ShreeNathji-Return to Vraj

                                                                                           “Jai ho ShreeNathji”
When You return to Vraj very soon, this is what Girirajji will feel like.

Your Dhajaji will fly on Shri Govardhan, though unseen to the world. Visible only to Your chosen bhakts.


Your Presence will again bring to life the dormant urjas and vibrations of several hundred years ago.

 ।। श्री गोवर्धननाथ स्योद्धववार्ता ।।
अर्थात्
।। श्रीनाथजी की प्राकट्य वार्ता ।।

यह ३ वाक़या जो इस पोस्ट में लिखे हैं, श्रीनाथजी की प्राचीन पुस्तक से लिए हैं.

तीन जगह उल्ल्लेख है की श्रीनाथजी व्रज जल्द ही पधारने वाले हैं. 
हो सकता है की श्रीजी ने इसके लिए पूर्ण तय्यारी भी कर ली होगी, अपने किसी भक्त और सेवक के साथ.

जय हो श्रीजी, जय श्री गोवर्धननाथजी
आपकी

आभा शाहरा श्यामॉ

कुछ भूल हुई तो क्षमा करिए
श्रीनाथजी के बहुत से नटखट दिव्य खेल और लीला 
”आज के वक़्त में”, 
इस लिंक पर पढ़ सकते हैं:

http://www.shreenathjibhakti.org

 

We all wait to welcome YOU SHREEJI, back to YOUR ORIGINAL DHAM AND YOUR REAL HOME:
“SHRI GIRIRAJ GOVARDHAN”.
YOU TOO MUST HAVE MISSED BEING HERE WITH YOUR BELOVED CHOSEN BHAKTS AND SHAKTIS.

ShreeNathji as a Jyotish Acharya-“Live Varta”

ShreeNathji Thakurjee:Live interaction varta in today’s time period

(This post is in hindi)
१०.११.२०१७; वृंदावन धाम

‘श्रीनाथजी की एक खेल वार्ता ज्योतिष शास्त्र पर, श्री गुसाँईजी के साथ’
आज के स्वप्न में:

श्रीनाथजी का दिव्य विवरण उनके ही मधुर शब्द, मैंने कोशिश करी है पूर्णता से वही रखने की।
Narration by ShreeNathji Himself:

श्रीजी कहते हैं, “चलो आभा शाहरा श्यामॉ आज कुछ अच्छा बताता हूँ तुझे, सुनेगी क्या?”

आभा, “ ज़रूर श्रीजी, हमें तो हमेशा उत्सुकता रहती है, कुछ नया सुनने की। बताने की कृपा करें“🙏

श्रीजी, “सुन तो; एक दिन गुसाँईजी के साथ कुछ खेल करने का मन हुआ। मैं उसके पास गया और अपना पैर दिखा कर बोला; ‘ गुसाँई जी ये देखो मेरे पैर में चोट आइ है, ज़रा पंचांग देख कर बताओ ऐसा कौन सा समय था की मुझे आज चोट लगी’
मेरी चोट तो बहुत ही छोटी सी थी, लेकिन मैंने दिखाने के वक़्त उसे इतना बड़ा कर के दिखाया, हा हा।
(गुसाँई जी से मस्ती करनी थी। वो ज्योतिष shashtr के बहुत बड़े जानकार थे और ज्ञानी भी);
‘हाँ तो बताओ कौन सा ख़राब महूरत था जब मुझे लगी?’

गुसाँई जी ने चोट देखी और गर्दन हिला कर कहा, “ हाँ बाबा चोट तो लगी है, किंतु महूरत देखने के लिए ज़रा मुझे बताइए किस ‘समय’ चोट लगी थी. उस ‘समय’ के अनुसार मैं पंचांग देखता हूँ”।

अब मैं तो चुप; मुझे तो याद भी नहीं था और कोई ऐसी चोट भी नहीं थी, क्या करूँ? सोचता था।
तो मैं ने गुसाँईजी से कहा, ‘मैं ज़रा सोचता हूँ, थोड़ा वक़्त दो’;
और भागा ‘मेरा पंचांग’ देखने के लिए। क्योंकि अगर मैं कोई भी समय बता देता और वह ‘चल लाभ अम्रत’ का महूरत होता तो मैं पकड़ा जाता। इसलिए मैं देखने भागा की कौन से ‘समय’ में ‘काल, राहु काल,’ था उस दिन।
और मेरी प्रतिकृति उनके सामने बिठा दी, जिस से उनको लगे मैं सामने बैठा सोच रहा हूँ।

पंचांग जल्दी जल्दी देख कर वापस आया, ‘ हाँ मुझे याद आ गया, … इस समय लगी थी, अब जल्दी से देखो और बताओ’।
गुसाँई जी देखते हैं और कहते हैं, ‘हाँ बाबा यह तो राहु काल का समय था; किंतु इस समय अगर लगी है तो यह जल्दी ठीक होने वाली नहीं है, ये तो अब और फूल कर इतना बड़ा हो जाएगा’।
मैं तो फँस गया, अब क्या करूँ? मैंसोचता हूँ की शायद से गुसाँई जी ने मुझे पकड़ लिया है।
इतने में वो बोलता है, ‘श्रीजी ऐसा करो, एक बार फिर से सोचो सही समय क्या था, हो सकता है ग़लत याद आया हो’।
मैं ख़ुश हो गया, ‘हाँ हाँ ज़रूर हो सकता है मेरे याद करने में कुछ ग़लत हो गया हो, में फिर से याद करता हूँ’।
मुझे मेरी बात ठीक करने की जगह मिल गयी, मैं फिर भागा और पंचांग देखा की ‘चल,लाभ,अम्रत’ कब का है।

और आ कर वो समय बता दिया। ‘गुसाँई जी याद आ गया, … ये समय था, शायद पहली बार ग़लत बता दिया था’।
उसने पंचांग देखकर बताया, ‘चलो श्रीजी बच गए, ‘चल’ में लगी थी चोट तो चलता है कोई चिंता की बात नहीं है, क्योंकि चल के बाद लाभ है और लाभ के बाद अम्रत और शुभ है, तो सुबह तक बिलकुल ठीक हो जाएगी, आप खेलिए’।
तो फिर मेरी चोट को मैं ने जल्दी से छोटा कर दिया और ग़ायब हो गयी।

गुसाँई जी मेरी मस्ती खेल पकड़ लेते थे किंतु हमेशा मुझे रास्ते भी बता देते थे।

मुझे भी आता है पंचांग देखना, हाँ … नक्षत्र, होरा, महूरत सब देखना आता है मुझे, भले ही पाठशाला में पढ़ने नहीं गया.. हा हा हा।

और गुसाँई जी के पुत्र गोकुल नाथ ने तो ज्योतिष शास्त्र आधारित ‘ वाचनामृत कोठा’ की रचना की थी।

गुसाँईजी मेरे बहुत ही प्रिय थे; हम लोग ऐसे ही खेलते थे।
सब को ख़ुशी बाँटनी चाहिए, इस लिए सब को सुनाना।

जय हो प्रभु 🙏
आपकी लीला और खेल बहुत आनंद प्रदान करते हैं

श्रीनाथजी की जय हो!
हमेशा आपकी भक्ति में

#ShreeNathji #ShriGusainji #Vrindavandham
#ShreenathjiVarta #ShriGovardhannathji

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Website in ShreeNathji, Shree RadhaKrishn seva

Website in ShreeNathji, Shree RadhaKrishn seva

SHREENATHJI..ONLY SHREENATHJI

श्रीनाथजी ठाकुरजी की वेब्सायट :
SHREENATHJI THAKURJEE website in His seva

http://www.shreenathjibhakti.org

The website made only in ShreeNathji seva initially in 2008, is now updated and available to all bhakts.

