

श्री ठाकुरजी श्रीनाथजी की सेवा में बनी यह website २००८ में बनी, अब अप्डेट होकर भक्तों के लिए उपलब्ध है।

Screen Shot 2018-07-09 at 1.12.04 PM 

This website is extraordinary, the content available here will not be found anywhere else, few topics:
यह वेब्सायट अपूर्व है, यहाँ आप जो जानकारी पाएँगे और कहीं नहीं मिलेगी; कुछ प्रसंग:

ShreeNathji swarup is the combined merged swarup of Shree RadhaKrishn
श्रीनाथजी स्वरूप में श्री राधा कृष्ण समाए हुए हैं

Is ShreeNathji awake in our world and continues His divine Play with bhakts?
Leela as described in the ancient granths 84 Vaishnavs and 252 Vaishnavs ke varta; are they a part of few bhakts LIVE INTERACTIONS with Shree Thakurjee today?
क्या श्रीनाथजी एक बार फिर हमारे बीच खेल कर रहे हैं?
क्या ८४ वैष्णव, २५२ वैष्णव वार्ता जैसी कृपा आज एक बार फिर ठाकुरजी अपने भक्तों पर बरसा रहे हैं?

IMG_2293IMG_2292

Is ShreeNathji Thakurjee soon returning to Vraj? Where is it written that ShreeNathji will be back at Girirajji?
ठाकुरजी क्या नाथद्वारा हवेली से गिरिराज गोवर्धन वापिस पधार रहे हैं?
कहाँ लिखा है की श्रीनाथजी वापस व्रज लौटेंगे?

40-4

How did ShreeNathji bless us with His Sakshatkar darshans through His Mukharwind at Shri Govardhan; Read in ShreeNathji’s own words why did He granted darshans?
श्रीनाथजी के साक्षात्कार उनके मुखारविंद से कैसे हुए? क्यों हुए, उन्हीं के मधुर अन्दाज़ में समझें।

IMG_3003

Giriraj Govardhan complete history with ShreeNathji Pragaty varta in english and hindi
गिरिराज गोवर्धन पृथ्वी पर कैसे विराजमान हुए?

What is the bhao of 8 Sama darshans at Nathdwara. What is the plan of ShreeNathji Haveli?
नाथद्वारा में आठ समा के दर्शन के भाव क्या हैं? नाथद्वारा हवेली का नक़्शा कैसा है?

44-4

ShreeNathji Gaushala details at Nathdwara with several photos and videos
श्रीनाथजी गौशला का विवरण, फ़ोटो और विडीओ के साथ

0-2

What was the route of ShreeNathji yatra to Nathdwara from Girirajji?

श्रीनाथजी की यात्रा व्रज से नाथद्वारा कहाँ, कहाँ से गुज़री?

19-10

Why did Thakurjee have to leave Shri Govardhan and stay at Nathdwara for hundreds of years?
क्यों प्रभु को गिरिराज्जि छोड़ कर नाथद्वारा इतने वर्ष रहना पड़ा?

28-6

What is the correct form of bhakti?
सही भक्ति कैसे करनी चाहिए?
How did Shree Hari manifest Golok?
श्री हरी ने गोलोक का प्रगट्य कैसे करा?

3-3

Shri Govardhan – Punchri end, South side

Many such questions are answered here; with an extensive extraordinary photo gallery, on this website
ऐसे बहुत से सवाल, जवाब; आश्चर्य चकित करने वाली फ़ोटो गैलरी, इस वेब्सायट पर

ShreeNathji Haveli at Nathdwara

Dhanyawad
Warm regards and shubh aashish, S Prem,
ShreeNathji ke seva mein
Abha Shahra Shyama
Jai Shreeji!
Shreeji Ki Jai Ho!

 

Shri Gusainji Baithakji at Chandra Sarovar

Shri Gusainji Baithakji at Chandra Sarovar is called the Viprayog baithakji. It is the 6th Baithakji.

For six months Shri Gusainji has to stay here away from ShreeNathji.

ShreeNathji Mandir in Shri Govardhan is also visible from here.

You can hear details of this ShreeNathji varta from the present mukhiyaji in this video below.

ShreeNathji Mandir on Shri Govardhan is visible from here

View of ShreeNathji Mandir on Shri Govardhan from this Baithakji

Shri Gusainji Viprayog Baithakji at Chandra Sarovar

ShreeNathji was very attached to Shri Gusainji

Jai ShreeNathji Prabhu 🙏