श्री ठाकुरजी श्रीनाथजी की सेवा में बनी यह website २००८ में बनी, अब अप्डेट होकर भक्तों के लिए उपलब्ध है।

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This website is extraordinary, the content available here will not be found anywhere else, few topics:
यह वेब्सायट अपूर्व है, यहाँ आप जो जानकारी पाएँगे और कहीं नहीं मिलेगी; कुछ प्रसंग:

ShreeNathji swarup is the combined merged swarup of Shree RadhaKrishn
श्रीनाथजी स्वरूप में श्री राधा कृष्ण समाए हुए हैं

Is ShreeNathji awake in our world and continues His divine Play with bhakts?
Leela as described in the ancient granths 84 Vaishnavs and 252 Vaishnavs ke varta; are they a part of few bhakts LIVE INTERACTIONS with Shree Thakurjee today?
क्या श्रीनाथजी एक बार फिर हमारे बीच खेल कर रहे हैं?
क्या ८४ वैष्णव, २५२ वैष्णव वार्ता जैसी कृपा आज एक बार फिर ठाकुरजी अपने भक्तों पर बरसा रहे हैं?

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Is ShreeNathji Thakurjee soon returning to Vraj? Where is it written that ShreeNathji will be back at Girirajji?
ठाकुरजी क्या नाथद्वारा हवेली से गिरिराज गोवर्धन वापिस पधार रहे हैं?
कहाँ लिखा है की श्रीनाथजी वापस व्रज लौटेंगे?

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How did ShreeNathji bless us with His Sakshatkar darshans through His Mukharwind at Shri Govardhan; Read in ShreeNathji’s own words why did He granted darshans?
श्रीनाथजी के साक्षात्कार उनके मुखारविंद से कैसे हुए? क्यों हुए, उन्हीं के मधुर अन्दाज़ में समझें।

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Giriraj Govardhan complete history with ShreeNathji Pragaty varta in english and hindi
गिरिराज गोवर्धन पृथ्वी पर कैसे विराजमान हुए?

What is the bhao of 8 Sama darshans at Nathdwara. What is the plan of ShreeNathji Haveli?
नाथद्वारा में आठ समा के दर्शन के भाव क्या हैं? नाथद्वारा हवेली का नक़्शा कैसा है?

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ShreeNathji Gaushala details at Nathdwara with several photos and videos
श्रीनाथजी गौशला का विवरण, फ़ोटो और विडीओ के साथ

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What was the route of ShreeNathji yatra to Nathdwara from Girirajji?

श्रीनाथजी की यात्रा व्रज से नाथद्वारा कहाँ, कहाँ से गुज़री?

19-10

Why did Thakurjee have to leave Shri Govardhan and stay at Nathdwara for hundreds of years?
क्यों प्रभु को गिरिराज्जि छोड़ कर नाथद्वारा इतने वर्ष रहना पड़ा?

28-6

What is the correct form of bhakti?
सही भक्ति कैसे करनी चाहिए?
How did Shree Hari manifest Golok?
श्री हरी ने गोलोक का प्रगट्य कैसे करा?

3-3

Shri Govardhan – Punchri end, South side

Many such questions are answered here; with an extensive extraordinary photo gallery, on this website
ऐसे बहुत से सवाल, जवाब; आश्चर्य चकित करने वाली फ़ोटो गैलरी, इस वेब्सायट पर

ShreeNathji Haveli at Nathdwara

Dhanyawad
Warm regards and shubh aashish, S Prem,
ShreeNathji ke seva mein
Abha Shahra Shyama
Jai Shreeji!
Shreeji Ki Jai Ho!

 

“ShreeNathji Sakshatkar darshans on Girirajji”

“ShreeNathji Sakshatkar darshans on Girirajji”: Prabhu ShreeNathji and Gurushree’s kripa

श्री ठाकुरजी के साक्षात दर्शन, उनके मुखारविंद, जतीपुरा में; आज से ठीक १३ साल पहले; ऐसी कृपा की कोई और मिसाल नहीं है।

दर्शन भी दिए और फ़ोटो भी लेने दिया; २०१४ में हमें आज्ञा भी दी सभी वैष्णव के साथ शेर करने की: क्या ऐसा कभी पहले हुआ है?

This divine leela happened 13 years ago on the auspicious day of 9th June 2005, at ShreeNathji Mukharwind, Giriraj Govardhan, Jatipura, with kripa of Gurushree Sudhir bhai; and only because of his close sakha bhav with prabhu ShreeNathji.

We all wonder what Shree Prabhu looks like!

The only True photo of ShreeNathji, Shree GovardhanNathji, Shree Thakurjee, Shree Dev Daman: In His Child Swarup.

Please take a moment and see for yourself in the photo above, just below the point where I am applying tilak; complete Face of Shree Thakurjee is visible as this (white) Ujjaval Urja (energy). This divine face Appeared for the duration of my pujan and Gurushree clicked the photos. The mukut, mor pankh, tilak, earrings, long black hair, both palms holding His own face and watching me do pujan, is ShreeNathji giving darshans of His Lalan swarup.

(Just for the record: it is not photoshopped, nor tampered in any way.

Details can be read on our website: http://www.govardhan.org.in

Given to us and ordered to share with His bhakts all over the world.

Thank you Prabhu for this kripa on all Your bhakts.

ShreeNathji Sakshatkar photo

ShreeNathji Sakshatkar from His Mukharvind

Jai ShreeNathji

ShreeNathji Haveli श्रीनाथजी हवेली

(This post is about ShreeNathji Haveli at Nathdwara. It is a dialogue between Thakurjee ShreeNathji and this humble bhakt Abha Shahra, where He describes the facts which have caused Him to be upset and sad. Similar to the other Live interactions,this too is a divine writing)

श्रीनाथजी आज ग़ुस्से में बहुत सी शिकायत करते हैं.. श्रीजी, “देख, देख, मेरी हवेली की क्या हालत करी है इन लोगों ने. तोड़ फोड़ के रख दिया है, आभा शाहरा श्यामॉ..”
ShreeNathji – His “LIVE” interactions varta in today’s time period.

नवरात्रि चल रही है. श्रीनाथजी दर्शन के लिए हम नाथद्वारा आए हैं.

और जैसे की हमारा नियम है, सुबह शंखनाद के पहले श्रीजी के दरवाज़े के बाहर खड़े होते हैं. हम सुबह ४.१५ बजे मंगला दर्शन के लिए पीछे के द्वार ‘प्रीतम पोली’ के बाहर खड़े हैं.


श्रीजी हमारे साथ हैं और यहीं खड़े हैं, “देख, देख, मेरी हवेली की क्या हालत करी है इन लोगों ने. तोड़ फोड़ के रख दिया है. अंदर और बाहर से ठीक करने के नाम पे सब तोड़ दिया, फिर ऐसे ही छोड़ दिया. आभा शाहरा श्यामॉ, बाद में तेरा फ़ोन लेकर आना और दो चार फ़ोटू लेकर छाप देना. लिखना की श्रीजी बहुत नाराज़ हैं, क्या मालूम कब किसको सज़ा देंगे.”


“मैं नाथद्वारा छोड़कर निकलने वाला तो हूँ, मैंने बहुत दया दिखा के इतने समय से माफ़ करता रहा. लेकिन यह लोग समझने को तय्यार ही नहीं है. देश के बाहर जाकर पेंसिलवेनिया (Pensilvania) जैसी जगहों में बड़ी बड़ी हवेली बना रहे हैं ख़ुद के लिए और यहाँ जिस जगह “मैं” ख़ुद रहता हूँ उसे तोड़ फोड़ कर रख दिया है”.

(बहुत समय से यहाँ के अधिकारियों ने हवेली की दीवार तोड़ कर रखी है, आगे के द्वार पर और यहाँ पीछे के द्वार पर भी. यहाँ से अन्दर भी जब जाते हैं, तो पूरा रास्ता टूटा हुआ है, ऐसा लगता है हमेशा मुझे की यहाँ श्रीजी की किसी को फ़िक्र ही नहीं है. लोगों ने इसी बाहर की दीवार पर पान के छींटे भी थूके हैं.

कभी भी इस दीवार या दरवाज़े की सफ़ाई नहीं होती है. पुरानी सुखी माला यूँ ही टँगी हुई हैं. एक बहुत बड़ी बिल्डिंग हवेली से लगकर बना रहे हैं, लेकिन ना वो पूर्ण हुई, ना श्रीनाथजी की हवेली की मरम्मत करी गयी.

ईश्वर, ठाकुरजी का जहाँ साक्षात निवास है, मेरे लिए यह देखना हर बार, एक बहुत ही दुखदायक नज़ारा है.

ख़ुदगर्ज़ी ने सबकी आँख पर यह कैसा लालच का पर्दा डाल दिया है?

तिलकायत हों, बालक हों, सेवक हों, भक्त हों, या रक्षक हों, सभी श्रीजी को लूटने पर तुले हैं, यह सच्चाई बहुत ही अच्छी तरह बार बार श्रीनाथजी ठाकुरजी हमें अक्सर बताते है).


श्रीजी आगे कहते हैं, “और तूने भी देखा होगा, अंदर मेरे सेवक लोग जो “मेरा” काम करते हैं, कैसे हर समय अपने मुँह में गुटका और तम्बाकू चबाते हैं. ऐसे कोई सेवा करता है क्या? मंदिर के अधिकारी और बावाश्री भी अनदेखा करते हैं. पवित्रता कहाँ है”?

श्रीजी आदेश देते हैं, “आभा शाहरा श्यामॉ, तू जब मेरी हवेली के दरवाज़े का फ़ोटू लेगी तो साथ में मेरे दर्शन समय के बोर्ड का भी लेना. देख, मुझे इन लोगों ने बाँध दिया समय के लिए. मेरे गुसाँईजी ने मेरी सुविधा के लिए हमेशा १५ मिनट का समय रखा था, दर्शन खुलने में. इसलिए की कभी भी मैं अगर बाहर घूमने निकल गया तो मुझे १५ मिनट का समय मिले मंदिर वापस आने के लिए. अब मैं क्या करूँगा”?
( दर्शन के समय हमेशा से १५ मिनट के दायरे में होते थे, जैसे की; ५-५.१५, ७.१५-७.३०, ३.३०-३-४५. कभी भी एक बँधा समय नहीं होता था. जो नाथद्वारा जाते रहते हैं, उन्हें यह मालूम होना चाहिए. श्रीजी को हमेशा से १५ मिनट का समय दिया जाता है मंदिर वापस पधारने के लिए. यह नियम श्री गुसाँई जी ने शुरू करा था, श्रीजी की सुविधा के लिए. भाव है की अगर श्रीजी कहीं खेलने गए हों तो उन्हें श्रम ना हो भाग कर मंदिर वापिस आने के लिए, श्रीनाथजी प्राकट्य वार्ता में इस का ज़िक्र आता है).


आज्ञा अनुसार मैंने फ़ोटो ले लिए. फिर आगे मुख्य द्वार, लाल दरवाज़े पर भी गए, वहाँ भी बोर्ड पर दर्शन समय बाँध दिया था. और यहाँ भी परिसर कितनी ख़राब हालत में है, यह सभी भक्त जानते हैं.

कुछ फ़ोटो इस पोस्ट के साथ रखी हैं, देखिए, सोचिए, समझने की कोशिश करिए.
हम लोग क्या वाक़ई में श्रीनाथजी की भक्ति और प्रेम करते हैं, या फिर सिर्फ़ अपनी ज़रूरत पूरी करने ठाकुरजी के मंदिर तक जाते हैं?

श्रीजी की सेवा में, उनकी आज्ञा से,

आभा शाहरा श्यामॉ

Imagine the most powerful divine Shakti SHREENATHJI “Lives” here. WHERE ARE THE AUTHORITIES WHO ARE SUPPOSED TO TAKE CARE OF THE HAVELI AND SHREENATHJI WHOM THE ENTIRE NATHDWARA BELONGS TO.

What would the earliest sevaks Shri Vallabh Acharya and Shri Gusainji have done to these sevaks who do seva with such impure bhao?

Jai Shree Krishn 🙏

An earlier photo from 2015, of the back gate, Pritam Polee

To read many more ShreeNathji’s “LIVE” interactions varta in today’s time period, please visit my face book page:

https://www.facebook.com/abhashahrashyama.

To view this post on my face book page so that all the comments can be read please click here or just visit my page on the above link.

ShreeNathji “Live Varta” at His Paat utsav

 ShreeNathji “Live Varta” at Paat utsav:

ShreeNathji Paat Utsav at Vrindavan, Vraj Mandal “Shreeji Nij Niwas”, Vrindavan 

16th February, 2016; Magh Sud Naum, SV 2072

.. As Shreeji told me later,

“मैं तेरे माथे पर आकर बैठ गया था, सुधीर ने छूट दी थी, की श्रीजी जो दर्शन देने हैं आपको, आज सभी को दे दो. मैं पूरे रूम में भाग रहा था, एक बार तेरी फ़्रेंड से टकरा भी गया था, उसको बोला जाग, जाग.

स्वस्तिक को सुधीर ने मेरे कपड़े से ढाक कर रखा था, जब कपड़ा उठाता था, तो मैं तेरे माथे पर से स्वस्तिक में कूद जाता था. और फुलों के बीच भागता था, किसी किसी का मेरा दर्शन एक छोटी लौ के रूप में हुआ होगा. फिर वापस तेरे माथे पर आकर आराम करता था. इसलिए मैं तुझे नहीं दिखता था, मैं तो तेरे ही माथे पर बैठा था, तुझे कैसे दिखूँगा हा हा हा”..

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“Shreeji Nij Niwas”, THE most sacred place.

Jai Shree Krishn to all readers. This seems like a long post, but do spend some time reading it, as it is a unique writing on the personal experiences of bhakts about ShreeNathji divine play with them. ShreeNathji does His leela similar to the 84 Vaishnavas, 252 Vaishnav ki varta, even today in our world. Thoughts as comments are very welcome.

Do share and spread the darshans. Thank you.

This post is in continuation from the post of 19 February 2016.

These are the personal experiences of people, written and expressed in their own words. 

As you read ahead, you will notice few things;

What they experienced when listening to the music with eyes shut ,

What each one saw in the Swastik darshans,

The different darshans each one had on my forehead.

This room transformed to the most sacred place where ShreeNathji was fully Present and made us all a part of His divine Play. All the while Gurushree was in full control of the happenings.

Gurushree, Abha, Ritesh; A selfie after we had completed our pujans

Gurushree, Abha, Ritesh; A selfie after we had completed our pujans

As Shreeji told me later, 

“मैं तेरे माथे पर आकर बैठ गया था, सुधीर ने छूट दी थी, की श्रीजी जो दर्शन देने हैं आपको, आज सभी को दे दो. मैं पूरे रूम में भाग रहा था, एक बार तेरी फ़्रेंड से टकरा भी गया था, उसको बोला जाग, जाग.

स्वस्तिक को सुधीर ने मेरे कपड़े से ढाक कर रखा था, जब कपड़ा उठाता था, तो मैं तेरे माथे पर से स्वस्तिक में कूद जाता था. और फुलों के बीच भागता था, किसी किसी का मेरा दर्शन एक छोटी लौ के रूप में हुआ होगा. फिर वापस तेरे माथे पर आकर आराम करता था. इसलिए मैं तुझे नहीं दिखता था, मैं तो तेरे ही माथे पर बैठा था, तुझे कैसे दिखूँगा हा हा हा”.

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“Shreeji Paat”; Shri Yamunaji in the background, The flower Swastik darshans are also visible, Pujan complete.

So here are the experiences all had, written in their own words:

My own experience: 

In the fifteen minutes as per Gurushree’s instructions, when each one was viewing my forehead, I had this incredible experience.

As the sacred formations started on my forehead, I felt my spine come alive. Extraordinary energy flow happened from the base to my forehead.

I felt shivers along the entire spine.

Uncontrollable tears flowed on my face for the entire time period.

Incredible feeling of humility entered me, as I felt myself become one with Shree Thakurjee.

I felt enveloped in a fantastic feeling of devotion and bhao.

Suganchandji Kochar:

१६.०२.२०१६ को श्रीजी के निज निवास में नियम पूर्वक सजावट में प्रवेश करते ही मन प्रसन्न हुवा. दीवाल पे विविध लीला के दर्शन हुए.

स्वयं श्रीनाथजी स्वस्तिक के फूल में बाल स्वरूप प्रगट होकर दर्शन पाकर हम धन्य हो गए.

स्वस्तिक के दर्शन में फूल हिल रहे है ऐसा महसूस हुवा.

ऐसी श्रीनाथजी की कृपा हमेशा बनी रहे.

तथा आभा जी के मुख पर स्वयं श्री कृष्ण भगवान के बाल स्वरूप में दर्शन की अनुभूति हुई.

हम अपने आज की अनुभूति से धन्य हुए.

Millie Kirpalani:

I was so excited to visit Shreeji Nij Nivas and experience HIS energies. I remember waiting outside in the corridor for my turn – my heart was beating so fast my body was trembling I could not contain my excitement and nervousness at the same time. Could not believe I was one of the few chosen ones to witness this and to be actually present in HIS rest house .Thank you Shreeji for the permission and invitation .

As I sat inside and admired the amazing Leelas painted on the walls I felt so peaceful like I was a part of it like I have been there.

When Guruji asked us to close our eyes and wait for our turn to come 1 by 1 to look at what was under the white cloth in HIS shrine I felt so heavy and lot of pressure on my bindi then I called to Shreeji and asked HIM to please visit me be with me play with me.

After my 30 second Darshans of the flower arrangement of Swastik in yellow flowers and rest in orange red which was under the white cloth I saw within my bindi a Swastik and Shree signs merging it was quite an amazing vision ..

Then I got into a play of hide n seek with Shreeji I was calling out to him and was visualising him playing amongst us and hiding behind all those sitting there.

Once Guruji started the music of birds chirping my bindi area started to tingle and I don’t know whether it was my imagination or a voice frm down the hotel but I clearly heard a childlike voice saying Tum Kaha Ho !! I started to tear up and searched for that voice again while the music was going on but that was it for that split second –

then Guruji asked us to open our eyes and look at Abha. I was still in the thought of that voice I could not see initially on Abhas forehead ..

Thought I saw Lord Krishna with a flowing garment but then I clearly saw the face of Shreeji on top of her bindi ….what a miracle…. When Guruji asked us to come close and have a look I could not see infact I saw an Om but when I went back to my sitting place I saw the face clearly again !

The entire experience of being there witnessing the image of Shreejis face on Abhas forehead and having my own personal play with Shreeji was out of this world/ body – I didn’t want to leave wanted to continue my games with Shreeji.

As I came back to my room my eyes and head were so heavy I just wanted to sleep.

Thru the day felt so happy and energetic.My kids commented on how fresh I looked and we’re smiling as I was still chanting Radhey Radhey Shyam Radhey at 11.30 pm .I also felt a lot of heat in my hands till night all at home commented on that .

So grateful to my Shreeji Guruji and Abha mini Guru for this amazing spiritual enlivening visit to Vrindavan – what feels like home.

Shreeji Ki Jai Ho

Manju Jhanjaria:

Jai Shree Krishn, abha let me thank you  that I am a part of your  spiritual journey, which  from the depth I enjoy every moment.

It was so beautiful that I was there even though it was a short visit, but as Gurushreeji said the Shreeji ke Icha ke bina kuch bhi nahi ho sakta; so I was there for a day.

The morning at theShreeji neej niwas was such a lovey experience the energy was so much that we could feel it by our thoughts. It was full of positive energy which we could see and feel it.

As I closed my eyes I could only see bal Gopal and His Mukut which was very prominent.

And I saw the same on your forehead.

On the flower swastika as soon as I saw, I saw ladoo Gopal with a Mukut which was so obvious and when I came and sat with eyes closed I could just see ladoo Gopal.

Even on your forehead I could clearly see the Mukut and tilak and Gopala. It was very clear. I couldn’t believe it how can it happen but again Shreeji can do anything.

And when my eyes were closed and as I was engrossed I felt that someone woke me up wth just a soft push. And I got up and then couldn’t concentrate as then mind was conscious.

But I believe that because of your true sacrifice and devotion this is happening.

Abha, it is all because of ur strength.

But really the strength I gained in one day I just cannot believe for myself. I am blessed to have you in my life.

My path of life will never be wrong or do anything wrong to anyone as Shreeji, Gurushreeji, and you will always be there to guide.

Radhe radhe. Jai Shree Krishn Abha .

Arunaji Kochar:

श्रीजी के निज निवास में प्रवेश करते ही एक अजीब सी प्रस्सन्नता, शांति, पवित्रता महसूस हुई.

जब गुरूजी ने वस्त्र हटाया तो स्वस्तिक के दर्शन हुवे.

बाद मे जंगल में बालगोपाल के साथ बैठे है ऐसा प्रतीत हुआ. पंच्छीयोकि मधुर आवाज, पानी का झरना बह रहा है, मानो वहाँ ४ घंटे भी बैठने मिलता तो भी समय का पता नहीं चलता. ऐसी अलोकिक शांति थी.

और आभा जी के माथे पर लालन के दर्शन हुए.

साक्षात् श्रीजी वहाँ थे और हमें दर्शन दिए ये अनुभूति वहाँ हुई.

ये अवसर बार बार आये, आप सभी की उपस्थित्ति में हम धन्य हो गए.

श्रीजी की जय हो

Ritu Kochar:

इस बार का अनुभव बहुत अद्भुत था।  रूम में जाकर मन बहुत शांत था,वहा आँखे बंद करके ,धुन सुनते हुए ऐसा लग रहा था की किसी वन में बैठी हूँ,पक्षियों की मधुर आवाज़,पेरो के नीचे एकदम ठंडा लग रहा था ऐसा महसूस हो रहा था जैसे नदी किनारे हूँ।

आभाजी के मस्तक पर बालस्वरुप मुकुटधारी श्रीजी का मुख (जैसा गोवर्धनपर दर्शन हुए थे) और उसके ऊपर स्वास्तिक के दर्शन हुए।

बहोत अलोकिक, अद्भुत और सुन्दर दर्शन थे ।आज भी वह दर्शन आँखों के सामने है।

श्रीजी,गुरुश्री और आभाजी आपको नतमस्तक प्रणाम ।।दर्शन स्वरुपआपका आशिर्वाद प्राप्त हुआ।।।

Sarvesh Shahra:

When we entered Shreeji nij niwas, the place felt serene and sacred. I had not entered the room in some years and felt very blessed and privileged to be invited by Shreeji again to His Niwas sthaan..

The energy levels and the divine presence were alive in the room on that day.

The Darshan was a very nice experience and although it was for a very short time, it was divine.

I saw some light form running on the flower swastik. Later mummy explained it was Shreeji Urja running in this Form.

I saw the Shree श्री darshan on mummy’s forehead, which I have seen many times earlier also.

Post the Darshan, I left the room and was advised by Sudhir Bhai to return to my room and spend time alone and in peace.

Once I reached the room, I sat down on the sofa and felt absolute peace and calm. I went into a meditative state for almost 30 minutes; it felt like a deep sleep. I was in total peace. It was almost like I had travelled to another world.
Sheela Mepani:

Hi Abha

As we set down in Shreeji’s room I felt I was at home, there was kind of warmth. On the flower swastika I saw some movement; at that point I thought I saw Bal Krishna moving.

But could be my imagination.

When we set with eyes closed I felt some movement on my head. My head got tilted upward and I started shaking. As I became aware It stopped.

On your forehead I could see some figure which I felt it was the BalGopal I saw earlier. I started crying. I could not control my tears. This was when there was no light.

You know I do not like to talk after any experience. So I went and sat in my room. Felt relaxed and sleepy. As I write now I have goosebumps.

Tushar Kochar:

सुबह जब श्रीजी के निज निवास में दर्शन के लिए बैठे हुए थे, तब अलोकिक शांति का अनुभव हुआ.

जब गुरुजी ने दर्शन के लिए बुलाया तब फूलो में सजे हुवे स्वस्तिक के दर्शन हुए.

जब गुरुजी ने म्यूज़िक शुरू करा, तो पंच्छीयोकि मधुर आवाज आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे जंगल में शांत बैठे हुए है और मधुर आवाज़ आ रही है, ऐसी अनुभूति हुई.

जब गुरुजी ने आभाजी के मस्तिक पर देखने के लिए संकेत करा, तब मस्तिष्क के बायें तरफ़ पर आकृति नजर आई परंतु दुरी के वजह से आकृति पहचान नहीं पाए.

पाट उत्सव के अद्भुत दर्शन हुए.

Aradhna Sharma:

दण्डवत प्रणाम  गुरुश्री व आभा जी

श्री जी की अपार कृपा से हम दोनो को   दो दिन का व्रज वास मिला जोआनन्द की अनुभूति हम साथ लेकर  जा रही हूँ उसका शायद वर्णन तो सूर्यको दीपक दिखाने जैसी बात होगी

बहुत बहुत आनंद व दिव्य ऊर्जाओं का मिलन एक बहुत आलोकिक घटना थी. मैं उस आनंद से बाहर नहीं आना चाहती हूँ

Thank you Shree ji n Gurushree  gurumaa abha ji ritesh bhaiya ji for all the experiences

I am feeling lucky n blessed to be there with you all.

कोटि कोटि दण्डवत प्रणाम महागुरुश्री मेरे श्री जी

गुरुश्री   व गुरु माँ आप के श्री चरणो में दण्डवत प्रणाम

सादर स्प्रेम प्रणाम आभा जी

आप  सभी को मेरा बारम्बार नमन

श्री जी के चरणो में पटोत्सव की बहुत बहुत बधाई ।मेरे अनंत जन्मो के शुभकर्मों का फल उन पलों का साक्षी बनना ।मैं उन पलों में से बाहर नहीं आना चाहती। उन  पलों को मैं बार बार याद करते हुए अभी  वहीं पे ही हूँ ।दिव्यआत्माओं का अपने प्रभु से मिलन एक अद्भुत व आलोकिक अनुभूति । मुझे मेरे जीवन  में जिस पूर्णता की  तलाश थी उस रास्ते की तरफ़ मेरा पहला क़दम यही है

कहाँ से शुरू करूँ

मैं इन पलों का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी  व श्री जी से प्रार्थना कर रहीथी की मेरी आप से मिलने की सब विघन वाधायाएं दूर करे व मैं जल्दी हीआप के दर्शन कर पाऊँ ।श्री जी ने वैसा ही किया ।जब आप सब से मिली तो मुझे ये लगा की मैं अपने ही परिवार में आ गयी हूँ हर सदस्य ने इतनीआत्मीयता से हमारा स्वागत किया जिस के लिए मेरे पास शब्द कम है ।आपसे व गुरु श्री से मिलने को जो मेरे मन में जो चल रहा था की पहली बार आपसे मिलना है आप को कैसा लगेगा पता नहि मैं इस क़ाबिल भी हूँ कि आपदिव्य आत्माओं के सन्मुख जा भी सकती हूँ आप से मिलने की ख़ुशी व अंदरसे डर्र भी लग रहा था की आप क्या बोलेंगे

फिर वो पल आया जिस का मुझे इन्तेज़ार था आप से व गुरुश्री से मिलना मेरे मन में वो हलचल थी जो एक विधायर्थी की परीक्षा से पहले होती है मेरे साथमेरे पति मनोज जी मुझे बार बार समझा रहे थे। फिर आप गुरु माँ व गुरुश्रीसे बात कर वो डर जाने कब ग़ायब हो गया.

अगले दिन सुबह की पूजा में शामिल होना एक बहुत दिव्य अनुभूति है आप ने जब हम सब को तिलक किया व हमें ठाकुर जीआज्ञा तक इन्तेज़ार करने को बोला तब हम सब निज महल के द्वार खुलने की प्रर्तिक्षा में बैठे थे वो पल मेरे लिए बहुत लम्बे व अब अगर सोचूँ तो बहुत सुखद थे मैं ठाकुर जी को मन में प्रार्थना कर रही थी की जल्दी दर्शन दो प्रभु

मैं हरेक तरह से शुध रूप में अपने प्रभु से मिलना चाहती थी मेरे मन ये भावआया ओर मैं बहुत छोटी  बच्चीं के रूप में उन कीं बाल सखी के रूप में उनके निज महल में गयी

जिस पूर्णता का मुझे अनुभव हुआ  मैं निशब्द हो गयी हूँ

कोटि कोटि वंदन प्रणाम ।मैं क़िन शब्दों में आप सब का शुक्रिया करूँ बहुतबहुत धन्यवाद

सभी से मिलकर बहुत अच्छा लगा रितेश भैया जी ऋतु जी मिली जी आप की भाभी जी व  वो सब जो वहाँ मोजूद थ

आभा जी आप से एक बिनती है कि आप मुझे बताए कि आप गुरुश्री  से मेरा पहली बार मिलना हुआ कि मैंने अपना दिल खोल के आप दोनो से बातें की आप को कैसा लगा

जय श्री कृष्ण आभा जी

आभा जी ये मेरी ठाकुर जी से हमेशा प्रार्थना होती थी कि जो आप का दिव्य वृंदावन है मुझे उस  में प्रवेश दीजिये। निज महल में प्रवेश exactly वो हीथा I Every picture became alive in that room as he was present in that room. When guruji asked me to come n have darshan it was wonderful n amazing exprience of total satisfaction. N guru ji ne mere bhav ko samajh liya n he said ki aap ko poornta ka ehsaas ho raha hai  .Then i noded my head with a big yes .As I was not able to speak . I was feeling purity n divinty all time.

When guru ji told ki abha ji mein darshan karo, I saw Glittering golden n silver light coming out of your forehead and Shree ji swaroop was on that.

Aap ko mera barm baar pranaam. As guru ji was telling all this i felt Shree ji was present in him  When ever i rewind my memory,  it was Shree ji  who was giving instructions in gurujis swaroop. koti koti pranaam to gurushree.

My bhav as i have written was purest of pure. I became very small girl.

ये मेरी वो स्थिति थी कि  जब एक पवित्र व पाक आत्मा पहलीबार होश संभाल रही थी। मुझे ये लगा की  मेरा दिव्य वृंदावन में प्रवेश था।

And when Gurushree told ki we have to leave this room, i was feeling की वक़्त रुक जाये ठाकुर जी मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे यहीं से वापिस ले चलो अपने निज धाम। मुझे उस दुनिया में वापिस नहीं जाना।

It was my total samrpan at that point. Mujhe nahi pta ye sab jo mere sath hua ye  aap ko kaisa lage ga but it is what i felt  मेरा मन तो वहीं रह गया है।   मैं वास्तविक में सदा वहीं रहना चाहती हूँ उनके साथ उनकेश्री चरणोमें

मुझ से कोई ग़लती हुई हो तो छोटी बच्ची समझ कर माफ़ कीजिए

ठाकुर जी के श्री चरणो में बार बार माफ़ी माँगती हूँ  अगर जाने अनजाने में मुझ से कुछ भूल हुई है उसे क्षमा कार मुझे अपने चरणो में लगाए रखे
Manoj Sharma:

Jai shree krishn abha ji.

We are there in nij mahal.

I felt very positive energies there.

My mind was totally calm and no thoughts were coming in the mind .

When guru ji told we will feel Shreejis presence, I saw a web in front of me and it was full of bright peacock colour.

Secondly i got darshan of gau mata on Abha jis forehead  when she was sitting in the centre .

Shreeji in his lalan swaroop was also present there.

My total exprience was presence of positive energies

We always talk about our this wonderful  tour which is very close to our heart .

Abha ji i have no words to explain how blessed  n lucky I am feeling .

Thanks a lot abha ji

Nisha Khandelwal:

On 16th February 2016 at Shreeji Nij Niwas, I felt calmness and peace.

When Sudhir bhai instructed I saw the Sathiya made of flowers.I had darshans of three colour lights – Yellow, orange, Blue; which was moving very fast over the Sathiya in the form of a flame.

(Later Abhaji explained that it was Shreeji who gave us darshans in this Form)

On Abhaji’s forehead on the left side, I saw clear picture of ShreeNathji Mangla Darshan with silver outline of His Dhoti. I got goose bumps.

When I met Abhaji after an hour these marks, Darshans were not there.

Vrindavan yatra was a very different experience, amazing anubhuties!

Pragnaji Shah:

” श्रीजी निजनिवास ”

महासुद -९ ( १६-२-२०१६)
एक अलौकिक अनुभूति का अनुभव।
प्रथम आँखे बंध करनेके बाद … पीछे की दीवार पर स्वस्तिक चिन्ह है
उस जगह से ” गोकुल चाँद – गोकुल चाँद ” शब्दों की मधुर गूंज
कर्ण पटल पर सुनाई देने लगी.
बाद मे धीरे धीरे आँखों के सामने एक प्रज्वलित गोल घूमता हुआ महसूस किया।
मस्तिस्क और पूरे शरीर मे  कुछ प्रवाह  का स्पर्श महशुश किया.
आँखे खोलने के बाद एक अद्भुत शांति और आनंद प्राप्त हुआ।
” साक्षात + शांति + आनंद = अलौकिकता ”
श्री जी के जय हो …..
प्रज्ञा शाह का जय श्री कृष्ण

(These are all their personal writings and experiences. I have only corrected few grammatical errors).

Jai Shreeji, Jai Gurushree;

It has been an alokik anubhuti for all, and I express gratitude from all of us for the kripa and sacred divya darshans.

जो श्रम ठाकुरजी को हुआ उसके लिए क्षमा चाहते हैं,

प्रणाम,

आपकी आभा शाहरा श्यामा

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A group photo of all the people whose experience I have described above.

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“JAI HO”

 

 

 

 

ShreeNathji enjoys sports day at a school.

ShreeNathji – His ” LIVE” interactions Varta in today’s time period

श्रीनाथजी से दिव्य  वार्तालाप आज के ज़माने मैं..

ShreeNathji enjoys sports day at a school.

श्रीनाथजी, “मैं ६ बजे तेरे यहाँ आ गया और मेरी छवि मैं बैठ गया था, फिर जल्दी से भागा और उसके साथ गाडी में बैठ गया”…

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1st November 2006

It is my child’s sports day today.
She has always been a very good athlete, and is excited, though a little nervous. She has to leave very early for the sports ground. Before leaving she prays to ShreeNathji for His blessings. (Shreeji’s large Chavi is in our living room and we pass it always when leaving the house).

As I am not going with her, I call my dear close friend, Millie who would be there at the sports ground, and request her to keep me posted about happenings at the races. Few hours into the event I receive her call, saying that my child has won gold in all the events. She won five gold medals in athletics this year.

As the varta goes:

A day earlier to the sports day, I had called up my Gurushree, Shri Sudhirbhai, asking for blessings for my child; so now I call up to inform him about her accomplishments.

Gurushree, is delighted and I hear him thanking ShreeNathji also.

Later that same night I have this very incredible vivid conversation with ShreeNathji Himself who describes His version of the sports event!

Writing it exactly as it went:

श्रीजी मुझसे कहेते हैं, “कल जब तुम सुधीर से फ़ोन पर बात कर रही थी मैं सुधीर के पास ही था. मैंने उसको पूछा की ये स्पोर्ट्स डे क्या होता है? आभा क्या बात कर रही है?
Shreeji tells me, “Yesterday, when you were talking to Sudhir on the phone, I was there with him. I asked him what sports day means. What is Abha talking about?

श्रीजी आगे बताते हैं, “तो सुधीर ने मुझे समझाया की स्कूल के बच्चों की प्रतियोगिता होती है, और मुझसे पूछा की आप वहां जाकर देखना चाहते हैं? मैंने हाँ करी.
Shreeji continues, “Sudhir explained to Me that it is a school competition, and asked Me if I wished to go there and see how it happens. I said yes to him”.

श्रीजी- “अरे, इसने (सुधीर) बोला तो मैं वहां गया. नहीं तो मैं ऐसे कहीं किसी के साथ नहीं जाता”.
Shreeji- “Arrey, Sudhir told me to go, that is why I went there. Other wise I never go any where with anyone like this.

श्रीजी- “फिर समस्या हुई की मुझे कैसे पता चलेगा कहाँ जाना है? सुधीर ने सुझाव दिया की सुबह जल्दी आभा के यहाँ चले जाना और बच्ची के साथ में ही स्पोर्ट्स ग्राउंड चले जाना”.
Shreeji- “Then rose the problem of how will I know where to go? Sudhir guided Me saying that I should go early to Abha’s house. From there I can go with her child to the sports ground.

श्रीजी आगे बताते हैं, “इसलिए मैं सुबह ६ बजे से तेरे यहाँ आ गया था; मेरी बाहर वाली छवि मैं बैठ गया. सुबह तैयार होकर तेरी बच्ची मेरे पास आई प्रणाम करने और आशीर्वाद के लिए”.
“फिर जब देखा की वोह निकल रही है, जल्दी से भागा और उसके साथ गाडी में बैठ गया. क्यों की मालूम नहीं था की कहाँ जाना है”.
Shreeji continues, “So early morning at 6 I reached your house and sat down in My Chavi which is outside in the hall. Your child came to Me to do her pranam and for blessings, before she left. As soon as I saw her leave, I also ran and sat in the car with her; as I did not know where to go.

श्रीजी- “स्पोर्ट्स मैदान में, मैं उसके पीछे खड़ा हो गया, क्योंकि मालुम ही नहीं था की क्या करना है”. “फिर सब भागने लगे, और तेरी बच्ची भी तेज़ी से भागी. मैं तो खड़ा ही रह गया.वोह पहले नंबर पर आई, और खूब जोर से ताली बजी;
Shreeji- “At the sports ground I stood behind her, as I just did not know what to do”. “Then suddenly all began to run and your child also ran fast. I was just left standing there alone. She came first and all clapped loudly for her.

श्रीजी थोड़ी सी उदास आवाज़ में आगे बताते हैं, “लेकिन मुझे कोई नहीं देख रहा था. मैं खड़ा रहा, समझ में नहीं आया क्या करूँ. लेकिन मज़ा आया. बहुत धूप थी, और गर्मी भी.
Shreeji continues a little sadly, “But no one was looking at Me. I just stood there as I did not understand what to do.
It was a lot of fun. But it was very sunny and hot.

श्रीजी- “थोड़ी थोड़ी देर में मैं तेरी बच्ची का चेहरा देख लेता था, मैं सही जगह पर ही हूँ न.
वहाँ कई बच्चे कागज़ खोल कर कुछ खा रहे थे, वो क्या होता है?
Shreeji- “Every few minutes, I would look at your child’s face; and made sure that I am yet in the right place. Many children were eating something from a paper packet, what was that?”

आभा- “श्रीजी, वो सैंडविच होगा, सब बच्चे पसंद करते हैं”.
Abha- “Shreeji, that must be a sandwich. Most of the children enjoy eating that.

आभा- “श्रीजी यह तो बताइये की आपको कैसा लगा? आशा है की स्पोर्ट्स डे में आपको मजा आई. आपने कभी ऐसा देखा ही नहीं होगा”.
Abha- “Shreeji, how did You like being there, hope you enjoyed the Sports day and had fun. I am sure You must have never seen anything like this before”.

श्रीजी शिकायत के लहजे में, “अरे, सब कितनी आवाज़ करते हैं! बहुत गर्मी भी थी वहां. वोह लोग ऐ.सी (AC)रूम में क्यों नहीं भागते हैं?
Shreeji in a complaing tone, “Arrey, these children make so much noise! It also became very hot. Why don’t these children run in an AC room?”

मुझे हँसी आती है. “श्रीजी इसलिए की बहुत बच्चे होते हैं इतना बड़ा कमरा कहाँ से लाएँगे”.
I burst in laughter. “Shreeji, maybe because there are a lot of children. It is not possible to get such a large room for sports events”.

श्रीजी नटखट आवाज़ में कहते हैं, “हाँ.. फिर तो उनको एक छोटा ए.सी (AC) साथ लेकर दौड़ना चाहिए, अपने अपने सर के ऊपर. हा हा हा. लेकिन वोह चलेगा कैसे”.
और यह देखो, धूप में मैं कितना काला हो गया”. श्रीजी मजाक में कहते हैं.
Shreeji continues talking in His naughty tone, “Han.. But then they should all run with a small AC fitted on their head. Ha Ha, but then how will the AC work”.
Also just see, how black and dark I have become in the sun..” Shreeji jokes.

श्रीजी आगे कहते हैं, “बहुत बच्चे थे, मुझे आनंद आया. पहले मैंने सोचा की तेरी बच्ची को उठा कर जल्दी से आगे रख दूँ, पर सुधीर की कही हुई बात याद आ गयी। उसने बोला था, ‘श्रीजी कोई मस्ती नहीं करना वहाँ पर. सब लोग घबरा जायेंगे. कुछ नुक्सान भी नहीं होना चाहिए. फिर जब मन करे, आप वापस आ जाना’.
Shreeji continues with His dialogue, “There were a lot of children, I enjoyed Myself. Initially I had thought of lifting your child and putting her directly on the finish line. But I remembered Sudhir’s warning. He had told Me not to do any mischief and just watch. Sudhir had explained that I should not cause any problem, as it could frighten the people present there. And whenever I feel like it, I could leave and go back”.

My child also told me later. “I felt very confident and there was no exhaustion after running the races. There was no negative thought in my mind”. (She had won gold in all the three running events).
I explained God’s blessings to her, her own faith in Shreeji, and His Presence in our house. We both did a dhoop for Shreeji and thanked Him for His blessings.

The same day later Millie too told me that as she entered the sports ground, she smelt the fragrance of Nathdwara Prasad. She looked around her, but there was no tree or foliage from which the fragrance could come. It all felt very divine. While returning also, at the same point; she could smell the Nathdwara Prasad fragrance again.
This might be because of ShreeNathji’s Live Presence as Lalan in that area. And Millie is His bhakt.

Some happenings are un explainable and incredibly divine in nature. They cannot be explained in worldly language and can be understood and accepted only in faith and bhakti.

(For those who have never eaten the prasad from Nathdwara, Shreeji’s prasad has the typical fragrance of kapur( camphor) and some added spices which is very typical of the Nathdwara Haveli prasad).

It is always kripa of God and Guru, that one can be fortunate enough to be a nimit for such divine interactions.

My pranam to my Gurushree and MahaGurushree, I am humbled by this divyata in my life and the divine love and kripa that I am showered with!

Jai Shreeji
Jai Shree Radhe Krishn!

पूर्णता से समर्पित मेरे श्रीजी के चरणों में

With Thakurjee’s desire and my Gurushree’s permission this present day leela and Khel is being made public. It is ShreeNathji’s Love for His bhakts.
ठाकुरजी के भक्त उनकी मीठी और दिव्य खेल और लीला का आनंद उठा सकते हैं।
और लीला मेरे इसी फ़ेस बुक पेज पर आपको मेलिगी। ज़रूर पढ़िए और आनंद लीजिए
Many more Live leela with ShreeNathji can be read on my face book page: abha shahra Shyama.

ShreeNathji’s Udhva Bhuja Blesses!!

ShreeNathji LIVE Varta in todays time period with His bhakts

ShreeNathji’s Udhva Bhuja Blesses!!

श्रीजी उनकी उद्धव भुजा नीचे लाते है और मेरे सर पर बहुत अलोकिक प्रेम और दुलार से आशीर्वाद देते हैं.

ShreeNathji

ShreeNathji

19-20 September 2005

At Nathdwara, as I rested in the afternoon, after Rajbhog darshans, this Divine happening, I experienced in full awareness. I experienced this incredible blissful darshans as a vision of me holding on to Shreeji’s little toes.

नाथद्वारा में, राजभोग दर्शन के बाद जब मैं आराम कर रही थी, पूर्ण जागृत स्थिति में यह दिव्य अनुभूति  मुझे हुई. श्रीजी के छोटे, कोमल पग को पकडे हुऐ यह भाव मुझे कुछ अनोखे आनंदमय मन की स्थिति में हुआ.

It is the Mangala darshan, at Shreeji’s Haveli. I can see myself there, pressing Shreeji’s feet, while He is having a conversation with me!

श्रीनाथजी  की हवेली में मंगला दर्शन हो रहे हैं और मैं श्रीजी के पग दबा रही हूँ. श्रीजी मुझसे वार्तालाप भी कर रहे हैं!

Shreeji is complaining to me how tired He gets standing every day.

श्रीजी मुझसे कह रहे हैं की वोह खड़े रहकर कितने थक गए हैं.

“See, my Feet hurt soo much, but nobody presses Them. I think, I might just leave Nathdwara and run away”.

“देखो मेरे पग कितने दुखते हैं, कोई दबा के नहीं देता. मैं सोचता हूँ की नाथद्वारा छोड़ कर भाग जाऊं.

I again ask Shreeji, “Shreeji, Your Arm must be hurting also. Since Hundreds of years You have been holding Your Udhva Bhuja up”.

मैं फिर श्रीजी से पूछती  हूँ , “श्रीजी, आप की उद्धव भुजा भी तो दुखती होगी? इतने सालों से आप ने ऊपर उठा कर रखी है”.

Shreeji replies, “Yes, you are very right, My Left Arm also hurts”.

श्रीजी जवाब देते हैं, “तुम ठीक कहती हो. मेरी उद्धव भुजा भी दुखती है” .

Incredibly, at that moment;

SHREEJI BRINGS HIS LEFT BUHJA DOWN AND CARESSED MY HEAD AND FACE IN ALOKIK LOVE AND BLESSING.

आश्‍चर्यजनक रूप से उसी पल में;

श्रीजी उनकी उद्धव भुजा नीचे लाते है और मेरे सर पर बहुत अलोकिक प्रेम और दुलार से आशीर्वाद देते हैं.

What name can I give to such an alokik anubhav!

ऐसे अलोकिक अनुभव को क्या नाम दे सकते हैं!

This close encounter lasted for a whole 45 minutes.

I woke up and was so lost in this experience; I had to ask Gurushree about it.

It seemed he already knew about it and silenced me, telling me not to mention it to anyone for the time being.

Gurushree explained to me, “These are real darshans and you were not dreaming”.

गुरुश्री मुझे समझाते हैं, “यह वास्तविक दर्शन हैं और तुम सपना नहीं देख रही थी”.

It was for sure a real happening, or else how am I able to actually feel that touch from Shreeji’s Udhav Bhuja even after all these years. Till today I am able to feel Shreeji’s tender, gentle hand on my head and the extraordinary Divya Urja that came from Shreeji.

यह एक वास्तविक दर्शन ही हैं क्योंकि आज भी, जब मैं यह अनुभव लिख रही हूँ, या फिर इसके बारे में कभी सोचती हूँ, मुझे श्रीजी के कोमल हाथ अपने  माथे पर महसूस होते हैं और मैं उसी दिव्य ऊर्जा के कम्पन का अहसास करती हूँ.

This has to be some Grace and Kripa from my Gurushree and MahaGurushree, ShreeNathji, that I have been the receiver of this Divine Love and Blessings.

MahaGurushree, Shreeji Ki Jai Ho!!

Jai Ho Thakurjee!

Shreeji gives us Hukum to come play Holi with Him at His Haveli on Valentine’s Day

ShreeNathji – His “LIVE” interactions varta in today’s time period.

Shreeji gives us Hukum to come play Holi with Him at His Haveli on Valentine’s Day

“मुझे तुम दोनों के साथ रहना था और होली भी खेलनी थी”.

 

 13th, 14th, 15th February, 2008. Magh Sud Ashtmi, VS 2064

(I am speech less after this writing; no words will ever be able to describe the magnitude of Shreeji’s love for his bhakts).

rajbhog

ShreNathji at Rajbhog Darshans

 

… On 13th morning, around 11.30 am, Gurushree Sudhir bhai calls up, “Do you want to go to Nathdwara? We will leave today evening, do all darshans tomorrow and come back on the 15th evening”.

As the program is so sudden, I reply that I need some time to think it over and will call him back in sometime. Sudhir bhai realizing that I am a little hesitant says it is okay, we will go some other time.
As for me, I was hesitant because there are some important work and appointments lined up for the next day.
I am in a confused state of mind at having said no to going for darshans.
In an hour I receive another call from Gurushree, “I have booked my ticket on the 5.40 pm Kingfisher flight and I am leaving for Nathdwara”.

I have never ever declined an offer to visit Dear ShreeNathji, so I am upset, as how could Gurushree decide to go without me.
(At this moment I am not aware that it is Shreeji’s hukum for us to reach Nathdwara).
As I whined on the phone, my two daughters who were watching this, asked me, “Who are you speaking to and what is happening”?

 

I explained how I had hesitated to go for darshans to Nathdwara earlier and now Sudhir bhai is going by himself.
“So why are you so upset? Why don’t you also go”? I explained that I could not as this was so sudden and there were some very important appointments and work lined up for the next day

 

My daughters laughed, “You are so stupid, mummy, please go we will manage all of this, no worries. We can also help you pack. Let’s book your ticket too. Don’t worry about us. How does it matter if its last minute? We will complete everything for you. Just go, we know how much you love going to Nathdwara”. So they made my bookings in the same Kingfisher flight and I was lucky enough to get the ticket too.

 

While packing, I can already feel a sudden bliss which overcomes me. It felt sooo good, going to Nathdwara. All goes smooth, and my dear daughters packed me off to go visit my beloved ShreeNathji.
The amazing events and happening felt incredible. I felt so light, so joyous, just kept on laughing, nothing else mattered. Suddenly I felt transformed. All worries disappeared. All I could think of was to reach Nathdwara soon and go for ShreeNathji darshans.
This transformation happens in many of my yatras as usual, when I feel like a different person. Sudhir bhai says that it is my soul which takes over me in the outer world.

 

From now till the next morning it never struck me that it is 14th and Valentine’s Day.

 

Next morning, as we waited in the Haveli parisar for Mangla darshan to open, Gurushree, Sudhir bhai finally told me something very astounding, as to the real reason why we had to come so suddenly.

“Shreeji learnt the meaning of Valentine’s day from me. He sees the excitement happening all around so asked me what it actually means. I explained simply, saying that it is a day when people celebrate with their loved ones. Shreeji was very excited and then gave me hukum that he wanted you and me to be in Nathdwara for the 14th February.
“He, ShreeNathji”, wished to spend the Valentine’s Day with both of us, because we were the two bhakts that He loved deeply, in our world; Abha Shahra and Sudhir Shah. Also it is Falgun month and Holi is played in His mandir, so Shreeji invited both of us to be present on Valentine’s Day at His Haveli to play Holi with us.
That is why I called up and made a sudden program. Shreeji did not let me tell you at that time, why we had to make a sudden decision. His order was that I could only tell you once we reach the Haveli”.

 

What a super surprise!
Shreeji made Sudhir bhai plan this yatra, so that He, ShreeNathji, Thakurjee, wanted to be with both of us at His Param Dham, Nathdwara, for Valentine’s and He wished to play Holi with us at His mandir.

I am speech less after this writing. What do I say? I am at a loss of words here; no words will ever be able to describe the magnitude of Shreeji’s love for his bhakts.

 

Later at the mandir before Rajbhog Darshans, as we sat at the Dhajaji, we heard Shreeji,

श्रीजी: “देखो मैंने तुम दोनों को बुला लिया ना  मुझे मालूम पड़ गया वैलेंटाइन डे किया होता है .

मुझे तुम दोनों के साथ रहना था और होली भी खेलनी थी.

बहुत अच्छा किया की तुमने सुधीर की बात मान ली.

तुम दोनों मेरे बहुत प्यारे हो”.

“मैंने ही सुधीर से कहा था की तुम लोग नाथद्वारा आओ और मेरे साथ होली खेल कर मेरे साथ वैलेंटाइन डे मनाओ”.

Shreeji:“See, I called both of you’ll here. I understood what Valentine’s Day means.
I told Sudhir that I wished to spend this day with both of you at My mandir and also play Holi with you’ll.
I am glad that you agreed to Sudhir and came here.
Both of you are my loved bhakts”.
“It was Me who ordered Sudhir to come to Nathdwara, and play Holi with Me at My mandir on this day”.

 

The ten minutes as we stood sanmukh Thakurjee in the Rajbhog darshans, it felt as if time stood still. I stood transfixed watching Shreeji being covered with Holi colours. It was like entering into a trance.

I received the best of darshans and just stood there in His Sanmukh; feeling Shreeji’s Love as I was drenched with His vibrations; it is a very pure and sublime moment, nothing else is remembered;
Though there is tremendous crowd and noise, I am not distracted. It is me and Shreeji playing Holi and the rest of the world disappears for those few moments.
Gurushree and I stood before Shreeji, on Valentine’s Day, 14th February 2008, playing Holi with Him, drenched in His love for us.

The divyata of this moment has no verbal expression. It is only to be felt and be very very grateful for the kripa.

This entire darshan takes nearly 30 minutes. We do not shake off the sacred colours; it is collected in a packet to be distributed as Shreeji’s Blessings to close family.

 

One should not run away thinking about the clothes; in fact this drenching with colours in Shreeji’s mandir, within His Purest vibrations is one of the easiest ways to enter higher purity. Shreeji Himself plays colours for an entire month, so that all bhakts can avail of His purifying Blessings.
After this is the ‘Aarti’.

As I bow, my forehead which touches the ground is also covered with the pure, divine colours. I do not wipe it off and accept this as a parting gift from my beloved Shreeji.

 

When Shreeji wishes some happening to take place, nothing can come in between. All plans work perfectly for Him.
How it happens, Sudhir bhai tells me often I should not think, only keep faith and accept gratefully what Shreeji gives us, in small matters as well as big happenings.
We complete all the eight darshans that day and visit Shreeji’s gaushala. I had also booked thuli for all my kids.

 

I am speech less after this writing. What do I say? I am at a loss of words here; no words will ever be able to describe the magnitude of Shreeji’s love for his bhakts.

My entire love and devotions are there for Him thanking Him for this Kripa and Grace. How lucky could I be!

Jai Ho Prabhu, Jai Shreeji!